मोहम्मद इसराइल बबलू
भिलाई में लव क्राइम का खौफनाक चेहरा — जहां इज़्ज़त के नाम पर इंसानियत का गला घोंट दिया गया

बिलासपुर, रायपुर ,भिलाई।छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर भिलाई से एक ऐसी वारदात सामने आई है,
जो प्रेम और समाज के रिश्तों पर सबसे बड़ा सवाल छोड़ जाती है।
खुर्सीपार इलाके के मांझी चौक में 24 वर्षीय युवक विक्की उर्फ धीरज सरोज की हत्या उसी घर में कर दी गई,
जहां वह अपनी प्रेमिका से मिलने गया था।
आरोप है — युवती के पिता, भाई और रिश्तेदार ने मिलकर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।
यह घटना सिर्फ एक प्रेमी की मौत नहीं, बल्कि उस “सामाजिक मानसिकता” की नंगी तस्वीर है
जो आज भी प्रेम को अपराध मानती है और “इज़्ज़त” के नाम पर हत्या को जायज़ ठहराती है।
घटना का पूरा सिलसिला — मुलाक़ात से हत्या तक
गुरुवार की शाम, खुर्सीपार के केनाल रोड स्थित मांझी चौक पर सबकुछ सामान्य लग रहा था।
यहीं एक गली में रहता था धीरज, जो पड़ोस की युवती खुशी से प्रेम करता था।
दोनों के बीच कई सालों से संबंध थे। परिवारों को यह रिश्ता मंज़ूर नहीं था।
सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को खुशी ने धीरज को घर बुलाया।
धीरज के पहुंचते ही बातचीत शुरू हुई,
तभी अचानक खुशी का भाई सिद्धार्थ अंदर आ गया।
कुछ ही देर में पिता सूरज और रिश्तेदार अरुण भी पहुंच गए।
घर का दरवाज़ा बंद हुआ, और उसके बाद जो हुआ,
वह पूरे मोहल्ले ने सिर्फ़ चीख़ों की आवाज़ों में सुना।
धीरज की मां, जो बेटे के पीछे-पीछे वहां पहुंची थीं,
अंदर जाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन दरवाज़ा बंद कर दिया गया।
कुछ मिनटों बाद जब सबकुछ शांत हुआ और लोगों ने दरवाज़ा खुलवाया,
धीरज फर्श पर पड़ा था — उसकी सांसें थम चुकी थीं।
“इज़्ज़त बचाने” की झूठी कहानी
स्थानीय पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में हत्या के पीछे प्रेम प्रसंग और पारिवारिक विरोध की बात सामने आई है।
लेकिन जांच अधिकारी यह भी मान रहे हैं कि घटना अचानक नहीं, बल्कि पूर्वनियोजित साजिश थी।
परिवार के अंदर यह तय कर लिया गया था कि धीरज को सबक सिखाना है।
पुलिस ने पिता सूरज, भाई सिद्धार्थ और रिश्तेदार अरुण को गिरफ्तार किया है।
युवती से भी पूछताछ की जा रही है कि क्या उसने जानबूझकर धीरज को बुलाया था।
हत्या में प्रयुक्त रस्सी और कपड़े के साक्ष्य पुलिस ने जब्त किए हैं।
मां की आंखों के सामने बेटे की मौत

धीरज की मां ने बताया —
“वो खुशी के घर गया था। मैं भी पीछे-पीछे गई। अंदर से आवाजें आ रही थीं — ‘मत मारो… मुझे जाने दो’।
मैंने दरवाजा पीटा, लेकिन किसी ने नहीं खोला। जब दरवाजा खुला, तो मेरा बेटा नहीं रहा…”
यह बयान न केवल दिल दहला देने वाला है, बल्कि इस पूरे समाज के लिए आईना भी है —
जहां एक मां बाहर खड़ी रहती है, और भीतर समाज की ‘इज़्ज़त’ नाम की दीवारें उसके बेटे की जान ले लेती हैं।
पुलिस जांच — साजिश के कई धागे
खुर्सीपार थाना प्रभारी ने बताया कि परिवारों के बीच पहले से विवाद चल रहा था।
दोनों पक्षों ने पूर्व में थाने में शिकायतें भी की थीं।
पुलिस अब जांच कर रही है कि युवती की भूमिका क्या थी —
क्या यह प्रेम का बुलावा था या साजिश का फंदा?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट है कि धीरज की मौत गला दबाने से हुई।
पुलिस अब हत्या के पीछे की योजना और अपराध में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है।



