मोहम्मद इसराइल बबलू
धान खरीदी से पहले छत्तीसगढ़ में सहकारी कर्मचारी और ऑपरेटरों का आक्रोश सातवें दिन भी उफान पर
बिलासपुर/छत्तीसगढ़। धान खरीदी सीजन शुरू होने में महज़ पांच दिन बचे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के सहकारी तंत्र में बड़ा संकट गहराता जा रहा है। सहकारी समिति कर्मचारी संघ और समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ के संयुक्त आह्वान पर शुरू हुआ अनिश्चितकालीन आंदोलन रविवार को भी सातवें दिन जारी रहा। संभागीय स्तर पर आयोजित इस आंदोलन में बिलासपुर संभाग के सभी आठ जिलों—बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, कोरबा, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़—के समिति कर्मचारी और ऑपरेटरों ने भारी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई।




3 नवंबर 2025 से शुरू हुआ यह संयुक्त आंदोलन प्रदेशव्यापी चार सूत्रीय मांगों को लेकर भड़क उठा है। कर्मचारी और ऑपरेटरों का कहना है कि 18 वर्षों से वे सहकारी धान खरीदी प्रणाली की रीढ़ हैं, लेकिन सरकार और विभाग उन्हें ‘अस्थायी, असुरक्षित और उपेक्षित’ स्थिति में छोड़ते आए हैं।
चार मांगें जो आंदोलन का कारण बनीं…
1. सुखत की भरपाई की मांग
समितियों का कहना है कि धान खरीदी के दौरान समय पर उठाव नहीं होने से ‘सुखत’ (नमी वृद्धि) की स्थिति बनती है। सुखत का नुकसान समितियों को झेलना पड़ता है, जबकि यह जिम्मेदारी न तो किसान की है, न समिति की। इसलिए सुखत का भुगतान शासन से कराने की मांग उठाई जा रही है।
2. 18 वर्षों से कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटरों का नियमितीकरण और 12 माह का वेतन
2007 से संविदा आधार पर कार्यरत ऑपरेटरों ने बताया कि समर्थन मूल्य धान खरीदी का पूरा सिस्टम—पंजीयन से लेकर ऑनलाइन रिपोर्टिंग तक—उनके कंधों पर टिका है।
- सरकार ने 25–26 के धान खरीदी वर्ष में इन अनुभवी ऑपरेटरों को दरकिनार करते हुए आउटसोर्सिंग भर्ती शुरू की।
- संघ के विरोध के बाद यह प्रक्रिया नीति से हटाई गई, लेकिन अब 18 साल पुराने ऑपरेटरों को केवल 6 माह वेतन देने की बात हो रही है।
- ऑपरेटरों ने कहा—“18 साल काम कराए, फायदा उठाया, लेकिन अब आधा साल वेतन? यह अन्याय है।”
- ऑपरेटरों की मांग: 12 माह वेतन + निश्चित विभाग + नियमितीकरण।
3. प्रबंधकीय अनुदान के लिए 3 लाख रुपए की मांग
मध्य प्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ की 2058 सहकारी समितियों को 3 लाख रुपए प्रतिवर्ष अनुदान दिया जाए, ताकि कर्मचारियों को समय पर वेतन, संचालन व्यय और व्यवस्थाएं सुनिश्चित हो सकें।
4. सेवानियम 2018 में संशोधन व संशोधित वेतनमान लागू
इसके साथ ही अपेक्स बैंक द्वारा जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में 50% भर्ती में समिति कर्मचारियों को प्राथमिकता दिए जाने की मांग भी शामिल है।
आंदोलन ने धान खरीदी तंत्र को ठप कर दिया
15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने वाली है, लेकिन संयुक्त हड़ताल का सीधा असर जमीनी स्तर पर दिख रहा है—
- सोसायटी परिसर में फड़ की सफाई रुकी हुई
- किसानों का पंजीयन पूर्णता बंद
- कई समितियों में ताले लगे हुए
- किसान बार-बार चक्कर काट रहे हैं, लेकिन व्यवस्था ठप
कर्मचारियों ने साफ कहा—“हम आंदोलन समाप्त करेंगे, लेकिन अपने हक के बिना नहीं।”
प्रशासन और सरकार से कई बार गुहार, लेकिन सुनवाई नहीं
कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि वे लगातार—
- खाद्य विभाग
- सहकारिता विभाग
- पंजीयक सहकारी संस्थाएं
- और मुख्यमंत्री कार्यालय
सब जगह अपनी मांगें रख चुके हैं, लेकिन “शासन संवेदनहीन बना हुआ है।”
एक कर्मचारी ने कहा,
“18 साल उम्र देकर सिस्टम को संभाला, ऑनलाइन पैक्स कंप्यूटरीकरण खड़ा किया, लेकिन आज भी हमें छह महीने का कर्मचारी ही मानते हैं। यह अन्याय है।”
आंदोलन रविवार को भी जारी, अब ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ की तैयारी
रविवार को भी आंदोलन थमा नहीं।
- बिलासपुर संभाग के आठों जिलों के कर्मचारी बड़ी संख्या में धरने पर बैठे।
- कल बड़ा ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ आयोजित किया जाएगा।
- इसमें लगभग 2700 कर्मचारी शामिल होने का अनुमान है।



