मोहम्मद इसराइल बबलू
पार्ट 1 : अर्सलान केस में मौत से पहले लगी सिर पर चोट — पुलिस की ‘क्वेरी’ ने बढ़ाया सवाल : क्या सेंट्रल यूनिवर्सिटी, पुलिस और कानून से करें न्याय की उम्मीद?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा — 24 वर्षीय छात्र की सिर पर चोट ‘जीवनकालीन’, यानी मौत से पहले लगी थी | पुलिस ने डॉक्टरों की टीम से 4 बिंदुओं पर जवाब मांगा | हॉस्टल रिकॉर्ड गायब, वार्डन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं | फोरेंसिक एक्सपर्ट फिर पहुंचे तालाब पर, पर जवाब अब भी धुंध में
Bilaspur। बिलासपुर के गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (GGU) का छात्र अर्सलान अंसारी (24) अब सिर्फ एक नाम नहीं, एक सवाल बन चुका है — क्या बिलासपुर पुलिस, विश्वविद्यालय प्रशासन और कानून मिलकर किसी छात्र की मौत का सच ढूंढ पाएंगे?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पहले सिर पर लगी चोट के खुलासे ने पूरे मामले की दिशा बदल दी है। पर पुलिस ने रिपोर्ट पर ही आपत्ति जताते हुए डॉक्टरों को 4 बिंदुओं में क्वेरी भेज दी है — जैसे वह जांच नहीं, जिरह कर रही हो।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने तोड़ी पुलिस की ‘हादसा थ्योरी’
चार डॉक्टरों की टीम ने 24 वर्षीय अर्सलान की बॉडी का पोस्टमार्टम किया।
रिपोर्ट में साफ लिखा गया — “सिर पर लगी चोट जीवनकालीन (Antemortem) है।”
यानी चोट मौत से पहले लगी थी, बाद में नहीं।
डॉक्टरों ने कहा — अंतिम निष्कर्ष ब्लड, ऊतक और रासायनिक जांच रिपोर्ट के बाद दिया जाएगा।
पर पुलिस ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करने के बजाय चार बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कर दी —
किस वैज्ञानिक आधार पर चोट को जीवनकालीन (Antemortem) माना गया?
किस संभावित कारण या आघात से सिर पर चोट आई?
क्या यह चोट मृत्युकारक थी?
क्या यह चोट दुर्घटनावश प्रतीत होती है या किसी हमले से लगी?
यह वही सवाल हैं जो आमतौर पर बचाव पक्ष कोर्ट में डॉक्टर से पूछता है, न कि जांच एजेंसी घटनास्थल पर।
‘हादसा’ कहकर बंद करने की कोशिश या कुछ छिपाने की साजिश?
अर्सलान 21 अक्टूबर की शाम 5 बजे विवेकानंद हॉस्टल से निकला था।
वीडियो कॉल पर बात करते हुए बाहर गया और फिर कभी लौटा नहीं।
दो दिन बाद, 23 अक्टूबर की सुबह उसका शव हॉस्टल के पीछे तालाब में मिला।
हाथों में कोई संघर्ष का निशान नहीं, पर सिर पर गहरी चोट थी।
पुलिस ने शुरुआती जांच में कहा — “शायद तालाब में गिरा और पत्थर से सिर टकरा गया।”
अब डॉक्टरों की रिपोर्ट ने उसी थ्योरी की नींव हिला दी है।
भाई को नहीं जाने दिया हॉस्टल, दोस्तों से भी मुलाकात पर रोक
परिजनों का आरोप है कि शुरुआत से ही सब कुछ ‘कवर अप’ करने की कोशिश हुई।
भाई गौहर अंसारी जब 25 अक्टूबर को पहुंचा, तो उसे हॉस्टल में जाने नहीं दिया गया।
दोस्तों से मिलने पर रोक थी, रूम रिकॉर्ड गायब था।
26 अक्टूबर को पिता अरशद अंसारी ने शव की पहचान की — तब जाकर शव का पोस्टमार्टम हुआ।
पर रिपोर्ट के बाद भी जांच में रफ्तार नहीं, उल्टा डॉक्टरों से जवाब-तलब शुरू हो गया।
फिर पहुंची फोरेंसिक टीम — तालाब का ‘शेप’ और ‘गहराई’ नापी
शनिवार को एफएसएल की टीम दोबारा मौके पर पहुंची।
सीएसपी सिटी कोतवाली गगन कुमार ने कहा — “घटना का पुनः एनालिसिस किया जा रहा है।”
टीम ने तालाब की आकृति, पानी की गहराई और किनारों की जांच की कि कहीं कोई नुकीला पत्थर तो नहीं था जिससे चोट लगी हो।
पर अब तक कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया।
फोरेंसिक एक्सपर्ट की राय फिलहाल पुलिस के पास सुरक्षित है।
वार्डन पर कार्रवाई शून्य — रिकॉर्ड गायब, जिम्मेदारी गुम
21 अक्टूबर की रात हॉस्टल में 9 बजे अटेंडेंस होती है।
अर्सलान अनुपस्थित था, लेकिन वार्डन और एडमिन टीम ने कोई रिपोर्ट नहीं बनाई।
अगले दिन भी गुमशुदगी की जानकारी नहीं दी गई।
मृत्यु के बाद भी किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई नहीं हुई।
वार्डन डॉ. महेश उपोला, प्रो. जय सिंह, और चीफ वार्डन डॉ. प्रतिभा जे. मिश्रा — सभी को बचा लिया गया।
सिर्फ केयरटेकर को हटाकर फाइल बंद कर दी गई।
और उसी दिन जब छात्र का शव तालाब से निकल रहा था,
विश्वविद्यालय प्रशासन सम्मान समारोह में नाच रहा था।
“पुलिस सवाल कर रही जैसे खुद कटघरे में हो”
“पुलिस ने डॉक्टरों से जो सवाल किए हैं, वो जांच का हिस्सा नहीं, अदालत की जिरह जैसे हैं।
यह सवाल आमतौर पर बचाव पक्ष के वकील पूछते हैं।
इससे यह आभास होता है कि पुलिस खुद पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भरोसा नहीं कर रही,
बल्कि बचाव पक्ष की भूमिका में उतर आई है।”
कैंपस की चुप्पी, जांच की धुंध — और एक पिता का सवाल
छात्रों में सन्नाटा है। हॉस्टल के बाहर अब भी अर्सलान की तस्वीरें लगी हैं।
उसके पिता अरशद अंसारी रोज पुलिस थाने के चक्कर काट रहे हैं।
हर रिपोर्ट, हर टीम, हर मीटिंग एक नए एंगल की बात करती है —
पर जवाब कोई नहीं देता कि 24 वर्षीय छात्र की मौत हादसा थी या हत्या।
सवाल जो अब कानून से बड़े हो गए हैं
क्या गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में सुरक्षा सिर्फ रिकॉर्ड पर है?
क्या पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट से उलझकर सच से भाग रही है?
क्या एक पिता को अपने बेटे के लिए भी फाइलों में तारीखें ढूंढनी पड़ेंगी?
अर्सलान की मौत के 10 दिन हो चुके हैं — पर जांच अभी वहीं खड़ी है, जहां लाश मिली थी।
तालाब के किनारे, एक सन्नाटे के बीच…
जहां से शुरू हुआ था एक छात्र का अंत —
और अब शायद एक सिस्टम की कहानी।



