बिलासपुर ,रायपुर,दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में एक ऐसी वीभत्स वारदात सामने आई है जिसने देशभर में कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। गैस कटर से घर का लोहे का दरवाजा काटकर 20–25 लोगों की भीड़ ने एक शख्स को जबरन बाहर घसीटा, सरेराह नंगा घुमाया और फिर हथियार व पत्थरों से पीट-पीटकर मार डाला। यह पूरी घटना कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई, जहां पुलिस की मौजूदगी और कानून के खौफ को दरकिनार कर भीड़ ने निर्ममता की सारी हदें पार कर दीं। पुलिस ने अब तक आठ संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
पैसों के लेनदेन की रंजिश में हत्या की आशंका


मृतक संतोष आचार्य शीतला नगर का रहने वाला था। जमीन की खरीद-बिक्री और ब्याज पर पैसे देने का काम करता था। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि पैसों का लेनदेन और आपसी रंजिश उसकी हत्या की बड़ी वजह बन सकती है। संतोष पिछले कुछ समय से शराब के नशे में डूबा रहने लगा था, जिससे घर-परिवार और करीबी उससे दूरी बनाने लगे थे।
पत्नी ने पहले ही चेताया था — “बाहर मत निकलना, कुछ लोग पीछा कर रहे हैं”
7 नवंबर को संतोष का किसी व्यक्ति से विवाद हुआ था, जिसके बाद उस व्यक्ति ने उसके खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज कराई थी। उसी शाम संतोष ने पत्नी को फोन कर बताया कि कुछ लोग चाकू लेकर उसका पीछा कर रहे हैं। डर के साये में पत्नी ने उसे घर से बाहर न निकलने की सख्त सलाह दी थी, लेकिन किस्मत उसके खिलाफ चल रही थी।
गैस कटर से काटा दरवाजा, फिर भीड़ ने की बर्बर हत्या
शुक्रवार देर रात 15–20 आरोपियों का गिरोह संतोष के घर पहुंचा। गैस कटर से घर का दरवाजा काटा गया, शोर-शराबे के बीच संतोष को घर से घसीटकर बाहर निकाला गया। सड़क पर भीड़ ने उसे नंगा कर घुमाया और फिर हथियारों व बड़े पत्थरों से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। घटना इतनी भयावह थी कि स्थानीय लोग दहशत में घरों में कैद हो गए।
आठ आरोपी हिरासत में, कई अब भी फरार
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आठ संदिग्धों को हिरासत में लिया है। पूछताछ जारी है और फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए कई टीमें बनाई गई हैं। पुलिस का कहना है कि हत्या की पूरी साजिश, भीड़ का इकट्ठा होना और पैसों के विवाद का कनेक्शन विस्तार से खंगाला जा रहा है।
कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इस भीड़ हिंसा ने इलाके और प्रशासन दोनों को हिलाकर रख दिया है। सवाल है कि गैस कटर लेकर घर का दरवाजा काटने तक किसी को भनक क्यों नहीं लगी? कानून के हकदार होने के बावजूद, इतनी बड़ी भीड़ हत्या की नृशंसता को अंजाम तक कैसे पहुंचा गई?
यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि कानून के खुलेआम मखौल का भयावह उदाहरण है।



