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सिम्स बिलासपुर में Electro Convulsive Therapy पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ रजत जयंती समारोह एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के निर्देशानुसार मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत आज दिनांक 04 नवम्बर 2025 को सिम्स सभागार, बिलासपुर में ईसीटी (Electro Convulsive Therapy) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे डॉ. रमणेश मूर्ति, अधिष्ठाता, सिम्स महाविद्यालय, तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे डॉ. लखन सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, सिम्स बिलासपुर, एवं डॉ. सुजित नायक, विभागाध्यक्ष, मनोरोग विभाग, सिम्स बिलासपुर।

कार्यशाला में श्रीमती ममता शर्मा, डेमॉन्स्ट्रेटर, शासकीय नर्सिंग कॉलेज बिलासपुर तथा डॉ. राकेश कुमार जांगड़े, सहायक प्राध्यापक, मनोरोग विभाग, ने छात्राओं को ईसीटी की प्रक्रिया एवं इसके वैज्ञानिक पक्षों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

कार्यक्रम में शासकीय नर्सिंग कॉलेज एवं संदीपनी कॉलेज की छात्राओं ने भाग लिया।


अतिथियों के विचार

अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने बताया कि मानसिक रोगों के प्रति समाज की धारणा बदलने के लिए चिकित्सकों, नर्सों और विद्यार्थियों को मिलकर जागरूकता फैलानी होगी। डॉ. मूर्ति ने कहा कि ईसीटी जैसी आधुनिक चिकित्सा विधियाँ गंभीर मानसिक रोगों के उपचार में अत्यंत प्रभावी हैं, और सिम्स बिलासपुर इस दिशा में लगातार अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि अस्पतालों में मानसिक रोगियों के लिए उपचार सुविधाओं का विस्तार और जनजागरूकता दोनों समान रूप से आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मानवता और संवेदना मानसिक स्वास्थ्य सेवा की सबसे बड़ी नींव हैं। उन्होंने इस तरह की कार्यशालाओं को व्यवहारिक प्रशिक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

विभागाध्यक्ष डॉ. सुजित नायक ने कहा कि ईसीटी एक वैज्ञानिक और सुरक्षित प्रक्रिया है, जिसका उपयोग वर्षों से विश्वभर में मानसिक रोगों जैसे गहरी अवसाद (Depression), सिज़ोफ्रेनिया (Schizophrenia) आदि के उपचार में किया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को यह समझने का आग्रह किया कि यह थेरेपी भय का नहीं, बल्कि आशा और सुधार का माध्यम है।


कार्यक्रम में डॉ. गौरीशंकर सिंह, डॉ. सुधांशु भट्ट, डॉ. तुलेश्वर, डॉ. सत्य स्मिता एवं डॉ. आयुष की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यशाला का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं सामूहिक फोटो सेशन के साथ हुआ।

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