मोहम्मद इसराइल बबलू
बिलासपुर। बिलासपुर से उभरी उम्मीद की कहानी — जब तमाम निजी अस्पतालों ने “जोखिम” कहकर मना कर दिया, तब सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) के डॉक्टरों ने चुनौती स्वीकार की और असंभव मानी जाने वाली सर्जरी को अंजाम देकर महिला को नई ज़िंदगी दी। यह सफलता न केवल चिकित्सा क्षमता का उदाहरण है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भरोसे का प्रतीक बन गई है।
सिम्स बिलासपुर की टीम ने किया कमाल


छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) बिलासपुर के डॉक्टरों ने एक जटिल और अत्यंत जोखिमपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह सर्जरी एक ऐसी महिला पर की गई जो दोनों पैरों में पोलियो और रीढ़ की विकृति से पीड़ित थी। लंबे समय से वह न केवल चलने-फिरने में असमर्थ थीं, बल्कि पिछले कुछ महीनों से पेट में असहनीय दर्द झेल रही थीं।
कई निजी अस्पतालों में इलाज करवाने के बावजूद, मरीज को हर जगह एक ही जवाब मिला — “सर्जरी बहुत जोखिमपूर्ण है।” अंततः सिम्स बिलासपुर की चिकित्सा टीम ने यह चुनौती स्वीकार की और सफल ऑपरेशन कर दिखाया कि सरकारी संस्थान भी किसी निजी सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल से कम नहीं हैं।
16 सप्ताह के गर्भ के बराबर ट्यूमर को निकाला गया
जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि मरीज के गर्भाशय में लगभग 16 सप्ताह के गर्भ के आकार का बड़ा ट्यूमर मौजूद था, जो लगातार दर्द और जटिलताओं का कारण बन रहा था। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने यह ट्यूमर पूरी तरह से निकालने में सफलता पाई — बिना किसी आंतरिक अंग को क्षति पहुँचाए।
खास बात यह रही कि यह पूरा ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निशुल्क किया गया, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीज को भी उच्चस्तरीय उपचार मिल सका।
महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में सिम्स ने बनाया नया मानक
इस सर्जरी का नेतृत्व डॉ. संगीता रमन जोगी, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने किया। टीम में डॉ. दीपिका सिंह, डॉ. रचना जैन (एसोसिएट प्रोफेसर) और डॉ. दीक्षा चंद्राकर (पीजी रेज़िडेंट) शामिल थीं।
सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया विभाग ने भी अहम भूमिका निभाई। विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति के नेतृत्व में डॉ. भावना रॉयजादा, डॉ. श्वेता कुजूर, डॉ. मिल्टन देबर्मन और डॉ. सुरभि बंजारे ने कठिन शारीरिक स्थिति में भी एनेस्थीसिया को कुशलता से संभाला।
टीमवर्क और समर्पण की मिसाल
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर है और वह तेजी से स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा —
“यह सर्जरी हमारे डॉक्टरों की विशेषज्ञता और टीमवर्क का परिणाम है। सिम्स हर उस मरीज के लिए उम्मीद का केंद्र है जो किसी भी परिस्थिति में चिकित्सा सहायता चाहता है।”
वहीं, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा —
“यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि अगर इच्छाशक्ति और समर्पण हो तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। सिम्स की टीम ने साबित किया है कि सरकारी डॉक्टर भी विश्वस्तरीय सेवा दे सकते हैं।”
सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में भरोसे की नई कहानी
सिम्स बिलासपुर की यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा जगत के लिए प्रेरणा है, बल्कि आम लोगों के बीच यह विश्वास भी मजबूत करती है कि सरकारी संस्थानों में भी उच्च कोटि की चिकित्सा संभव है।
जहां निजी अस्पतालों ने जोखिम उठाने से इनकार कर दिया, वहीं सिम्स की टीम ने “सेवा ही धर्म” की भावना से कार्य करते हुए जीवन बचाने का संकल्प निभाया।



