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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में लापरवाही ने ली दो मासूमों की जान — खुला गड्ढा बना मौत का कुंड, सिस्टम की बेरुखी से भड़का जनाक्रोश

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में प्रशासनिक लापरवाही और बिल्डर की गैरजिम्मेदारी ने रविवार को दो मासूमों की जिंदगी निगल ली। हीरापुर क्षेत्र में सड़क किनारे पानी से भरे खुले गड्ढे में गिरकर दो मौसेरे भाई—सत्यम (8) और आलोक (7)—की दर्दनाक मौत ने पूरे शहर को दहला दिया। मासूम बच्चे अपनी मौसी के बेटे के जन्मदिन में शामिल होने आए थे, लेकिन खेलते-खेलते मौत के कुंड में समा गए। देर शाम घर न लौटने पर जब परिजनों ने तलाश की, तो सच सामने आते ही पूरा गांव शोक में डूब गया।
बिल्डर की ‘गैरजिम्मेदार खुदाई’ ने ली जान
यह गड्ढा एक निजी बिल्डर द्वारा खुदवाया गया था। महीनों से इसे भरा नहीं गया। बारिश के बाद गड्ढा पूरी तरह पानी से भर गया और किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह मासूमों के लिए जानलेवा साबित होगा। शाम को कुछ लोगों ने पानी में बच्चों के तैरते शरीर देखे तो अफरा-तफरी मच गई। उन्हें निकालकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
क्षेत्र में उबाल—चक्काजाम से 3 किमी का लंबा जाम


हादसे की खबर फैलते ही परिजनों और ग्रामीणों में भारी गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने हीरापुर-जरवाय रोड पर चक्काजाम कर दिया। रिंग रोड नंबर-3 पर वाहनों की 3 किलोमीटर लंबी कतार लग गई। ग्रामीणों का आरोप था कि खुले गड्ढे की शिकायत कई बार की गई, लेकिन प्रशासन ने अनदेखी की।
पुलिस-प्रशासन की देर से सक्रियता
मौके पर कबीर नगर और आमानाका थाना पुलिस की टीम पहुंची। देर रात काफी मशक्कत के बाद लोगों को समझाकर जाम खुलवाया गया। परिजनों ने मुआवजे और बिल्डर पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
यह हादसा सिर्फ दो बच्चों की मौत नहीं, बल्कि राजधानी में गहरी प्रशासनिक विफलता की पीड़ा का प्रतीक है।

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