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छत्तीसगढ़ की 40 हजार महिलाओं से 120 करोड़ की ठगी! फ्लोरामैक्स स्कैम पर देशभर में हड़कंप — राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने राज्य सरकार से कहा, “30 दिन में बताओ सच्चाई, अब जांच होगी केंद्रीय एजेंसी से”

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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✍️ मोहम्मद इसराइल बबलू, बिलासपुर | कोरबा/नई दिल्ली
छत्तीसगढ़ के कोरबा से उठी एक स्थानीय ठगी की गूंज अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है। फ्लोरामैक्स नाम की एक निजी कंपनी ने 40 हजार से अधिक ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं से लगभग 120 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी कर दी — निवेश और लोन के झांसे में हजारों महिलाएं अपनी जमा पूंजी गंवा बैठीं। अब इस मामले ने राष्ट्रीय स्वरूप ले लिया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने राज्य सरकार को केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने, दोषियों की संपत्ति जब्त करने और पीड़ित महिलाओं का पैसा लौटाने का सख्त निर्देश दिया है।
🔹 “यह सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, आदिवासी महिलाओं के विश्वास से खिलवाड़ है” — आयोग
आयोग ने इस मामले को जनजातीय समाज की महिलाओं के आर्थिक शोषण का गंभीर अपराध बताते हुए छत्तीसगढ़ शासन को नोटिस जारी किया है।
आयोग ने साफ कहा है —
“एफआईआर में एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं जोड़ी जाएं। दोषियों की संपत्तियां जब्त की जाएं। और 30 दिनों में कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाए।”
🔹 कैसे शुरू हुआ फ्लोरामैक्स घोटाला?


पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने 9 दिसंबर 2024 को आयोग के समक्ष यह मामला रखा। उन्होंने बताया कि फ्लोरामैक्स कंपनी के एजेंटों ने गांव-गांव जाकर महिलाओं को लोन दिलाने और निवेश पर दोगुना रिटर्न देने का झांसा दिया।
हर महिला से औसतन 30-30 हजार रुपये की वसूली की गई।
कुल राशि — करीब 120 करोड़ रुपये।
कंवर ने इसे “आर्थिक ठगी से बड़ा सामाजिक अपराध” बताते हुए सीबीआई या ईडी से जांच की मांग की थी।
🔹 गिरफ्तारी तो हुई, लेकिन अब तक न्याय अधूरा
16 अक्टूबर 2025 को हुई आयोगीय सुनवाई में बिलासपुर संभाग आयुक्त सुनील कुमार जैन उपस्थित हुए। उन्होंने आयोग को बताया —
कंपनी से जुड़े 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।
इनमें से 10 को जमानत मिल चुकी है।
पुलिस अब आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों की खोज और जब्ती में जुटी है।
कुछ संपत्तियों को ट्रैक कर बरामद भी किया गया है।
लेकिन आयोग संतुष्ट नहीं हुआ। उसने कहा —
“राज्य प्रशासन की कार्रवाई सुस्त है। यह गंभीर आर्थिक शोषण का मामला है, जिसकी निगरानी उच्च स्तर पर की जानी चाहिए।”
🔹 5 जिलों में फैला ठगी नेटवर्क
फ्लोरामैक्स का नेटवर्क कोरबा, जशपुर, सरगुजा, बिलासपुर और रायगढ़ जिलों में सक्रिय था।
कंपनी के एजेंटों ने
महिलाओं को झूठे दस्तावेजों पर साइन करवाए,
रिटर्न स्कीम के नाम पर फर्जी खातों में पैसे डलवाए,
यहां तक कि कई महिलाओं ने गहने और जमीन गिरवी रख पैसे निवेश किए।
एक पीड़ित महिला ने बताया —
“हमसे कहा गया था छह महीने में पैसा दोगुना मिलेगा। अब दो साल हो गए, कंपनी बंद हो गई, दफ्तर खाली है।”
🔹 आयोग का सख्त निर्देश
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया —
राज्य सरकार 30 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करे।
जांच में केंद्रीय एजेंसी (CBI/ED) को शामिल किया जाए।
एफआईआर में एससी-एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ी जाएं।
सभी दोषियों की संपत्ति जब्त कर पीड़ित महिलाओं को मुआवजा दिया जाए।
🔹 राज्य सरकार पर बढ़ा दबाव
यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव का केंद्र बन गया है।
राज्य सरकार के लिए यह भरोसे और शासन की परीक्षा बन चुका है।
क्योंकि हजारों महिलाएं अपनी जमा पूंजी की वापसी की उम्मीद में हर दिन सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगा रही हैं।
राज्य के राजनीतिक गलियारों में यह सवाल गूंज रहा है —
“क्या सरकार 40 हजार महिलाओं की लूटी गई मेहनत का पैसा दिला पाएगी, या फिर यह भी एक और भूला हुआ घोटाला बन जाएगा?”
📊 फैक्ट बॉक्स : फ्लोरामैक्स घोटाले की पूरी तस्वीर
बिंदुजानकारीघोटाले का नामफ्लोरामैक्स स्कीम फ्रॉडकुल ठगी राशि₹120 करोड़ (अनुमानित)पीड़ित महिलाएं40,000 (मुख्यतः आदिवासी व ग्रामीण)शिकायतकर्ताननकीराम कंवर (पूर्व गृहमंत्री)मुख्य आरोपीअखिलेश सिंह एवं अन्य 12गिरफ्तार आरोपी13 (10 को जमानत मिल चुकी)आयोगराष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी)निर्देश30 दिन में रिपोर्ट, केंद्रीय एजेंसी जांच
🔹 “यह आदिवासी समाज के विश्वास पर वार है”
आयोग ने कहा —
“यह सिर्फ ठगी नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के आर्थिक विश्वास पर हमला है। जिन महिलाओं ने आत्म-सहायता समूहों से पैसे जुटाकर कंपनी में लगाया, उन्हें न्याय मिलना चाहिए।”
🔹 अब देशभर की निगाहें इस जांच पर
यह मामला अब केवल छत्तीसगढ़ का नहीं रहा। यह एक ऐसा उदाहरण बन चुका है, जो बताता है कि कैसे ग्रामीण और आदिवासी समाज को वित्तीय ठग कंपनियां निशाना बना रही हैं
आयोग की सख्ती के बाद अब सवाल यही है —
क्या राज्य प्रशासन इन महिलाओं की लूटी कमाई वापस दिला पाएगा,
या यह मामला भी लाल फाइलों में दबा एक और घोटाला बन जाएगा?

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