मो इसराइल बबलू
कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल का मामला — ट्रेनी डॉक्टर बोली, ‘जांच के बहाने की शर्मनाक हरकत’; डीन ने जांच कमेटी गठित की, ASP बोले- धारा 354 के तहत केस दर्ज
कोरबा।
जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आयुष विंग के आयुर्वेद विभाग में तैनात सीनियर डॉक्टर ए.के. मिश्रा पर एक ट्रेनी डॉक्टर ने छेड़छाड़ का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता ने सिविल लाइन थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने धारा 354 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है, वहीं अस्पताल प्रशासन ने भी आंतरिक निवारण समिति (Internal Complaint Committee) के जरिए departmental जांच शुरू करने की बात कही है।

जानकारी के मुताबिक, आयुर्वेद विभाग में तैनात डॉक्टर ए.के. मिश्रा के अधीन एक ट्रेनी डॉक्टर बीते तीन माह से प्रैक्टिकल ट्रेनिंग कर रही थी। दो दिन पहले दोपहर के समय विभाग में डॉक्टर मिश्रा, ट्रेनी डॉक्टर और एक अन्य स्टाफ मौजूद थे।पीड़िता के अनुसार, डॉक्टर मिश्रा ने उसे अपने स्टाफ रूम में बुलाकर कहा — “आपकी तबीयत ठीक नहीं लग रही, मैं आपका चेकअप कर देता हूं”। ट्रेनी डॉक्टर ने पहले इनकार किया, लेकिन डॉक्टर ने जबरदस्ती “जांच” के बहाने अनुचित हरकतें शुरू कर दीं।घबराई हुई ट्रेनी डॉक्टर किसी तरह कमरे से बाहर निकली और सीधे अपने विभागीय वरिष्ठ अधिकारी डीन डॉ. के.के. सहारे को लिखित शिकायत दी।
परिजनों ने दर्ज कराई पुलिस रिपोर्ट
ट्रेनी डॉक्टर ने घटना की जानकारी फोन पर अपने परिजनों को दी। अगले दिन परिजन कोरबा पहुंचे और सिविल लाइन थाना जाकर पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है।
पुलिस की कार्रवाई
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) नीतिश ठाकुर ने बताया —
“पीड़िता की शिकायत पर डॉक्टर ए.के. मिश्रा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला से छेड़छाड़) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है और आवश्यक साक्ष्य संकलित किए जा रहे हैं।”
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया
डीन डॉ. के.के. सहारे ने कहा —
“हमें शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की आंतरिक निवारण समिति (Internal Complaint Committee) से जांच कराई जाएगी। दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
🔸 विभाग में मचा हड़कंप
इस घटना के बाद मेडिकल कॉलेज के शिक्षकों और विद्यार्थियों में भारी आक्रोश और आंतरिक असहजता फैल गई है। ट्रेनी डॉक्टरों के बीच सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कई छात्राओं ने बताया कि कॉलेज प्रशासन को महिला सुरक्षा से जुड़े मानक उपाय (CCTV निगरानी, महिला शिकायत प्रकोष्ठ की सक्रियता) तुरंत लागू करने चाहिए।
🔸 महिला सुरक्षा और जिम्मेदारी
यह मामला एक बार फिर चिकित्सा संस्थानों में महिला प्रशिक्षुओं की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है। कॉलेज के अंदर वरिष्ठ डॉक्टरों पर ऐसे आरोप न केवल संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी पर भी प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
कानूनी पक्ष
- धारा 354 IPC: किसी महिला के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संपर्क या छेड़छाड़ करने पर 1 वर्ष से 5 वर्ष तक की सजा और जुर्माना का प्रावधान।
- महिला उत्पीड़न अधिनियम 2013: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों में “आंतरिक शिकायत समिति” गठित करना अनिवार्य।
जांच में शामिल प्रमुख अधिकारी
- ASP नीतिश ठाकुर – पुलिस जांच की निगरानी।
- डीन डॉ. के.के. सहारे – विभागीय जांच समिति गठन।
- आंतरिक निवारण समिति – ट्रेनी और आरोपी डॉक्टर के बयान दर्ज कर रही है।
ट्रेनी डॉक्टरों की मांग
- महिला सुरक्षा कक्ष स्थापित किया जाए
- विभागों में CCTV कवरेज बढ़ाई जाए
- शिकायत निवारण समिति को सक्रिय किया जाए
छत्तीसगढ़ के अन्य मेडिकल कॉलेजों में ऐसे ही विवाद
(हाल के वर्षों में चिकित्सकीय संस्थानों में महिला प्रशिक्षुओं के साथ अनुचित व्यवहार के कई मामले सामने आए हैं — पढ़िए कुछ प्रमुख घटनाएँ)
🔹 रायपुर एम्स (AIIMS Raipur), 2024
एक सीनियर रेज़िडेंट डॉक्टर पर महिला इंटर्न ने “फिजिकल एडवांस” और धमकी देने का आरोप लगाया था। मामला आंतरिक शिकायत समिति तक पहुँचा, जहां आरोपी डॉक्टर को निलंबित किया गया था।
🔹 राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज, 2023
यहाँ की नर्सिंग ट्रेनी ने एक प्रोफेसर पर क्लास के बाद बुलाकर छेड़छाड़ करने की शिकायत की थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को अस्थायी रूप से निलंबित किया।
🔹 अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज, 2022
एक लेडी डॉक्टर ने अपने विभागाध्यक्ष पर “निजी बातचीत और अनुचित टिप्पणियों” का आरोप लगाया। आंतरिक जांच समिति ने डॉक्टर को चेतावनी दी थी और पीड़िता को विभाग बदलकर राहत दी गई थी।
🔹 जगदलपुर मेडिकल कॉलेज, 2021
प्रयोगशाला की महिला कर्मचारी ने एक सीनियर टेक्नीशियन पर बार-बार अभद्र व्यवहार की शिकायत की थी। जांच में दोषी पाए जाने पर आरोपी को सेवा से निलंबित कर दिया गया था।
🔹 बिलासपुर सिम्स (Sims Bilaspur), 2020
एक इंटर्न डॉक्टर ने बताया था कि हॉस्टल सुपरवाइजर रात में बार-बार उसके कमरे के पास घूमता था और मानसिक रूप से परेशान करता था। शिकायत पर तत्काल सुपरवाइजर को हटा दिया गया था।
विशेषज्ञों की राय
“ऐसे मामलों में संस्थान प्रमुखों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे आंतरिक निवारण समितियों को सक्रिय और स्वतंत्र रूप से कार्य करने दें, ताकि पीड़ितों को तुरंत न्याय मिले।”
— डॉ. संदीप वर्मा, समाजशास्त्री एवं जेंडर स्टडी एक्सपर्ट, रायपुर विश्वविद्यालय
राज्य स्तर पर आंकड़े (2020-2025)
- कार्यस्थल यौन उत्पीड़न से जुड़े 47 से अधिक मामले दर्ज।
- इनमें से 15 घटनाएं चिकित्सा संस्थानों या हॉस्पिटल परिसरों में हुईं।
- 9 मामलों में कार्रवाई लंबित, जबकि 6 में दोषसिद्धि हुई।



