ऑपरेशन टेबल पर झटके, शरीर में अकड़न, डॉक्टर बोले- रिएक्शन की आशंका… महिलाओं की चीखें फिर से गूंज उठा नसबंदी कांड का साया
मोहम्मद इसराइल बबलू| बिलासपुर , रायपुर, दुर्ग
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में नसबंदी के दौरान एक बार फिर मौत का ऑपरेशन थियेटर खुल गया है। जिला अस्पताल के मदर-चाइल्ड यूनिट में शनिवार को की गई नसबंदी और सिजेरियन सर्जरी के दौरान दो महिलाओं — पूजा यादव (27 वर्ष, बजरंग नगर) और किरण यादव (30 वर्ष, सिकोला भाटा) — की दवा के रिएक्शन से मौत हो गई। डॉक्टरों की टीम के मुताबिक, दोनों को ऑपरेशन टेबल पर ही झटके और शरीर में अकड़न आने लगी थी। आनन-फानन में उन्हें ICU ले जाया गया, लेकिन कुछ ही घंटों में दोनों ने दम तोड़ दिया।


यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर सनसनी मचा रही है, बल्कि 2014 के बिलासपुर नसबंदी कांड की यादें ताजा कर दी हैं, जब नसबंदी शिविर में 16 से 17 महिलाओं की मौत हुई थी और 100 से अधिक महिलाओं की जान खतरे में पड़ गई थी। उस समय ‘सिप्रोसीन’ नामक एंटीबायोटिक दवा को मौतों का कारण बताया गया था, जबकि जांच रिपोर्ट आज तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।
मौतों का सिलसिला फिर शुरू — ‘महिला स्वास्थ्य सुरक्षा’ पर उठे सवाल
पूजा यादव ने कुछ दिन पहले गर्भपात कराया था और अब स्थायी गर्भनिरोध के लिए नसबंदी के लिए भर्ती हुई थीं। सर्जरी के दौरान बुपीवाकेन, मिडान इंजेक्शन और रिंगर लैक्टेट दिया गया था। इसी बीच उसे झटके आए और ICU में ले जाते-ले जाते उसकी मौत हो गई।
वहीं किरण यादव ने उसी दिन सुबह सिजेरियन डिलीवरी से बच्चे को जन्म दिया था। परिजनों की मांग पर उसी दौरान नसबंदी भी की गई। लेकिन शाम होते-होते किरण का शरीर अकड़ने लगा, सांसें थम गईं। डॉक्टरों ने CPR देकर उसे बचाने की कोशिश की, मगर सफलता नहीं मिली।
डॉक्टरों ने जताई दवा रिएक्शन की आशंका
सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज ने कहा,
“दोनों को ऑपरेशन के दौरान झटके और अकड़न आई थी। दवा के रिएक्शन की संभावना लग रही है। सभी दवाओं की जब्ती बनाकर जांच शुरू कर दी गई है।”
सर्जरी करने वाली डॉ. उज्जवला देवांगन और एनेस्थेसिया विशेषज्ञ डॉ. पूजा वर्मा ने भी यही आशंका जताई।
शनिवार को कुल 9 महिलाओं की सर्जरी हुई थी, जिनमें से दो की मौत हो गई जबकि बाकी 7 महिलाएं सुरक्षित बताई गई हैं।
2014 का बिलासपुर नसबंदी कांड: अब तक नहीं भूला प्रदेश
नवंबर 2014 में बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक के नसबंदी शिविर में 83 महिलाओं की सर्जरी एक ही दिन में की गई थी। इनमें से 16 महिलाओं की मौत हो गई और 100 से ज्यादा की हालत गंभीर हो गई थी। उस समय सरकार ने दवा निर्माता और चिकित्सा अमले को दोषी ठहराया था, लेकिन 10 साल बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो पाई।
अब दुर्ग की यह दो मौतें सरकारी अस्पतालों की नसबंदी सुरक्षा नीति पर दोबारा सवाल खड़ा कर रही हैं। ग्रामीण इलाकों की महिलाएं अब तक 2014 के कांड से उबर नहीं पाई हैं — और अब यह नया हादसा एक बार फिर “सरकारी नसबंदी = जोखिम” का भय बैठा रहा है।
स्वास्थ्य तंत्र के लिए झटका, सरकार पर जवाबदेही का दबाव
प्रदेश में मातृ-स्वास्थ्य और परिवार नियोजन अभियान को लेकर सरकार लगातार आंकड़े बढ़ा रही है, लेकिन मौतें यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि क्या सुरक्षा मानक केवल फाइलों में हैं?
परिजन सदमे में हैं, स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं, मगर अब एक बार फिर छत्तीसगढ़ की नसबंदी नीति “विश्वसनीयता के ICU” में चली गई है।



