मो इसराइल बबलू
आबकारी सचिव आर. शंगीता की अगुवाई में तीन दिवसीय व्यापक विचार-विमर्श, उद्योग प्रतिनिधियों और लाइसेंसधारकों से सीधे संवाद
रायपुर, बिलासपुर 18 अक्टूबर 2025।
छत्तीसगढ़ सरकार आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई शराब नीति (New Excise Policy) को अधिक पारदर्शी, व्यवहारिक और उद्योग-अनुकूल बनाने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रही है। सरकार का लक्ष्य ऐसी नीति तैयार करना है जो न केवल राजस्व प्रबंधन और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित करे, बल्कि व्यवसायिक हितों और उपभोक्ता सुविधा को भी प्राथमिकता दे।

इसी उद्देश्य से 13 से 15 अक्टूबर 2025 तक रायपुर में तीन दिवसीय महत्वपूर्ण परामर्श बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों की अध्यक्षता आबकारी सचिव सह आयुक्त आर. शंगीता ने की।
तीनों दिनों में शराब उद्योग से जुड़े विभिन्न हितधारकों — बॉटलिंग एवं उत्पादन इकाइयों, विदेशी शराब कंपनियों, बार और क्लब संचालकों — के साथ खुला संवाद किया गया।
पहला दिन — उत्पादन और बॉटलिंग इकाइयों से सुझाव
पहले दिन की बैठक (13 अक्टूबर) में राज्य की विभिन्न आसवनी (Distillery) और बॉटलिंग यूनिट्स के संचालकों ने भाग लिया।
इस दौरान निम्न प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई —
- बॉटलिंग फीस, लाइसेंस शुल्क और आयात-निर्यात शुल्क की संरचना
- काउंटरवेलिंग ड्यूटी (Countervailing Duty) को यथार्थवादी बनाने के सुझाव
- ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था को और सरल व पारदर्शी करने की मांग
- नई बोतलों के पुन: उपयोग की अनुमति और
- गोदाम संचालन के अवकाश दिवसों में लचीलापन
आबकारी विभाग ने सभी बिंदुओं को संज्ञान में लेते हुए कहा कि उद्योग की व्यावहारिक दिक्कतों को नीति निर्माण में प्राथमिकता दी जाएगी।
दूसरा दिन — विदेशी शराब कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ विमर्श
14 अक्टूबर को विदेशी मदिरा कंपनियों (IMFL Importers) और उनके स्थानीय वितरकों से विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
इन कंपनियों ने आयात-निर्यात प्रक्रिया, लाइसेंस फीस, बॉटलिंग चार्ज, हैंडलिंग शुल्क और गोदाम संचालन की शर्तों से जुड़ी समस्याओं को रेखांकित किया।
आबकारी सचिव आर. शंगीता ने भरोसा दिलाया —
“राज्य सरकार विदेशी मदिरा उद्योग को पारदर्शी और स्थिर वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी नीतिगत बदलावों में उद्योग के सुझावों को शामिल किया जाएगा, ताकि राज्य में निवेश और उत्पादन दोनों को प्रोत्साहन मिल सके।”
तीसरा दिन — बार और क्लब संचालकों की भागीदारी
15 अक्टूबर को हुई अंतिम बैठक में राज्यभर के बार और क्लब संचालक, उनके संघों के प्रतिनिधि और लाइसेंसधारक संगठन शामिल हुए।
इस संवाद में निम्न बिंदुओं पर चर्चा हुई —
- न्यूनतम बिक्री लक्ष्य (Minimum Guarantee – MG) की व्यावहारिक समीक्षा
- बार संचालन का समय और रात्री सीमा
- लाइसेंस शुल्क में संशोधन और
- ब्रांड रेंज के हिसाब से बिक्री की अनुमति प्रणाली
- अवैध बिक्री और अवैध आपूर्ति श्रृंखला पर नियंत्रण
संचालकों ने कहा कि लाइसेंस और बिक्री लक्ष्यों में व्यावहारिकता लाकर सरकार राजस्व और वैध कारोबार दोनों को मज़बूत कर सकती है।
अब तैयार होगा नई नीति का ड्राफ्ट
तीनों चरणों से प्राप्त फीडबैक का अब आबकारी विभाग विश्लेषण करेगा।
सचिव आर. शंगीता ने बताया —
“हमारा लक्ष्य ऐसी नीति तैयार करना है जो उद्योग और शासन — दोनों की प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाए। सभी सुझावों का अध्ययन कर 2026-27 की शराब नीति, बार नीति और अहाता नीति के प्रारूप (Draft) तैयार किए जाएंगे।”
नई नीति से उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ की शराब व्यवस्था राजस्व वृद्धि, नियमन पारदर्शिता और उद्योगिक स्थिरता — तीनों मोर्चों पर सुदृढ़ बनेगी।
फैक्ट फाइल : छत्तीसगढ़ की नई शराब नीति – परामर्श का खाका
पहलू विवरण अवधि 13 से 15 अक्टूबर 2025 स्थान रायपुर, आबकारी मुख्यालय अध्यक्षता आर. शंगीता, सचिव-सह-आयुक्त, आबकारी विभाग मुख्य प्रतिभागी आसवनी-बॉटलिंग यूनिट्स, विदेशी शराब कंपनियां, बार व क्लब संचालक नीति वर्ष 2026-27 मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता, व्यवहारिकता और उद्योग-अनुकूल वातावरण प्रस्तावित नीतियां शराब नीति, बार नीति, अहाता नीति
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में छत्तीसगढ़ की पहल
भारत के कई राज्यों में शराब नीति अक्सर राजस्व बनाम सामाजिक प्रभाव के द्वंद्व में उलझी रहती है। छत्तीसगढ़ ने इस बार नीति निर्माण से पहले सीधे हितधारकों से संवाद कर कंसल्टेटिव गवर्नेंस मॉडल की मिसाल पेश की है।
यह कदम आने वाले वर्षों में न केवल राज्य के राजस्व मॉडल को स्थिर करेगा, बल्कि नीति पारदर्शिता और उद्योग विश्वास को भी नई दिशा देगा।



