मो इसराइल बबलू
सेकेंडरी एब्डोमिनल प्रेग्नेंसी की सफल डिलीवरी — माँ और शिशु दोनों सुरक्षित, एंजियोप्लास्टी के बाद पूर्ण अवधि तक गर्भ ठहरने का यह विश्व का पहला मामला
रायपुर | 16 अक्टूबर 2025
डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल, रायपुर के चिकित्सकों ने चिकित्सा जगत में इतिहास रच दिया है। उन्होंने एक अत्यंत दुर्लभ “सेकेंडरी एब्डोमिनल प्रेग्नेंसी” (Secondary Abdominal Pregnancy) का सफल ऑपरेशन किया, जिसमें भ्रूण गर्भाशय में न ठहरकर महिला के पेट के अंदर विकसित हुआ था।
चिकित्सकों के अनुसार, यह मध्य भारत का पहला और विश्व के अत्यंत दुर्लभ मामलों में से एक है, जहां गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान इमर्जेंसी एंजियोप्लास्टी कर जीवनदान देने के बाद उसी महिला के पेट में विकसित हुए नौ माह के जीवित शिशु को सुरक्षित जन्म दिया गया।
“जीवनदान की दो कहानियाँ — एक ही माँ के नाम”
यह मामला 40 वर्षीय महिला का है, जो गर्भावस्था के चौथे महीने में हार्ट अटैक के बाद अम्बेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट में इमर्जेंसी एंजियोप्लास्टी के लिए भर्ती हुई थी।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने कार्डियोलॉजी टीम के साथ समन्वय करते हुए प्रक्रिया को सफल बनाया।
डॉक्टरों के मुताबिक, यह गर्भावस्था के दौरान एंजियोप्लास्टी किए जाने का पहला मामला था।
महिला को खून पतला करने की दवाओं पर रखा गया, फिर भी गर्भ सुरक्षित रहा। नौ माह बाद जब वह पुनः अस्पताल पहुँची, तो स्त्री रोग विभाग की टीम ने पाया कि भ्रूण गर्भाशय में नहीं, बल्कि एब्डोमिनल कैविटी में विकसित हो चुका है — और आंवल (प्लेसेंटा) कई अंगों से जुड़ी थी।
ऑपरेशन की जटिलता और डॉक्टरों का समर्पण
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रमुख डॉ. ज्योति जायसवाल और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रुचि किशोर गुप्ता के नेतृत्व में
गायनी, कार्डियोलॉजी, सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने लगभग चार घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन में माँ और शिशु दोनों की जान बचाई।
ऑपरेशन के दौरान भारी रक्तस्राव की संभावना को देखते हुए डॉक्टरों ने अत्यंत सावधानीपूर्वक प्लेसेंटा हटाया और जीवनरक्षक हस्तक्षेप किए।
शिशु जीवित पैदा हुआ और माँ पूर्णत: स्वस्थ है।
“प्रेशियस चाइल्ड” — मातृत्व का पुनर्जन्म
डॉ. रुचि किशोर गुप्ता बताती हैं —
“महिला की पहले एक संतान थी, जो डाउन सिंड्रोम और हृदय रोग से ग्रस्त थी और असमय निधन हो गया था। इसलिए यह शिशु उसके लिए ‘प्रेशियस चाइल्ड’ है। मातृत्व सुख का यह पुनः अनुभव उसे जीवन का नया अर्थ दे गया।”
महिला और शिशु दोनों की स्थिति अब सामान्य है। अस्पताल ने उन्हें एक महीने तक पोस्ट-ऑपरेटिव फॉलोअप पर रखा।
क्या है सेकेंडरी एब्डोमिनल प्रेग्नेंसी?
सेकेंडरी एब्डोमिनल प्रेग्नेंसी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का एक दुर्लभ प्रकार है, जिसमें भ्रूण प्रारंभ में गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब में ठहरता है और फिर पेट के अंदर किसी अंग (जैसे आंत, लिवर, स्प्लीन या ओमेंटम) पर जाकर विकसित होने लगता है।
इसमें माँ के लिए जानलेवा रक्तस्राव और अंग क्षति का खतरा रहता है। विश्व स्तर पर इसके जीवित जन्म के मामले अत्यंत विरले हैं।
डॉक्टरों की टीम
इस ऐतिहासिक ऑपरेशन में शामिल रहे —
- डॉ. ज्योति जायसवाल, प्रोफेसर एवं एचओडी (स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग)
- डॉ. रुचि किशोर गुप्ता, स्त्री रोग विशेषज्ञ
- डॉ. सुमा एक्का, डॉ. नीलम सिंह, डॉ. रुमी
- डॉ. अमित अग्रवाल, जनरल सर्जरी
- डॉ. शशांक एवं डॉ. अमृता, एनेस्थीसिया विभाग
ऑपरेशन के बाद कार्डियोलॉजी और मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों ने भी फॉलोअप में योगदान दिया।
संस्थान और शासन की सराहना
पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी और अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने इस उपलब्धि को संस्थान की टीम भावना और चिकित्सकीय कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा —
“यह सफलता छत्तीसगढ़ की चिकित्सा क्षमता और मानवीय संवेदना की मिसाल है। डॉक्टरों की टीम ने समर्पण, सहयोग और करुणा के जो मानक स्थापित किए हैं, वे आने वाले समय में संस्थान की पहचान बनेंगे।”
“माँ बनी तो विज्ञान भी नतमस्तक हुआ”
- गर्भावस्था के दौरान एंजियोप्लास्टी + सेकेंडरी एब्डोमिनल प्रेग्नेंसी डिलीवरी — विश्व का पहला केस
- भ्रूण नौ माह तक पेट में विकसित — जीवित शिशु जन्म
- डॉक्टरों की 4 विभागों की संयुक्त टीम
- माँ और शिशु दोनों पूर्णत: स्वस्थ
- केस को अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित करने की तैयारी



