मो इसराइल बबलू
दवा वितरण से लेकर ऑपरेशन थिएटर तक सभी व्यवस्थाओं की ली बारीकी से जानकारी, निर्माण कार्य में गति लाने के दिए निर्देश
बिलासपुर, 16 अक्टूबर 2025।
राज्य के प्रमुख चिकित्सा संस्थान सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) बिलासपुर में गुरुवार सुबह चिकित्सा शिक्षा विभाग के डायरेक्टर डॉ. यू. श. पैकरा ने बिना पूर्व सूचना के आकस्मिक निरीक्षण किया।
सुबह 10:00 बजे पहुंचे डायरेक्टर ने अस्पताल परिसर में मरीजों को दी जा रही चिकित्सा एवं सहूलियतों का स्थलीय जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने संस्थान की कई प्रमुख व्यवस्थाओं — निःशुल्क दवा वितरण, आपातकालीन विभाग, आयुष्मान शाखा, डायलिसिस यूनिट, मेडिकल वार्ड, और निर्माणाधीन कैजुअल्टी वार्ड — की विस्तृत समीक्षा की।




🔹 निःशुल्क दवा वितरण कक्ष
डॉ. पैकरा ने मरीजों को दी जा रही मुफ़्त दवाओं की उपलब्धता और वितरण प्रक्रिया का जायजा लिया। उन्होंने दवा वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने और स्टॉक रजिस्टर के नियमित अपडेट की बात कही।
🔹 व्हीलचेयर एवं स्ट्रेचर सुविधा
आपातकालीन विभाग के सामने मरीजों के लिए रखी गई व्हीलचेयर और स्ट्रेचर की स्थिति देखी। उन्होंने मरीजों की सुविधा को प्राथमिकता में रखने पर बल दिया।
🔹 आपातकालीन एवं ट्रायज वार्ड
यहां भर्ती मरीजों से बातचीत कर उपचार और स्टाफ की तत्परता की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि मरीजों को त्वरित चिकित्सकीय सहायता मिलना सिम्स की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
🔹 पंजीयन कक्ष एवं ABHA एप
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए उन्होंने ऑनलाइन एबीएचए एप (ABHA App) के उपयोग और रजिस्ट्रेशन में लगने वाले समय पर फीडबैक लिया।
🔹 आयुष्मान शाखा
आयुष्मान कार्डधारी मरीजों की सुविधा का अवलोकन करते हुए उन्होंने योजना के तहत भर्ती मरीजों को समय पर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
🔹 निर्माणाधीन कैजुअल्टी वार्ड
डायरेक्टर ने निर्माण स्थल का निरीक्षण करते हुए निर्माण एजेंसी को निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
🔹 मेडिकल वार्ड, डायलिसिस यूनिट एवं परिजन शेड
यहां स्वच्छता, उपकरणों की कार्यस्थिति और परिजन शेड की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
🔹 ऑपरेशन थिएटर
ऑपरेशन थिएटर की सफाई, उपकरणों की कार्यक्षमता और संक्रमण नियंत्रण उपायों की जांच की।
निरीक्षण के दौरान सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, वरिष्ठ चिकित्सक और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
डायरेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों को मरीज सेवा में मानवीय संवेदना और दक्षता दोनों बनाए रखने के निर्देश दिए।
“मरीजों को समय पर इलाज और सम्मानजनक व्यवहार मिलना सबसे बड़ी चिकित्सा सेवा है।”
— डॉ. यू. श. पैकरा,
डायरेक्टर, चिकित्सा शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़



