बिलासपुर , रायपुर,जशपुरनगर | मोहम्मद इसराइल बबलू
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीती रात कुनकुरी वनपरिक्षेत्र के गड़ाकटा गांव में एक और ग्रामीण की जान हाथी ने ले ली। चार दिनों के भीतर जिले में यह दूसरी मौत है, जिससे गांवों में भय और आक्रोश दोनों गहराते जा रहे हैं।


जानकारी के अनुसार, बुधवार रात करीब साढ़े आठ बजे गांव निवासी जूनास बड़ा (65 वर्ष) अपने खेत की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उनका सामना दल से भटके एक हाथी से हो गया। ग्रामीण कुछ समझ पाते, इससे पहले हाथी ने उन पर हमला कर दिया। उसने सूंड में लपेटकर जमीन पर पटक दिया और पैरों से कुचल दिया। वृद्ध की मौके पर ही मौत हो गई।
सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पंचनामा, पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया।
तात्कालिक राहत के रूप में 25 हजार रुपये की सहायता राशि पीड़ित परिवार को दी गई है। विभाग ने कहा कि पूर्ण मुआवजा राशि के लिए प्रकरण तैयार किया जा रहा है।
इससे पहले 3 नवंबर को कुनकुरी वन रेंज के डोडापानी गांव में हाथी के हमले में ग्रामीण समय साय की मौत हो गई थी। वह जंगल से मवेशी लेकर लौट रहे थे, तभी रोड क्रॉस करते हाथी ने उन्हें पटककर कुचल डाला था।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हाल के दिनों में कुनकुरी, गड़ाकटा और डोडापानी क्षेत्र में 12 से अधिक हाथियों का झुंड सक्रिय है, जिनमें से एक-दो हाथी झुंड से अलग होकर आक्रामक व्यवहार कर रहे हैं।
ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग पर लापरवाही के आरोप
लगातार हो रही घटनाओं के बाद गांवों में दहशत फैल गई है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग ने पहले से चेतावनी देने या सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने जैसे कदम नहीं उठाए। रात के समय खेतों और सड़कों पर आवाजाही करना खतरनाक हो गया है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित इलाकों में रात्री गश्त बढ़ाई जाए, हाथियों की लोकेशन ट्रैकिंग की जाए और आबादी से उन्हें दूर भगाने के लिए विशेष दल तैनात किया जाए।
“चार दिन में दो ग्रामीणों की जान चली गई, यह जंगल विभाग की बड़ी नाकामी है। गांवों में डर का माहौल है।”
— स्थानीय जनप्रतिनिधि, कुनकुरी क्षेत्र
जशपुर में हाथियों के हमले के आंकड़े
वर्षहाथियों के हमलों से मौतेंप्रभावित गांवमुख्य क्षेत्र202211 मौतें27 गांवकुनकुरी, तपकरा, फरसाबहार20238 मौतें19 गांवपत्थलगांव, मनोरा, कांसाबेल20249 मौतें24 गांवकुनकुरी, डोडापानी, सोनाजोर2025 (अब तक)6 मौतें12 गांवगड़ाकटा, कुनकुरी, तपकरा
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हाथियों के लगातार गांवों की ओर बढ़ने के पीछे मुख्य कारण है —
1️⃣ जंगलों में जलस्त्रोत और भोजन की कमी,
2️⃣ खेतों में धान की फसल की गंध से हाथियों का आकर्षित होना,
3️⃣ हाथी कॉरिडोर पर अवैध खनन और सड़क निर्माण।
“हाथियों का व्यवहार मानव गतिविधियों के कारण बदल रहा है। अब वे स्थायी रूप से ग्रामीण इलाकों में रहना पसंद कर रहे हैं।”
— डॉ. एस.आर. पांडे, वन्यजीव विशेषज्ञ



