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बिना ‘साइको टेस्ट’ पास किए चला दी गई पैसेंजर ट्रेन — बिलासपुर हादसे ने रेलवे सुरक्षा की पोल खोली, 11 जिंदगियां 25 सेकंड में खत्म

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर रेल हादसे में लापरवाही का बड़ा खुलासा — मृत चालक ने पास नहीं की थी ‘साइको परीक्षा’, फिर भी मिला पैसेंजर ट्रेन चलाने का जिम्मा

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल मंडल में हुए गेवरारोड रेल हादसे ने भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और मानव संसाधन प्रबंधन की पूरी प्रणाली पर गहरी चोट पहुंचाई है। जांच में खुलासा हुआ है कि मृत लोकल ट्रेन चालक विद्यासागर ने कभी ‘साइकोलॉजिकल टेस्ट’ पास ही नहीं किया था, जो यात्रियों से भरी किसी भी ट्रेन को चलाने से पहले अनिवार्य होता है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने उन्हें पैसेंजर ट्रेन का जिम्मा सौंप दिया।
4 नवंबर को केवल 25 सेकंड में हुई टक्कर ने 11 यात्रियों की जान ले ली और 20 से अधिक घायल कर दिए। अब सवाल उठ रहा है — क्या रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को ‘कागजी प्रमाणपत्रों’ के भरोसे छोड़ चुका है?


✍️ मोहम्मद इसराइल बबलू |बिलासपुर ।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल मंडल के गेवरारोड स्टेशन पर हुए भीषण रेल हादसे ने पूरे देश में रेल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि मृत लोकल ट्रेन चालक विद्यासागर ने रेलवे की अनिवार्य ‘साइको परीक्षा’ (Psychological Test) पास ही नहीं की थी, फिर भी उन्हें यात्रियों से भरी मेमू लोकल ट्रेन चलाने की अनुमति दी गई थी। यह परीक्षा रेलवे में मानसिक स्थिरता, त्वरित निर्णय और आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए अनिवार्य होती है।
रेल प्रशासन की यह चूक अब रेल सुरक्षा के तंत्र पर सीधा सवाल बनकर उभरी है —
“क्या यात्रियों की सुरक्षा अब बिना टेस्ट पास किए हुए चालकों के हाथ में सौंप दी जा रही है?”
25 सेकंड में खत्म हो गई 11 जिंदगियां
4 नवंबर की दोपहर गेवरारोड और लालखदान स्टेशन के बीच मेमू लोकल ट्रेन और कोयला लदी मालगाड़ी की भिड़ंत में 11 यात्रियों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग घायल हुए।
मेमू ट्रेन का इंजन और महिला कोच मालगाड़ी के वैगनों पर चढ़ गया।
रेलवे की रेस्क्यू टीम को मृतकों के शव निकालने में 11 घंटे लग गए।
जांच में सामने आया हैरान करने वाला तथ्य
रेल सेफ्टी कमिश्नर (सीआरएस) बी.के. मिश्रा की जांच में खुलासा हुआ कि —
मृत चालक विद्यासागर पहले मालगाड़ी चालक थे,
एक माह पूर्व ही उन्हें पैसेंजर ट्रेन परिचालन का प्रमोशन दिया गया,
लेकिन उन्होंने साइको टेस्ट पास नहीं किया था,
इसके बावजूद उन्हें यात्रियों से भरी ट्रेन चलाने दी गई।
रेलवे नियमों के अनुसार,
“किसी भी चालक को मालगाड़ी से पैसेंजर ट्रेन में पदोन्नत करने से पहले साइकोलॉजिकल परीक्षा पास करना अनिवार्य है।”
फिर भी रेल अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रख दिया। यह जानकारी अधिकारियों के पास थी, पर कार्रवाई नहीं की गई।
जांच की दिशा — रेल प्रशासन से लेकर विभागीय गलियारों तक मचा हड़कंप
इस खुलासे के बाद रेल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
सीआरएस मिश्रा ने गुरुवार को डीआरएम कार्यालय में 12 घंटे तक पूछताछ की।
पहले दिन 27 में से सिर्फ 7 अधिकारियों-कर्मचारियों से पूछताछ हो सकी।
जांच सुबह 9 बजे शुरू होकर रात 10 बजे तक चली।
मेडिकल और रिलीफ टीम के सदस्यों से लेकर एरिया बोर्ड के अधिकारियों तक सभी से सवाल किए गए।
अधिकारियों से पूछा गया — क्या ट्रैक पर कोई तकनीकी छेड़छाड़ या सिग्नल फेलियर हुआ था?
प्रारंभिक जांच में किसी तकनीकी खराबी का सबूत नहीं मिला, जिससे अब पूरा फोकस मानव त्रुटि और प्रशासनिक लापरवाही पर केंद्रित है।
घायल असिस्टेंट ड्राइवर और गार्ड के बयान अहम
दुर्घटना में घायल असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज और मालगाड़ी के गार्ड शैलेश चंद्र यादव अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं।
दोनों के बयान सीआरएस जांच के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, रश्मि राज को भी पैसेंजर ट्रेन संचालन का अनुभव नहीं था।
ट्रेन कैमरे और ब्लैक बॉक्स (डीबीआर) जब्त
रेल सेफ्टी टीम ने हादसे के दूसरे दिन मेमू ट्रेन के कैमरा, वॉयस रिकॉर्डिंग सिस्टम, स्पीडोमीटर और स्टेशन डायरी जब्त की।
इन सभी डिवाइसों की सीलिंग कर दी गई है।
अब इन्हीं रिकॉर्डिंग्स से पता चलेगा कि —
क्या ट्रेन रेड सिग्नल पार कर रही थी?
चालक ने टक्कर से पहले इमरजेंसी ब्रेक कब लगाया?
और क्या नियंत्रण कक्ष ने सिग्नल या ट्रैक की स्थिति समय पर बताई थी या नहीं।
रेल प्रशासन का बचाव — “सहायक चालक साथ था”
रेल प्रशासन ने कहा है कि विद्यासागर का साइको टेस्ट पास न करने की जानकारी थी,
“इसलिए उनके साथ एक असिस्टेंट लोको पायलट को लगाया गया था।”
लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है —
“यह तर्क प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं घटाता।
जब तक चालक साइको टेस्ट पास नहीं करता, उसे पैसेंजर ट्रेन पर ड्यूटी देना सीधा नियम उल्लंघन है।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया — ‘रेलवे लीपा-पोती की कोशिश न करे’
कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने बयान जारी कर कहा —
“24 घंटे में चालक को दोषी ठहराना अमानवीय है।
जांच तकनीकी और निष्पक्ष होनी चाहिए।
यदि प्रशासन ने बिना साइको टेस्ट के ड्यूटी लगाई, तो यह पूरी व्यवस्था की नाकामी है।”
उन्होंने यह भी कहा कि मृत चालक के परिवार को मुआवजा और सम्मान मिलना चाहिए,
“ना कि उसे हादसे का दोषी ठहराकर जिम्मेदारी से बचा जाए।”
Fact
बिंदुजानकारीहादसागेवरा-रोड से बिलासपुर के बीच मेमू लोकल-कोयला मालगाड़ी टक्करतारीख4 नवंबर 2025मृतक11 यात्री (जिसमें लोको पायलट विद्यासागर शामिल)घायल20 से अधिकमुख्य कारण (प्रारंभिक जांच)रेड सिग्नल पार करने और प्रशासनिक लापरवाहीसाइको टेस्ट स्थितिमृत चालक विद्यासागर परीक्षा में फेलअसिस्टेंट ड्राइवररश्मि राज (अनुभवहीन, घायल)जांच अधिकारीरेल सुरक्षा आयुक्त बी.के. मिश्राजांच स्थिति27 अधिकारियों की पूछताछ जारी
कहां हुई चूक?
बिना साइको टेस्ट पास किए चालक को ट्रेन संचालन की जिम्मेदारी देना
ट्रैक पर सिग्नल और कम्युनिकेशन की निगरानी में कमजोरी
रिलीफ और मेडिकल टीम का मौके पर देर से पहुंचना
हादसे के बाद शव निकालने में 11 घंटे की देरी
देशभर में रेलवे सुरक्षा पर उठे सवाल
यह हादसा केवल छत्तीसगढ़ नहीं, बल्कि पूरे भारतीय रेलवे सिस्टम की सुरक्षा और जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करता है।
क्योंकि यदि एक चालक बिना मनोवैज्ञानिक योग्यता प्रमाणपत्र के पैसेंजर ट्रेन चला सकता है, तो यह लाखों यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
रेल सेफ्टी कमिश्नर की जांच जारी है — और रिपोर्ट आने के बाद कई वरिष्ठ अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

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