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“इलाज की जगह मौत का सफर” — नवा रायपुर जंगल सफारी की बाघिन ‘बिजली’ की संदिग्ध मौत, कांग्रेस ने कहा ‘लापरवाही की पराकाष्ठा’

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मो इसराइल बबलू

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रायपुर, 19 अक्टूबर 2025 छत्तीसगढ़ की राजधानी से सटे नवा रायपुर नंदनवन जंगल सफारी में बाघिन ‘बिजली’ की मौत ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है।आठ वर्षीया रॉयल बंगाल टाइग्रेस बिजली, जो सफारी की सबसे आकर्षक पहचान थी, 11 अक्टूबर को गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा वाइल्डलाइफ सेंटर में इलाज के दौरान मर गई।उसकी मौत पर अब लापरवाही, कुप्रबंधन और इलाज में देरी के आरोपों ने सरकार और वन विभाग को घेर लिया है। महंत का हमला — “यह बाघिन नहीं, सिस्टम मरी है” कौन थी बाघिन ‘बिजली’ इलाज नहीं, ‘एक्सपेरिमेंट’ बना केस छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों की मौतें (2020–2025)रायपुर-बिलासपुर-दुर्ग में वन्यजीव देखभाल की स्थितिपर्यावरणविदों की प्रतिक्रिया अब आगे क्या?मेरी भी सुनिए

रायपुर, 19 अक्टूबर 2025 छत्तीसगढ़ की राजधानी से सटे नवा रायपुर नंदनवन जंगल सफारी में बाघिन ‘बिजली’ की मौत ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है।आठ वर्षीया रॉयल बंगाल टाइग्रेस बिजली, जो सफारी की सबसे आकर्षक पहचान थी, 11 अक्टूबर को गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा वाइल्डलाइफ सेंटर में इलाज के दौरान मर गई।उसकी मौत पर अब लापरवाही, कुप्रबंधन और इलाज में देरी के आरोपों ने सरकार और वन विभाग को घेर लिया है।


महंत का हमला — “यह बाघिन नहीं, सिस्टम मरी है”

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने इसे छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी वन्यजीव असफलता बताते हुए कहा —

“एशिया के सबसे बड़े जंगल सफारी में अगर एक बीमार बाघिन को इलाज नहीं मिल सका तो यह वन विभाग की नाकामी है। यह स्कैंडल है। जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी थी, उन्हें निलंबित किया जाए।”

महंत ने राज्यपाल को पत्र लिखकर प्रमुख वन्यजीव संरक्षक, सफारी निदेशक और जिम्मेदार चिकित्सकों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि 20 स्वीकृत पशुचिकित्सक पदों में से 18 रिक्त हैं, जो गंभीर लापरवाही का प्रमाण है।


कौन थी बाघिन ‘बिजली’

  • आयु: 8 वर्ष
  • प्रजाति: रॉयल बंगाल टाइग्रेस
  • स्थान: नवा रायपुर नंदनवन जंगल सफारी
  • विशेष जानकारी:
    • फरवरी 2025 में दो शावकों को जन्म दिया था (एक मृत, दूसरा अस्वस्थ होकर कुछ दिन बाद मरा)
    • अगस्त से बीमारी के लक्षण—भूख की कमी, कमजोरी
    • प्रारंभिक जांच में गर्भाशय और दांतों में संक्रमण
    • बाद में सीटी स्कैन में किडनी और मूत्र पथ की समस्या पाई गई
    • 7 अक्टूबर को इलाज के लिए गुजरात भेजी गई
    • 11 अक्टूबर को इलाज के दौरान मौत

इलाज नहीं, ‘एक्सपेरिमेंट’ बना केस

बिजली की बीमारी की पहचान में वन विभाग की टीम असफल रही। सोनोग्राफी मशीन होने के बावजूद उसे चलाने वाला टेक्नीशियन उपलब्ध नहीं था।
स्थानीय चिकित्सा सुविधा के अभाव में बाघिन को 1000 किलोमीटर दूर गुजरात भेजा गया, जहां यात्रा के दौरान ही उसकी स्थिति बिगड़ती चली गई।
वन विभाग ने इसे “नेचुरल केस” बताया, परन्तु विपक्ष और पर्यावरणविदों ने इसे ‘सिस्टम फेलियर’ करार दिया है।


छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों की मौतें (2020–2025)

| वर्ष | बाघों की मौत | तेंदुए | हाथी | अन्य प्रजाति | प्रमुख कारण | |——|—————|——–|——–|—————-| | 2020 | 3 | 7 | 12 | 24 | शिकार, बीमारी | | 2021 | 2 | 5 | 14 | 19 | बिजली व दुर्घटना | | 2022 | 1 | 6 | 10 | 22 | संक्रमण, ट्रांसपोर्ट | | 2023 | 4 | 4 | 9 | 16 | मानव-संघर्ष | | 2024 | 3 | 8 | 11 | 27 | मेडिकल लापरवाही | | 2025 (अब तक) | 1 (बिजली) | 3 | 6 | 11 | बीमारी/इलाज में देरी |

(स्रोत: वन विभाग वार्षिक प्रतिवेदन एवं स्वतंत्र पर्यावरण अध्ययन रिपोर्ट)


रायपुर-बिलासपुर-दुर्ग में वन्यजीव देखभाल की स्थिति

  • रायपुर (नवा रायपुर सफारी): 22 बड़े वन्यजीव, केवल 2 पशुचिकित्सक
  • बिलासपुर (कोटा सेंचुरी): वन चिकित्सा यूनिट के 4 पदों में 3 खाली
  • दुर्ग-भिलाई (माथुराडोंगर सेंचुरी): मेडिकल टीम अस्थायी अनुबंध पर
  • सरगुजा-दरिमा क्षेत्र: 2024 में दो तेंदुओं की मृत्यु, रिपोर्ट अब तक लंबित

पर्यावरणविदों की प्रतिक्रिया

रायपुर स्थित वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट पी जोशी का कहना है —

“यह कोई अलग घटना नहीं। छत्तीसगढ़ में वाइल्डलाइफ मेडिकल सिस्टम अधूरा है। अगर समय पर एक्स-रे या सिस्टोस्कोपी की सुविधा होती, तो बिजली को बचाया जा सकता था।”


अब आगे क्या?

  1. फॉरेंसिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
  2. वन विभाग में रिक्त पशुचिकित्सक पदों की त्वरित भर्ती हो।
  3. जंगल सफारी में आधुनिक पशु अस्पताल की स्थापना की जाए।
  4. जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय हो।

मेरी भी सुनिए

एक बाघिन को इलाज भी नहीं मिल सका…

बाघिन बिजली की मौत ने छत्तीसगढ़ के वन्यजीव तंत्र को आईना दिखा दिया है।
जहां “संरक्षण” के नाम पर करोड़ों खर्च होते हैं, वहीं एक बाघिन को इलाज तक नहीं मिल सका।
यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि सवाल है — क्या हमारे सफारी में बचे हुए जानवर भी सुरक्षित हैं?

Mohammed israil

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