मोहम्मद इसराइल बबलू | बिलासपुर/रायपुर
छत्तीसगढ़ में उपमुख्यमंत्री अरुण साव और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सरकारी कार्यक्रम से जुड़ा एक नया बिल विवाद सामने आया है। दस्तावेजों के अनुसार, कवर्धा जिले के बोड़ला स्थित रानीदेहर जलप्रपात में 4 अगस्त 2024 को नहाने के दौरान मंत्री अरुण साव के भांजे की मौत के बाद 9 अगस्त को कवर्धा और बैसतर क्षेत्र में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई थी। इसी कार्यक्रम से जुड़े टेंट, पंडाल और अन्य व्यवस्थाओं पर हुए खर्चों के बिल में भारी गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। प्रेस वार्ता के दौरान शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय पांडे, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जावेद मेमन, पूर्व सभापति शेख नजीरूद्दीन और प्रवक्ता ऋषि पांडे उपस्थित थे।

श्रद्धांजलि सभा में हुआ लाखों का खर्च
9 अगस्त 2024 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कृषि मंत्री रामविचार नेताम श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए थे। इस अवसर पर टेंट, कुर्सी, मंच, साउंड और अन्य व्यवस्था के लिए “गुरुदेव टेंट हाउस एंड कैटरिंग” (रायपुर रोड, श्रीकृष्ण विहार, बैसतर) को ठेका दिया गया। दस्तावेज़ बताते हैं कि इस कार्यक्रम की कुल लागत लगभग ₹87,34,424 बताई गई।
लोक निर्माण विभाग (PWD) के अभियंता लोक निर्माण संभाग बैसतर द्वारा इस खर्च के पांच अलग-अलग बिल जमा किए गए — जिनमें बिल राशि और स्वीकृत राशि में बड़ा अंतर है।
बिलों में मिला लाखों का फर्क







दस्तावेजों के अनुसार,
Ref No–01: ₹23,74,342 का बिल, जबकि जोड़ा गया ₹18,49,025
Ref No–04: ₹3,50,506 का बिल, पर स्वीकृति ₹21,99534 बताई गई
Ref No–05: ₹33,293 का बिल
Ref No–07: ₹2,16,847 का बिल, पर “काटा गया बिल” लिखे होने के बावजूद भुगतान दिखाया गया
Ref No–26: ₹31,38,537 का बिल, जबकि दर्शाया गया ₹30,38,540
इसी तरह, 18 जून 2025 को जारी तीन अन्य बिलों (Ref No–05, 06, 07) में क्रमशः ₹21,99,534, ₹33,29,310 और ₹32,05,580 के भुगतान दर्ज हैं। इन सबकी कुल राशि फिर से वही ₹87,34,424 बनती है — जो पहले से स्वीकृत बिल राशि से मेल खाती है, मगर कई प्रविष्टियों में उल्लेखनीय विसंगतियां हैं।
प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल
दस्तावेज़ों में यह भी दर्ज है कि कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शाम 4:30 से 5:00 बजे तक ही बैसतर में रहे, जबकि टेंट और मंच जैसी व्यवस्थाएं कम से कम 300×200 मीटर के पंडाल की बताई गई हैं — जो एक बड़े आमसभा आकार के बराबर मानी जाती है।
यह सवाल उठ रहा है कि श्रद्धांजलि सभा जैसे सीमित कार्यक्रम के लिए इतना बड़ा खर्च और व्यापक व्यवस्था क्यों की गई।
इसके अलावा यह भी उल्लेख है कि PWD डिवीजन बैसतर ने यह बिल गुरुदेव टेंट हाउस एंड कैटरिंग को बिना विस्तृत विवरण या वस्तु-सत्यापन रिपोर्ट के जारी किया।
आदेश किसने दिए, यह अब तक स्पष्ट नहीं
प्रेस दस्तावेजों के अनुसार, टेंट और व्यवस्था का आदेश किस अधिकारी या मंत्री के कहने पर दिया गया, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय उस समय केवल श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने के लिए बैसतर गए थे, जबकि कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय मंत्री अरुण साव के निर्देश पर बताया जा रहा है।
दस्तावेज़ों में यह भी उल्लेख है कि “अरुण साव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जनता के पैसों से निजी कार्यक्रम कराया” — लेकिन इस पर अब तक किसी प्रशासनिक जाँच की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सूचना के अधिकार में भी नहीं मिली पारदर्शिता
प्राप्त रिपोर्ट में कहा गया है कि इस आयोजन से संबंधित बिलों और आदेश की प्रति पीडब्ल्यूडी विभाग ने सूचना के अधिकार (RTI) में भी उपलब्ध नहीं कराई, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।
राजनीतिक हलचल के संकेत
कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने कहा है कि यह “जनता के पैसों के दुरुपयोग का मामला” है और इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
वहीं, भाजपा की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सरकारी सफाई….

उप मुख्यमंत्री के निजी कार्यक्रम के भुगतान को लेकर सोशल मीडिया बनाम विभागीय फाइलों की कहानी
लोक निर्माण विभाग की सफाई में खुला पूरा ब्यौरा — बेमेतरा संभाग के ईई डी.के. चंदेल ने बताया कौन-कौन से कार्यक्रमों में हुआ असल भुगतान
छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री अरुण साव को लेकर सोशल मीडिया में प्रसारित एक दावा ने शुक्रवार को प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी।
दावा यह था कि उनके परिवार के एक निजी कार्यक्रम का खर्च लोक निर्माण विभाग (PWD) ने उठाया। इस सूचना को “आरटीआई खुलासा” बताकर कई प्लेटफॉर्मों पर शेयर किया गया।
हालांकि विभाग की ओर से जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा गया कि ऐसे किसी भी निजी कार्यक्रम का भुगतान विभाग द्वारा नहीं किया गया और वायरल की गई जानकारी भ्रामक है।
लोक निर्माण विभाग के बेमेतरा संभाग के कार्यपालन अभियंता डी.के. चंदेल ने विस्तृत दस्तावेज़ और आंकड़ों के साथ बताया कि विभाग ने बीते दो वर्षों में केवल शासकीय आयोजनों — मुख्यमंत्री, मंत्री या विभागीय कार्यक्रमों — में टेंट, लाइट और पंडाल से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भुगतान किया है।
सोशल मीडिया में उभरा विवाद
बेमेतरा निवासी अब्दुल वाहिद रवानी द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम 2005 के तहत लोक निर्माण विभाग से वीआईपी कार्यक्रमों में हुए भुगतान की जानकारी मांगी गई थी।
28 अगस्त 2025 को विभाग द्वारा दी गई इस जानकारी के बाद कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स ने दावा किया कि विभाग ने 9 अगस्त 2024 को आयोजित एक पारिवारिक कार्यक्रम में टेंट और सजावट के नाम पर 3.97 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
वायरल पोस्ट में “गुरूनानक टेंट हाउस”, “गुरुदेव टेंट हाउस” और “खालसा टेंट केटरर्स” जैसे ठेकेदारों के नाम भी दर्ज थे।
इन्हीं दस्तावेज़ों को “उप मुख्यमंत्री के निजी कार्यक्रम का बिल” बताकर प्रसारित किया गया।
विभाग की प्रतिक्रिया और आधिकारिक ब्यौरा
लोक निर्माण विभाग की तरफ से कहा गया कि आरटीआई के तहत दी गई जानकारी में सोशल मीडिया में दिखाए गए किसी भी बिल या भुगतान का उल्लेख नहीं है।
कार्यपालन अभियंता डी.के. चंदेल ने बताया कि विभाग की सभी भुगतान प्रविष्टियां सरकारी आयोजनों से जुड़ी हैं और जिन बिलों का हवाला सोशल मीडिया में दिया जा रहा है, वे विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं।
चंदेल के मुताबिक, बेमेतरा संभाग के रिकॉर्ड में जिन कार्यक्रमों के लिए भुगतान हुआ, वे इस प्रकार हैं —
19–21 दिसम्बर 2024, नवागढ़ — मुख्यमंत्री कार्यक्रम: ₹1,76,30,694
25 जनवरी 2024, जूनी सरोवर — मुख्यमंत्री कार्यक्रम: ₹71,16,646
4 जुलाई 2024, अंधियारखोर — मंत्री कार्यक्रम: ₹17,99,088
24 फरवरी 2024, बेमेतरा मंडी परिसर — विकसित भारत कार्यक्रम: ₹11,88,084
14 जनवरी 2025, संबलपुर — मंत्री कार्यक्रम: ₹10,11,450
तिरंगा यात्रा, लोकार्पण, जनजाति गौरव दिवस सहित 6 कार्यक्रम (2024–25): ₹33,29,310
24 फरवरी 2024, नवागढ़ — विकसित भारत कार्यक्रम: ₹14,13,957
28 जून 2024, बेमेतरा न्यायालयीन परिसर उद्घाटन: ₹14,24,071
14 जनवरी 2025, ग्राम दाढ़ी — मंत्री कार्यक्रम: ₹3,67,552
26 जनवरी 2025, बेसिक ग्राउंड — गणतंत्र दिवस समारोह: ₹14,21,302
5 नवम्बर 2024, बेसिक स्कूल ग्राउंड — राज्योत्सव समारोह: ₹13,39,689
15 अगस्त 2024, बेसिक स्कूल ग्राउंड — स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम: ₹16,77,024
इन सभी भुगतानों का विभागीय रिकार्ड, माप पुस्तिका, फोटो–वीडियो साक्ष्य और भुगतान आदेश फाइलों में सुरक्षित बताया गया है।
वायरल राशि बनाम वास्तविक भुगतान
वायरल हुई पोस्टों में जिन राशियों का दावा किया गया, वे विभागीय भुगतान से कई गुना अधिक बताई गईं।
विभागीय अभिलेख के अनुसार कुल भुगतान ₹3.97 करोड़ के आसपास रहा, जबकि सोशल मीडिया पोस्टों में ₹17 करोड़ से अधिक की कथित रकम बताई गई।
वायरल बिलों में प्रयुक्त ठेकेदार नाम, बिल क्रमांक और तारीखें PWD रिकॉर्ड से मेल नहीं खातीं।
विभाग के दस्तावेज़ों में 9 अगस्त 2024 के किसी भी कार्यक्रम या भुगतान का उल्लेख नहीं है।
पूर्व और वर्तमान अधिकारियों का अभिलेखीय ब्यौरा
बेमेतरा संभाग के पूर्व कार्यपालन अभियंता निर्मल सिंह ठाकुर के कार्यकाल में उपरोक्त सभी 12 सरकारी कार्यक्रमों के भुगतान आदेश पारित हुए थे।
वर्तमान कार्यपालन अभियंता डी.के. चंदेल ने वही भुगतान नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर निष्पादित किए।
सभी भुगतान शासकीय प्रयोजनार्थ दर्ज हैं और प्रत्येक के साथ उप अभियंता तथा अनुविभागीय अधिकारी द्वारा तैयार माप-पुस्तिकाएं संलग्न हैं।
विभाग का आधिकारिक बयान
लोक निर्माण विभाग की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया कि
“उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के किसी भी निजी कार्यक्रम का भुगतान विभाग द्वारा नहीं किया गया है। सोशल मीडिया में प्रसारित सूचना तथ्यहीन है।”
विभाग ने यह भी बताया कि शासकीय प्रयोजनों से इतर किसी आयोजन के लिए कोई वित्तीय प्रविष्टि नहीं की गई।
विस्तृत दस्तावेज़ और तथ्य
विभागीय कार्यालय के अनुसार सभी संबंधित कार्यक्रमों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, भुगतान आदेश, तथा ठेकेदारों के बिल-वाउचर अभिलेख में सुरक्षित हैं।
सूचना के अधिकार के तहत दी गई रिपोर्ट भी इन्हीं सरकारी आयोजनों से जुड़ी है।
विभागीय फाइलों में “गुरूनानक टेंट हाउस” और “खालसा टेंट केटरिंग” जैसे ठेकेदारों के नाम केवल मुख्यमंत्री और मंत्री कार्यक्रमों में दर्ज हैं, किसी निजी आयोजन में नहीं।
अभिलेखों में दर्ज कुल भुगतान
विभागीय दस्तावेज़ बताते हैं कि बेमेतरा संभाग में 2024–25 के दौरान विभिन्न सरकारी आयोजनों पर कुल मिलाकर लगभग ₹3.97 करोड़ का भुगतान किया गया।
इनमें प्रमुख रूप से मुख्यमंत्री, मंत्री, विकसित भारत, जनजाति गौरव दिवस, राज्योत्सव और गणतंत्र दिवस जैसे आयोजन शामिल रहे।
सोशल मीडिया में जिस तरह इन आंकड़ों को मिलाकर “निजी भुगतान” का दावा उभरा, उसी पर विभाग की यह आधिकारिक सफाई आई है।
आरटीआई अभिलेख और विभागीय रिपोर्ट, दोनों में दर्ज आंकड़ों के आधार पर यह स्पष्ट किया गया कि विभाग द्वारा अब तक जो भुगतान हुए हैं, वे सिर्फ और सिर्फ शासकीय प्रयोजन से संबंधित हैं।



