Latest news

छत्तीसगढ़ की अस्मिता पर हमला! रायपुर में ‘महतारी’ की मूर्ति तोड़ी – जनाक्रोश फूटा, सड़कों पर उतरे संगठन, सियासत में भूचाल

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
6 Min Read

मोहम्मद इसराइल बबलू

रायपुर। छत्तीसगढ़ की आत्मा और अस्मिता की प्रतीक छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को रायपुर में तोड़ देना सिर्फ एक मूर्ति पर हमला नहीं—यह पूरे प्रदेश के गर्व, संस्कृति और मातृत्व पर सीधा वार है। राजधानी के वीआईपी चौक पर अज्ञात असामाजिक तत्वों ने आधी रात को महतारी की प्रतिमा की गर्दन तोड़ दी, जिससे पूरे प्रदेश में उबाल आ गया है। रायपुर से लेकर बस्तर और सरगुजा तक लोग आक्रोश में हैं।

छत्तीसगढ़ की आत्मा पर हमला, सड़कों पर फूटा गुस्सा!
घटना के बाद छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। “महतारी के अपमान का बदला लेकर रहेंगे!” के नारे गूंज उठे। प्रदर्शनकारियों ने वीआईपी चौक पर जमकर नारेबाजी की और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। कई संगठनों ने साफ कहा—यह किसी पागल का काम नहीं, यह योजनाबद्ध साजिश है, जो छत्तीसगढ़ की पहचान मिटाने की कोशिश कर रही है।
छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के नेता अमित ने कहा—
“पुलिस इसे किसी पागल का काम बता रही है, लेकिन प्रतिमा की हालत देखकर साफ है कि ये हमला सोच-समझकर किया गया है। मूर्ति की गर्दन तोड़ी गई और केवल उस हिस्से को खुरचा गया जहां डॉ. नरेंद्र वर्मा का नाम लिखा था। यह ‘पागलपन’ नहीं, अस्मिता पर साजिशी प्रहार है।”
“मां की मूर्ति तोड़ दी गई, अब चुप नहीं बैठेंगे!”
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी की जिला अध्यक्ष लक्ष्मी नाग ने भावनात्मक शब्दों में कहा—
“आज छत्तीसगढ़ की आत्मा को चोट पहुंचाई गई है। जिसने हमें जन्म दिया, उसी मां की मूर्ति तोड़ दी गई। जब तक नई मूर्ति स्थापित नहीं होगी, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। राज्योत्सव में भी हम विरोध दर्ज कराएंगे।”
पुलिस ने दर्ज किया अपराध, CCTV खंगाल रही टीम
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे। एडिशनल एसपी कीर्तन राठौर ने बताया कि तेलीबांधा थाने में अपराध दर्ज कर लिया गया है और आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। नगर निगम ने घोषणा की है कि टूटी मूर्ति को हटाकर जल्द नई प्रतिमा लगाई जाएगी।
कांग्रेस का साय सरकार पर हमला – “यह सिर्फ मूर्ति नहीं, संस्कृति पर प्रहार है”
कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोला। कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा—
“छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़ना शर्मनाक और निंदनीय है। भाजपा सरकार आने के बाद से ही हमारी संस्कृति, तीज-त्योहार और अस्मिता पर लगातार हमले हो रहे हैं। जब कांग्रेस सरकार ने यह मूर्ति लगाई थी, तब भी भाजपा ने इसका विरोध किया था। आज वही मानसिकता फिर दिख रही है।”
भूपेश बघेल का हमला – “साय सरकार बताए, ये किसकी करतूत?”
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर तीखा प्रहार करते हुए लिखा—
“छत्तीसगढ़ स्थापना की रजत जयंती के समय राजधानी में छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़ दी गई। यह पूरे राज्य का अपमान है। भाजपा सरकार ने पहले कार्यक्रमों से महतारी की तस्वीर हटाई और अब प्रतिमा तोड़ी जा रही है। अगर जनाक्रोश को अनदेखा किया गया, तो परिणाम गंभीर होंगे।”
बात हे अभिमान के – छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान के!
सीएम विष्णुदेव साय का सख्त बयान – “दोषी बख्शे नहीं जाएंगे”
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा—
“मुझे घटना की जानकारी मिली है। दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि पूरे मामले की जांच गंभीरता से करें और जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्तार करें।”
सोशल मीडिया पर फूटा जनाक्रोश – “यह हमारी मां है!”
घटना के बाद पूरे प्रदेश में सोशल मीडिया पर गुस्से की लहर दौड़ गई। लोग लिख रहे हैं –
“जिसने मां की मूर्ति तोड़ी, उसने पूरे छत्तीसगढ़ के दिल को तोड़ा।”
फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम पर #छत्तीसगढ़_महतारी_का_अपमान ट्रेंड करने लगा। हर वर्ग, हर तबके के लोग इसे राज्य की अस्मिता पर हमला बता रहे हैं।
सवाल वही – आखिर कौन हैं ये असामाजिक तत्व जो ‘मां’ पर वार कर रहे हैं?
यह घटना सिर्फ एक मूर्ति तोड़ने का मामला नहीं। यह उस विचारधारा की आक्रामक झलक है, जो छत्तीसगढ़ की अस्मिता को मिटाने की कोशिश कर रही है। सवाल उठ रहा है –
क्या यह ‘संयोग’ है कि रजत जयंती वर्ष में ही महतारी की प्रतिमा तोड़ी गई?
क्यों प्रशासन ‘अज्ञात’ के नाम पर लीपापोती कर रहा है?
और कब तक मां छत्तीसगढ़ की प्रतिमा पर राजनीति होती रहेगी?
यह अब सिर्फ रायपुर का मामला नहीं – यह हर उस छत्तीसगढ़िया का सवाल है, जिसके भीतर अपनी मिट्टी, अपनी अस्मिता और अपनी महतारी के प्रति श्रद्धा जिंदा है।
“छत्तीसगढ़ महतारी की जय!” – यह अब नारा नहीं, एक जनघोषणा बन चुकी है।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।