मोहम्मद इसराइल बबलू | बिलासपुर
बिलासपुर के लिंगियाडीह दुर्गानगर में नगर निगम द्वारा 115 मकानों को तोड़ने की तैयारी के खिलाफ गुरुवार को बड़ा विरोध देखने को मिला। स्थानीय निवासियों ने मौन रैली निकालकर कलेक्टोरेट पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। रैली में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया, दिलीप पाटिल लक्ष्मी नाथ साहू सहित कई कांग्रेस नेता भी शामिल हुए। विधायकों ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार एक ओर “18 लाख आवास देने” का दावा करती है, जबकि दूसरी ओर गरीबों के सिर से छत छीनने का काम कर रही है।



कांग्रेस भवन से निकली यह मौन रैली कलेक्टोरेट पहुंचकर समाप्त हुई, जहां प्रतिनिधि मंडल ने कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात की और मकान तोड़ने की कार्रवाई पर रोक लगाने, मामले की जांच कराने तथा निर्दोष परिवारों को राहत देने की मांग की।
रैली में महापौर प्रत्याशी प्रमोद नायक, कांग्रेस नेता भरत कश्यप, महेश दुबे, और अभय नारायण राय भी मौजूद रहे।
विधायक अटल श्रीवास्तव ने कहा कि दुर्गानगर के लोग पिछले 40 वर्षों से यहां निवास कर रहे हैं।
1982 में तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार (स्व. अर्जुन सिंह के कार्यकाल में) लोगों को पट्टा दिया गया था, और 2019 में नगर निगम ने 10 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से प्रीमियम वसूला था।
इसके बावजूद अब मकान तोड़ने का नोटिस देना, कांग्रेस विधायकों के मुताबिक, “भाजपा की जनविरोधी नीति और आवास के नाम पर धोखा” है। उन्होंने कहा कि निगम द्वारा पार्क और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाने का हवाला देकर स्थायी निवासियों को विस्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बीते चार महीने से निगम अधिकारी विभिन्न योजनाओं और सर्वे के नाम पर धमकी दे रहे हैं, जिससे इलाके में गहरी नाराजगी है।
कलेक्टर ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन दिया कि किसी भी कार्रवाई से पहले संपूर्ण जांच की जाएगी और कानूनी प्रक्रिया का पालन होगा।
लिंगियाडीह विवाद
1982 में अर्जुन सिंह सरकार ने निवासियों को पट्टा दिया था।
2019 में निगम ने प्रीमियम राशि वसूल की, पात्रता सूची भी बनी।
अब 115 मकानों को तोड़ने की तैयारी से विवाद गहराया।
निगम ने पार्क और कॉम्प्लेक्स निर्माण का हवाला दिया।
कांग्रेस ने इसे “भाजपा का असली चेहरा” बताया।



