Latest news

बारनवापारा में चार हाथी कुएं में गिरे — इंसान की लापरवाही बनी जंगल का जाल

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
6 Min Read

हरदी गांव में सुबह का सन्नाटा टूटा चिंघाड़ से, संसाधनों की कमी से घंटों चला बचाव अभियान
मोहम्मद इसराइल बबलू , रायपुर ,बिलासपुर, बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य से सटे हरदी गांव की सुबह एक दर्दनाक दृश्य से शुरू हुई।
खेतों के किनारे बने एक पुराने कुएं में चार जंगली हाथी — दो नर, एक मादा और एक शावक — फंसे मिले।
सुबह-सुबह खेत की ओर जा रहे किसान ने जब हाथियों की दहाड़ जैसी चिंघाड़ सुनी, तो पूरा गांव जाग उठा।


यह दृश्य केवल एक हादसा नहीं था, बल्कि यह उस गंभीर असंतुलन की तस्वीर थी जो जंगलों की सीमाओं से बाहर फैल चुकी मानव लापरवाही की कहानी कह रही थी।
जंगल से गांव तक… और फिर कुएं में फंसी ज़िंदगी
वन विभाग के अनुसार, देर रात हाथियों का झुंड जंगल की सीमा पार कर गांव के खेतों की ओर पहुंच गया।
खेतों के पास का पुराना, बिना ढक्कन वाला कुआं पानी से भरा था — और यही बना इन चार हाथियों के लिए मौत का गड्ढा।
रात के अंधेरे में पानी पीने पहुंचे हाथी एक-एक कर उसमें फिसलते चले गए।
सुबह जब ग्रामीण पहुंचे, तो कुएं में फंसे हाथियों के गूँजते स्वर पूरे इलाके में फैल चुके थे।
हरदी के किसान ठाकुर, जिन्होंने सबसे पहले यह दृश्य देखा, ने बताया —
“पहले लगा जंगल से आवाज आ रही है, लेकिन पास जाकर देखा तो चार हाथी कुएं में थे। एक शावक बार-बार ऊपर आने की कोशिश कर रहा था, पर फिसल जाता था। हमने गांव वालों को बुलाया और तुरंत वन विभाग को सूचना दी।”
कुछ ही देर में रेंकाभाठा, चरौदा और मुड़पार गांवों से भी लोग मौके पर पहुंच गए।
गांव में अफरा-तफरी और संवेदना का अनोखा मिश्रण देखने मिला — लोग एक ओर वीडियो बना रहे थे, तो दूसरी ओर रस्सी, लकड़ी और मिट्टी डालकर हाथियों को सहारा देने की कोशिश कर रहे थे।
संसाधनों की कमी से जूझता बचाव अभियान
सूचना मिलते ही वन परिक्षेत्र अधिकारी टीम के साथ पहुंचे।
इलाके को घेराबंद किया गया ताकि आसपास मौजूद झुंड के अन्य हाथी वहां न पहुंचें।
लेकिन असली चुनौती तब सामने आई जब बचाव के लिए जरूरी संसाधनों की कमी का पता चला।
न तो पर्याप्त क्रेन और जेसीबी थीं, न ही लंबी स्टील रस्सियां और रैंप बनाने का साधन।
टीम फिलहाल लकड़ी और रस्सी के सहारे कुएं के किनारे रास्ता बनाने की कोशिश कर रही है ताकि हाथी खुद ऊपर चढ़ सकें।
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा —
“हम हर बार ऐसे मामलों में हाथ बंधे होने की स्थिति में होते हैं। हमारे पास संसाधन नहीं, पर उम्मीद बहुत बड़ी रखी जाती है।”
बारनवापारा: जहां जंगल सिकुड़ रहा और खतरे बढ़ रहे हैं
बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख इको-सेंसिटिव जोन है, जो रायपुर और बलौदाबाजार जिलों की सीमा पर फैला है।
यहां हर साल मानसून के बाद हाथियों के झुंडों का मूवमेंट बढ़ जाता है, क्योंकि जंगलों के भीतर जल स्रोत सूखने लगते हैं।
खाद्य और पानी की तलाश में हाथी अक्सर गांवों तक पहुंच जाते हैं।
यह मनुष्य और वन्यजीव के टकराव (Human-Wildlife Conflict) की बढ़ती कड़वी हकीकत है, जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान दोनों पक्षों को होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में बने खुले कुएं, तार बाड़, और अवैध खेत विस्तार अब हाथियों के लिए जानलेवा जाल बनते जा रहे हैं।
एक कुआं… सौ सवाल
यह घटना सिर्फ चार हाथियों की नहीं, बल्कि संवेदनहीन विकास की कहानी है —
जहां जल संरक्षण तो हो गया, पर सुरक्षा की सोच गायब रही।
छत्तीसगढ़ में ऐसे हजारों खुले कुएं हैं जो वन्यजीवों के लिए मौत के गड्ढे बन चुके हैं।
पर्यावरणविद् डॉ. नलिनी राव कहती हैं —
“हर कुएं के चारों ओर बाड़ लगाना या कवर डालना सरकार की जिम्मेदारी है।
एक हाथी को बचाने के लिए करोड़ों का ऑपरेशन करना पड़ता है, जबकि एक ढक्कन लगाना मात्र कुछ हजार का खर्च है।”
प्रकृति का पलटवार या इंसान की भूल?
बारनवापारा की यह घटना उस बड़े सवाल की ओर इशारा करती है —
क्या हम विकास के नाम पर प्रकृति से इतना दूर चले गए हैं कि अब हर कुएं में सभ्यता का प्रतिबिंब और जंगल की त्रासदी दोनों साथ नजर आते हैं?
चार हाथियों की यह जद्दोजहद सिर्फ एक बचाव अभियान नहीं, बल्कि इंसान और जंगल के बीच बढ़ती दूरी का जीवंत दस्तावेज है।
प्रकृति अपनी भाषा में चेतावनी दे रही है —
“अगर जंगल की सीमाओं का सम्मान नहीं किया गया, तो अगली बार आवाज शायद कुएं से नहीं, हमारे दरवाजे से आएगी।”
फैक्ट
स्थान: ग्राम हरदी, बारनवापारा अभयारण्य से सटा इलाका (जिला बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़)
हादसा: चार हाथी (दो नर, एक मादा, एक शावक) खुले कुएं में गिरे
समय: सुबह लगभग 5 बजे
पहला सूचना दाता: किसान ठाकुर (ग्राम हरदी)
सहभागिता: ग्रामीण, वन विभाग, पुलिस बल
समस्या: बचाव के लिए उपकरण और संसाधनों की कमी
पृष्ठभूमि: मानसून के बाद भोजन-पानी की तलाश में हाथियों का गांवों की ओर मूवमेंट

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।