
मोहम्मद इसराइल बबलू| रायपुर/बिलासपुर/रायगढ़/कवर्धा/सूरजपुर/धमतरी।
छत्तीसगढ़ में त्योहार की रौनक अब खौफ में बदल चुकी है। दीपों की रोशनी में इंसानियत की लौ बुझ गई। बीते 48 घंटों में राज्य के अलग-अलग जिलों से ऐसी घटनाएं सामने आईं जिन्होंने कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। कहीं भीड़ ने एक दलित को तांबा चोरी के शक में पीट-पीटकर मार डाला, तो कहीं पटाखे के विवाद में युवक की जान चली गई। पति-पत्नी की हत्या, आत्महत्या, गोलीबारी — हर जिले से खून की गंध उठी।
पतरेपाली में दलित की मॉब लिंचिंग – “मत मारो मुझे…” कहते रह गया कौशल, भीड़ ने नहीं सुनी

25 अक्टूबर की सुबह बिलासपुर जिले के पतरेपाली गांव में वह घटना हुई जिसने पूरे प्रदेश को हिला दिया। गांव में खबर फैली कि एक व्यक्ति रेलवे केबल जलाकर तांबा निकाल रहा है। देखते ही देखते लाठी-डंडे से लैस सैकड़ों लोग जमा हो गए।
रेलवे पटरी के पास 50 वर्षीय कौशल सहिस को भीड़ ने पकड़ लिया। लोग चिल्ला रहे थे — “चोर है, चोर है।” कौशल गिर पड़ा, हाथ जोड़कर कहता रहा — “मुझे छोड़ दो, मैं नहीं चोर हूं”, लेकिन किसी ने नहीं सुना। लात-घूसे, डंडे, घसीट — सब कुछ हुआ।
भीड़ ने उसे रेल पटरी से घसीटते हुए पतरेपाली गांव के महावीर चौक तक लाया। कौशल दलित समुदाय से था, इसलिए गुस्से और बढ़ गए। उसे दोबारा पीटा गया। इतने पर भी हैवानियत नहीं रुकी — गांव वालों ने कौशल के परिवार को फोन किया और कहा —
“25 हजार दो, नहीं तो इसे जिंदा नहीं छोड़ेंगे।”
कौशल की मां कचरी बाई सहिस ने फोन पर कहा कि उनके पास पैसे नहीं हैं। कुछ देर बाद भीड़ ने फिर से पिटाई शुरू कर दी। कौशल की वहीं मौत हो गई। शव को मुक्तिधाम के पास फेंककर भीड़ भाग निकली।
कचरी बाई ने बताया कि कौशल मूल रूप से मोहबा गांव (ब्लॉक बागबाहरा) का था और अपनी पत्नी के साथ बसना में रहता था। कौशल ने पकड़े जाने पर पतरेपाली के सरपंच पति हेमंत चंद्राकर को अपने घर का पता बताया था। हेमंत ने मोहबा निवासी सुभाष चंद्राकर को तीन बार कॉल किया और फिर मृतक की मां से बात कराई। उसने मां को बताया — “आपका बेटा चोरी करते पकड़ा गया है।”
अगली सुबह कौशल का शव मिला।
मौके पर पहुंची पुलिस और फोरेंसिक टीम ने बताया — शव पर घसीटने के निशान थे, कपड़ों में कीचड़ और हाथों में चोटें थीं। थाना प्रभारी शरद दुबे ने कहा कि शुरुआती जांच में साफ है कि युवक की पिटाई से मौत हुई। एएसपी प्रतिभा पांडेय ने बताया कि हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
रायपुर: दीपावली की रात पटाखे पर विवाद, युवक की कैंची से हत्या
राजधानी रायपुर के बीएसयूपी कॉलोनी में दीपावली की रात जश्न के बीच खून बहा। ताहिर हुसैन अपने परिवार के साथ पटाखे फोड़ रहा था, तभी मोहल्ले के मदन यादव और सूरज यादव पहुंचे। मामूली विवाद इतना बढ़ा कि दोनों भाइयों ने कैंची से ताहिर पर हमला कर दिया। सीने और पेट में वार से ताहिर लहूलुहान होकर गिर पड़ा। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने दोनों सगे भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है।
रायगढ़: पति-पत्नी की हत्या, शव आंगन में फेंका गया
रायगढ़ जिले के कपाटडेरा गांव में गुरुवार देर रात गुरुदास सिंह राठिया (35) और उसकी पत्नी मनीता (30) की हत्या कर दी गई। आधी रात को गांव के लोग जागे तो देखा कि दंपति की लाशें आंगन में पड़ी थीं, खून से सनी हुईं। घरघोड़ा थाना पुलिस ने डॉग स्क्वॉड बुलाया है। हत्या की वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। गांव में सन्नाटा और डर का माहौल है।
धमतरी: नवविवाहित जोड़े की मौत – “पहले उसे खत्म करूंगा, फिर खुद मर जाऊंगा…”
धमतरी जिले के हरदी गांव में नवविवाहित हिम्मत यादव और उसकी पत्नी लक्ष्मी यादव की लाश घर में मिली। युवक के मोबाइल में आखिरी व्हाट्सएप स्टेटस लिखा था —
“पहले उसे मारूंगा, फिर खुद मरूंगा… मेरी मौत के जिम्मेदार सास-ससुर हैं।”
पुलिस हत्या और आत्महत्या दोनों एंगल से जांच कर रही है। दोनों की शादी सिर्फ एक साल पहले हुई थी।
कवर्धा: सोती पत्नी की सब्बल से हत्या
कवर्धा के सोढ़ा गांव में दीपावली की रात पति ने सोती हुई पत्नी को लोहे की सब्बल से मार डाला। मृतका का नाम अशमनी गेन्ड्रे और आरोपी का नाम परसुराम गेन्ड्रे है। इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई। आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
सूरजपुर: खाना न बनाने पर पत्नी की हत्या
सूरजपुर जिले के भट्ठापारा इलाके में अतवार सिंह नामक व्यक्ति ने पत्नी को सिर्फ इसलिए पीट-पीटकर मार डाला क्योंकि उसने रात में खाना नहीं बनाया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त डंडा बरामद किया है।



बिलासपुर-मस्तूरी: जनपद उपाध्यक्ष के ऑफिस पर अंधाधुंध फायरिंग
बिलासपुर से 20 किमी दूर मस्तूरी में मंगलवार शाम जनपद उपाध्यक्ष नितेश सिंह के ऑफिस पर तीन नकाबपोशों ने अंधाधुंध फायरिंग की। 13 राउंड गोली चली। दो लोग — राजकुमार सिंह (45) और पूर्व सरपंच चंद्रकांत सिंह (45) घायल हुए। जवाबी फायरिंग में हमलावर भाग निकले।
आंखों देखी के मुताबिक, पहले पटाखे की आवाज लगी, फिर पिस्टल देख सब भागे। पुलिस ने बताया कि हमला पूर्व नियोजित था। हमलावरों के पुराने विवाद से जुड़े होने की आशंका है।
एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि विशेष टीम गठित कर हमलावरों की तलाश की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
सवाल एक — “कानून कहां है?”
छत्तीसगढ़ में पिछले दो दिनों में सात लोगों की हत्या, एक मॉब लिंचिंग, एक आत्महत्या और गोलीबारी की घटनाओं ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
जहां त्योहार की रात खुशियों का जश्न होना था, वहीं हर जिले से मातम और खून की खबरें आईं।
दलित की मॉब लिंचिंग से लेकर पत्नी की हत्या, गोलीबारी, नवविवाहित की मौत — सब कुछ उसी राज्य में हुआ, जहां “शांति और सद्भाव” का दावा किया जाता है।
अब सवाल यही है —
कब तक भीड़ कानून बनेगी?
कब तक पुलिस पहुंचने से पहले मौत हो जाएगी?
और कब तक छत्तीसगढ़ की मिट्टी पर इंसानियत यूं लहूलुहान होती रहेगी?



