मो इसराइल बबलू
रायपुर, 17 अक्टूबर 2025
छत्तीसगढ़ की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने राज्य के विभिन्न शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमडी-एमएस (पोस्ट ग्रेजुएट) की 61 नई सीटों की मंजूरी दी है। इन नई सीटों के जुड़ने से अब छत्तीसगढ़ में कुल 377 शासकीय पीजी सीटें हो गई हैं। पहले यह संख्या 316 थी।
आयुक्त चिकित्सा शिक्षा विभाग श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी के अनुसार, यह स्वीकृति राज्य सरकार के लगातार प्रयासों और मेडिकल संस्थानों की गुणवत्ता सुधार की दिशा में उठाए गए ठोस कदमों का परिणाम है।
नई पीजी सीटों का संस्थानवार वितरण
क्रमांक संस्थान का नाम नई स्वीकृत सीटें 1 छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान, बिलासपुर 21 2 भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, राजनांदगांव 7 3 स्व. बलिराम कश्यप स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, जगदलपुर 8 4 स्व. लखी राम अग्रवाल स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायगढ़ 12 5 स्व. बिसाहू दास महंत स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, कोरबा 13 कुल61
स्वास्थ्य मंत्री का बयान
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा —
“यह छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र के लिए ऐतिहासिक पल है। नई पीजी सीटों से विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी, जिससे ग्रामीण और अंचल क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार कार्य कर रही है।”
राज्य में अब पीजी सीटों की स्थिति
- शासकीय मेडिकल कॉलेजों में कुल सीटें : 377
- निजी कॉलेजों में कुल सीटें : 186
- कुल पीजी सीटें (राज्य में) : 563
छत्तीसगढ़ को क्या लाभ
- 🔹 विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में बढ़ोतरी — विशेषकर एनस्थीसिया, मेडिसिन, गायनेकोलॉजी और पीडियाट्रिक्स जैसे प्रमुख विषयों में।
- 🔹 मेडिकल छात्रों को राज्य में ही उन्नत शिक्षा के अवसर — अब कम छात्रों को बाहर जाना पड़ेगा।
- 🔹 ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बल — मेडिकल कॉलेजों से जुड़े जिला अस्पतालों में विशेषज्ञों की तैनाती आसान होगी।
- 🔹 राज्य की स्वास्थ्य रैंकिंग में सुधार — राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की मेडिकल एजुकेशन प्रणाली को नई पहचान मिलेगी।
“एक बड़ी छलांग”
छत्तीसगढ़ जैसे विकासशील राज्य के लिए 61 नई पीजी सीटों की स्वीकृति केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि यह मानव संसाधन निवेश का प्रतीक है। यह फैसला राज्य में चिकित्सा शिक्षा को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा।



