गंभीर संक्रमण के इलाज के लिए वन मंत्री के निर्देश पर विशेष व्यवस्था, डॉक्टरों की टीम के साथ रवाना
रायपुर। नंदनवन चिड़ियाघर की आकर्षण बनी बाघिन ‘बिजली’ अब रायपुर में नहीं रहेगी। करीब दो महीने से बीमार चल रही ‘बिजली’ को बेहतर इलाज के लिए सोमवार को गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर (GZRRRC) भेजा गया है। यह वही वंतारा है, जहां देशभर के कई दुर्लभ और घायल वन्यजीवों का उन्नत उपचार होता है।


बाघिन ‘बिजली’ के इलाज के लिए यह कदम वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर उठाया गया। वन विभाग के मुताबिक, अगस्त 2025 से उसकी तबीयत बिगड़ रही थी। दस्त और भूख कम लगने जैसी सामान्य लक्षणों से शुरू हुआ संक्रमण बाद में गंभीर हो गया। जांच में उसके गुर्दे और गर्भाशय में संक्रमण (पायोमीट्रा) पाया गया — जो बड़ी बिल्लियों में जानलेवा स्थिति मानी जाती है।
नंदनवन के मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पांडे ने बताया कि जामनगर से विशेषज्ञ टीम रायपुर बुलाई गई थी, जिसने दस दिन तक उसका उपचार किया। सुधार नहीं होने पर उसे आगे के इलाज के लिए जामनगर शिफ्ट करने का फैसला किया गया। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) से अनुमति मिलने के बाद ‘बिजली’ को सोमवार को विशेष ट्रेन से रवाना किया गया। पूरे सफर के दौरान पशु चिकित्सकों और विशेषज्ञों की एक टीम उसकी देखरेख करेगी।
‘बिजली’ नंदनवन की सबसे चहेती बाघिनों में से एक रही है। वर्ष 2017 में जन्मी इस बाघिन ने 2023 में चार शावकों— तीन नर (पंचमुख, केशरी और मृगराज) और एक मादा (इंद्रावती)—को जन्म दिया था। अपनी फुर्ती और रॉयल अंदाज़ के कारण वह नंदनवन आने वाले पर्यटकों की पहली पसंद रही है।
“बिजली” की कहानी
- जन्म : वर्ष 2017, नंदनवन रायपुर
- बच्चे : 4 (तीन नर, एक मादा)
- बीमारी : पाचन समस्या से शुरू होकर पायोमीट्रा संक्रमण
- इलाज : पहले रायपुर में 10 दिन, अब जामनगर वंतारा में
- कारण : उन्नत चिकित्सा की आवश्यकता
विशेषज्ञ बोले:
“बिजली की स्थिति नियंत्रण में है लेकिन उसे लंबे उपचार और अत्याधुनिक सुविधाओं की जरूरत है। वंतारा में यह संभव है।”
— अरुण कुमार पांडे, मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी), रायपुर



