बिलासपुर | मोहम्मद इसराइल बबलू
“जीत प्रतियोगिता की गुणवत्ता में है, अंतिम स्कोर में नहीं” — इस सोच के साथ फाउंडेशन क्रिकेट अकादमी के अध्यक्ष श्री प्रिंस भाटिया ने न केवल एक अकादमी की नींव रखी, बल्कि बच्चों में खेल के जरिए अनुशासन, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी के बीज बोए हैं।
अकादमी की यह पहल आज बिलासपुर के साथ-साथ पूरे प्रदेश में खेल संस्कृति के नए अध्याय के रूप में जानी जा रही है।
हर वर्ष यहां से निकलने वाले दर्जनों प्रतिभाशाली खिलाड़ी अब राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर शहर का नाम रोशन कर रहे हैं।
खेल की नर्सरी से खिलते भविष्य के फूल
फाउंडेशन क्रिकेट अकादमी को एक ऐसी खेल नर्सरी कहा जा सकता है, जहां हर बच्चे को सधे

कदमों से अपने सपनों को आकार देने का अवसर मिलता है।
यहां का मैदान सिर्फ अभ्यास का स्थान नहीं, बल्कि अनुशासन, शालीनता और सृजनशीलता का प्रशिक्षण केंद्र है।
अकादमी का व्यवस्थित, सुरक्षित और सुसज्जित माहौल ही इसकी पहचान बन चुका है — हर अभिभावक अपने बच्चे को इस मैदान में भेजने को उत्सुक रहता है।
एक महीने चली मिनी क्रिकेट प्रतियोगिता का समापन — उभरे कई नन्हे सितारे
पिछले एक माह तक चली छोटी उम्र के खिलाड़ियों की क्रिकेट प्रतियोगिता ने शहर में खेल के प्रति नई ऊर्जा भर दी।
प्रतियोगिता के दौरान कई प्रतिभावान बाल खिलाड़ियों का चयन किया गया, जिन्हें आगामी प्रशिक्षण सत्र में विशेष अवसर दिया जाएगा।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर उत्साहवर्धन हेतु पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें
श्री प्रिंस भाटिया,
महेश दुबे,
मनीष अग्रवाल,
त्रिभुवन सिंह, और
आशुतोष शर्मा
विशेष रूप से उपस्थित रहे।
बच्चों के परिजनों की बड़ी संख्या ने भी इस कार्यक्रम में भाग लेकर बच्चों का हौसला बढ़ाया।
अकादमी का उद्देश्य — खेल से जीवन के मूल्यों की सीख
फाउंडेशन क्रिकेट अकादमी का मानना है कि खेल सिर्फ शारीरिक दक्षता नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन का माध्यम भी है।
यहां बच्चों को सिखाया जाता है कि
“खेल में हारना असफलता नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।”
बच्चों में निर्णय क्षमता, समस्या समाधान और टीम भावना को विकसित करना इस अकादमी की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
बिलासपुर से भारत तक — फाउंडेशन की उड़ान
फाउंडेशन क्रिकेट अकादमी ने कम समय में जिस समर्पण और अनुशासन की मिसाल पेश की है, वह खेल जगत में बिलासपुर की पहचान को नई ऊंचाई दे रही है।
यह पहल बताती है कि यदि सोच सकारात्मक हो और लक्ष्य स्पष्ट, तो खेल मैदान से भी देश का भविष्य गढ़ा जा सकता है।



