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पंजीयन से बाहर किसान – गिरदावली की लापरवाही पर फूटा गुस्सा, बिलासपुर में भड़का आंदोलन!

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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विधायक अटल श्रीवास्तव के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों का कलेक्टोरेट घेराव, चेतावनी – “31 अक्टूबर तक नहीं हुआ समाधान तो रतनपुर-कोटा मार्ग होगा जाम”
मोहम्मद इसराइल बबलू | बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
छत्तीसगढ़ में इस बार धान खरीदी से पहले ही किसानों का सब्र टूटने लगा है। बिलासपुर के कोटा विकासखंड के छेरकाबांधा गांव के सैकड़ों किसान मंगलवार को अचानक कलेक्टोरेट पहुंच गए। नारों से पूरा परिसर गूंज उठा — “किसान की अनदेखी बंद करो”, “गिरदावली सही करो”, “धान हमारा, अधिकार हमारा”!
किसानों का आरोप है कि पटवारियों की लापरवाही और गिरदावली में गड़बड़ी के कारण उनका पंजीयन ही नहीं हो पा रहा। जिन किसानों ने सालों से सहकारी समितियों में धान बेचा है, उनका नाम अब गिरदावली सूची से गायब कर दिया गया है।
“नाम काट दिए गए, अब समिति नहीं ले रही धान” – किसानों की पीड़ा


किसानों ने बताया कि हर साल की तरह उन्होंने खेत में धान की फसल बोई, बैंक से केसीसी ऋण भी लिया, लेकिन अब जब फसल तैयार है, तो पटवारी ने कह दिया कि उनका नाम गिरदावली में दर्ज नहीं है।
“ऊपर से नाम काट दिया गया है” — यही जवाब हर किसान को मिला। अब उनकी फसल निरंक (रिकॉर्ड में नहीं) बताई जा रही है।
किसान बुड़के राम, रामलाल, और जगदीश यादव ने कहा —
“हम हर साल पंजीकृत किसान रहे हैं। समिति में नाम है, पर इस बार सिस्टम से नाम काट दिया गया। अगर धान नहीं बिका तो बैंक किस्तें कैसे चुकाएंगे? घर कैसे चलेगा?”
विधायक अटल श्रीवास्तव बोले – “किसानों का हक छीना जा रहा है”
किसानों के साथ पहुंचे कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने प्रशासन पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा —
“यह किसानों की आजीविका का सवाल है। जब तक हर किसान का नाम गिरदावली में दर्ज नहीं हो जाता, हम चुप नहीं बैठेंगे। ये सिर्फ एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि किसानों के हक पर प्रहार है।”
अटल श्रीवास्तव के साथ पूर्व जिला पंचायत सदस्य दीपक रजक भी मौजूद थे। दोनों नेताओं ने कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर किसानों की समस्याओं को तत्काल सुलझाने की मांग रखी।
कलेक्टर से मिले किसान – 31 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने किसानों की समस्या सुनने के बाद गिरदावली में गड़बड़ी की जांच के निर्देश दिए। लेकिन किसानों ने साफ कह दिया —
“अगर 31 अक्टूबर तक समस्या हल नहीं हुई, तो रतनपुर-कोटा मुख्य मार्ग जाम करेंगे।”
प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि अगर प्रशासन ने तत्काल सुधार नहीं किया तो धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होगी और हजारों किसान बिना पंजीयन के रह जाएंगे।
प्रशासन की लापरवाही से संकट में खरीदी सीजन
सूत्रों के मुताबिक जिले के कई अन्य गांवों में भी गिरदावली अपडेट नहीं होने की शिकायतें हैं। ऐसे में खरीदी सीजन शुरू होने से पहले राज्य सरकार के समर्थन मूल्य कार्यक्रम पर असर पड़ सकता है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर इस बार भी लापरवाही हुई तो वे जिला स्तर पर कृषि विभाग और राजस्व अमले के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे।
छत्तीसगढ़ के किसानों की पुकार – “हम खेतों में मरते हैं, दफ्तरों में मिटा दिए जाते हैं”
गांव-गांव में यह चर्चा है कि प्रशासन की धीमी प्रक्रिया और डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट न होने से किसानों के नाम योजनाओं से कट रहे हैं
जहां सरकार “धान खरीदी का पर्व” मनाने की तैयारी कर रही है, वहीं किसानों का कहना है —
“हमारे लिए तो यह साल बर्बादी का पर्व बन गया है।”
बिलासपुर में अब हालात विस्फोटक हैं।
किसान एकजुट हो रहे हैं, विधायक उनके साथ खड़े हैं और चेतावनी साफ है —
“अगर गिरदावली नहीं सुधरी, तो सड़कों पर उबल पड़ेगा गुस्सा।”

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