✍️ मोहम्मद इसराइल बबलू | बिलासपुर
बिलासपुर की नगर राजनीति इन दिनों दो बिल्कुल विपरीत चेहरों के साथ सामने आई है —
एक तरफ सत्ता के शिखर पर बैठी मेयर पूजा विधानी के लिए सिविल लाइन में नया आलीशान बंगला तैयार किया जा रहा है,
जहां तकरीबन लाखों रुपए खर्च कर लोक निर्माण विभाग ने उसकी साज-सज्जा में कोई कसर नहीं छोड़ी।
वहीं दूसरी तरफ उसी नगर निगम ने लिंगियाडीह के 113 गरीब परिवारों के सिर से छत छीनने का आदेश जारी कर दिया है।
नगर प्रशासन की प्राथमिकताएं सवालों के घेरे में हैं —
कहीं सुविधा का विस्तार है, तो कहीं संवेदना का संकुचन।
मेयर का नया सरकारी बंगला — आलीशान खर्च, वीआईपी पड़ोसी

सिविल लाइन क्षेत्र में आईजी दफ्तर के नजदीक मेयर पूजा विधानी का नया सरकारी आवास अब पूरी तरह से तैयार हो चुका है।
लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस बंगले के नवीनीकरण, फर्निशिंग, और सुरक्षा तंत्र पर लाखों रुपए खर्च किए हैं।
यह वही इलाका है जहां तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह का बंगला भी स्थित है — यानी अब मेयर और विधायक पड़ोसी होंगे।
पर सवाल यह उठ रहा है कि नगर निगम के अन्य निर्वाचित पदाधिकारी — सभापति और नेता प्रतिपक्ष — को यह सुविधा क्यों नहीं दी जाती?
दोनों पद नगर निगम के संवैधानिक ढांचे में अहम भूमिका निभाते हैं, मगर न उन्हें आवास मिलता है, न कोई सरकारी संसाधन।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया —
“नगर निगम अधिनियम में सभापति और नेता प्रतिपक्ष के लिए सरकारी आवास या सुविधा का कोई प्रावधान नहीं है।”
लेकिन सवाल यह है —
जब बंगले की सजावट पर लाखों खर्च किए जा सकते हैं, तो जनसेवकों के लिए समान सुविधाएं क्यों नहीं?
जनप्रतिनिधियों के बीच यह असमानता अब ‘सुविधा बनाम अधिकार’ की बहस को जन्म दे रही है।
लिंगियाडीह में उजड़ने वाले 113 घर — निगम गार्डन बनाएगा, गरीब बेघर होंगे
उधर नगर निगम प्रशासन ने लिंगियाडीह क्षेत्र के 113 गरीब परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी कर ली है।
निगम का तर्क है कि यह निगम की भूमि पर अतिक्रमण है और यहां नया निगम परिसर व गार्डन बनाया जाएगा।
लेकिन स्थानीय परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से वहीं बसे हैं,
उनके पास राशन कार्ड, बिजली कनेक्शन और कर भुगतान के दस्तावेज भी हैं।
इस फैसले के विरोध में कांग्रेस नेताओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया था।
विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने कहा —
“जब मेयर के बंगले के लिए लाखों खर्च किए जा सकते हैं, तो इन गरीब परिवारों के पुनर्वास के लिए क्यों नहीं?”
“एक तरफ सत्ता के लिए सजावट, दूसरी तरफ समाज के लिए उजाड़ — यही है नगर प्रशासन का असली चेहरा।”
नगर प्रशासन के लिए अगली परीक्षा — विकास या विवेक?
नगर निगम बिलासपुर की ये दो तस्वीरें —
एक ओर मेयर के बंगले की चमक, दूसरी ओर लिंगियाडीह की धूल —
आज पूरे शहर में चर्चा का विषय हैं।
सवाल सिर्फ इतना है कि
क्या विकास का अर्थ केवल सत्ता की सुविधाओं तक सीमित रह गया है,
या उसमें गरीबों की संवेदना और समान प्रतिनिधित्व की भावना भी जगह पाएगी?





