मो इसराइल बबलू
छह महीने बाद बुलाई गई सामान्य सभा आज — 37 एजेंडे में सियासी शोर सबसे ऊँचा, शहर की बदइंतजामी पर विपक्ष का पलटवार तय
बिलासपुर, 5 अक्टूबर।
Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर। नगर निगम बिलासपुर की सामान्य सभा सोमवार 6 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे पं. देवकीनंदन दीक्षित सभागृह में आयोजित होगी। छह महीने बाद होने वाली इस बैठक में राजनीतिक टकराव और हंगामे की पूरी संभावना है। विपक्ष ने नगर निगम प्रशासन को शहर की जर्जर सड़कों, कचरे के ढेर, नाले-नालियों की दुर्दशा और पानी की किल्लत को लेकर घेरने की पूरी तैयारी कर ली है।
नगर निगम प्रशासन ने बैठक के लिए 37 सूत्रीय एजेंडा जारी किया है, लेकिन विपक्षी पार्षदों का कहना है कि एजेंडा तो “कागज़ की खानापूर्ति” है, शहर की ज़मीन पर न तो सड़कें सुधरीं, न रोशनी आई, न सफाई बदली।
एजेंडा में 27 प्रस्ताव अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग के प्रमाण पत्र से संबंधित हैं। जबकि शहर की मूलभूत समस्याओं — सड़क, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट, कचरा उठाव और निर्माण कार्यों — पर कोई ठोस चर्चा तय नहीं है।
पार्षदों ने आरोप लगाया है कि “विकास कार्यों की रफ्तार ठप है, सड़कों में गड्ढे हैं, सफाई व्यवस्था बदहाल है और निगम का फोकस जनता से ज़्यादा राजनीतिक दिखावे पर है।”
“हर बार निगम प्रशासन बहाने गिनाता है, पर न सड़क बनती है, न कचरा हटता है। जनता पूछ रही है—टेंडर मंज़ूर होते हैं, काम कब होगा?”
— विपक्षी पार्षद (बैठक पूर्व बयान)
राजनीति बनाम प्रशासन
सामान्य सभा को लेकर सत्ताधारी भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में हलचल तेज़ है।
भाजपा पार्षदों का कहना है कि नगर निगम “राज्य सरकार के सहयोग से शहर को बदलने का दावा तो करता है, लेकिन हकीकत में सड़कें दलदल बन चुकी हैं।”
वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि “मेयर इन काउंसिल” की बैठकों में लिए गए प्रस्ताव धरातल पर नहीं उतर रहे।
छह महीने में पहली बार बुलाए गए इस सत्र को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि नियम के मुताबिक दो माह में बैठक होनी चाहिए, पर निगम प्रशासन ने इसे आधे साल बाद बुलाया, जिससे शहर के कई जरूरी विकास प्रस्ताव ठंडे बस्ते में पड़े रहे।
एजेंडा में शामिल प्रमुख मुद्दे
- अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी प्रमाण पत्र से जुड़े 27 प्रस्ताव
- छह स्थानों के नामकरण का प्रस्ताव
- जीएसटी में राहत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद प्रस्ताव
- टेंडर मंज़ूरी और विकास कार्यों की स्वीकृति से जुड़े प्रस्ताव
पार्षद निधि डबल करने का प्रस्ताव
नगर निगम की मेयर इन काउंसिल बैठक में सदस्य विजय ताम्रकार ने पार्षद निधि को 6 लाख से बढ़ाकर 12 लाख रुपए करने का प्रस्ताव रखा है।
यह प्रस्ताव सामान्य सभा में पेश होगा।
यदि पारित हुआ तो इसे शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
पार्षदों का कहना है कि शहर के हालात देखते हुए विकास कार्यों के लिए निधि दोगुनी करना समय की जरूरत है, जबकि विपक्ष ने इस पर “फंड बढ़ाओ नहीं, काम बढ़ाओ” का तंज कसा।
1: शहर की स्थिति — बदहाली की तस्वीर
- सड़कें: शहर की प्रमुख सड़कें गड्ढों में तब्दील, कई वार्डों में निर्माण रुका पड़ा।
- सफाई: ठेका कंपनी और निगम कर्मचारियों के बीच समन्वय शून्य, जगह-जगह कचरे के ढेर।
- स्ट्रीट लाइट: अंधेरे में डूबे वार्ड, मेंटेनेंस के नाम पर खानापूर्ति।
- पानी आपूर्ति: रोजाना शिकायतें, कई वार्डों में टैंकरों पर निर्भरता।
- नाली व्यवस्था: बारिश के बाद भी जलभराव की समस्या बनी हुई है।
“निगम की लापरवाही से शहर दम तोड़ रहा है, सभागार में भाषण होंगे लेकिन सड़कों पर सन्नाटा रहेगा।” — नागरिक संघ प्रतिनिधि
2: निगम राजनीति का समीकरण
- भाजपा के सत्ताधारी पार्षदों पर “जनता से कटे” होने के आरोप।
- विपक्ष कांग्रेस पार्षद शहर की व्यवस्था पर हमलावर, पर सत्ता पक्ष “प्रशासनिक बाधा” का बहाना दे रहा।
- दोनों दलों ने अपने-अपने पार्षदों की रणनीति बैठकें कीं — सोमवार की सभा राजनीतिक टकराव का मंच बनने जा रही है।
- विपक्ष का इरादा—प्रश्नकाल में बिजली, सफाई, सड़क और जल संकट पर निगम प्रशासन को कठघरे में खड़ा करना।
समस्या ही समस्या
छह महीने बाद होने वाली सामान्य सभा सिर्फ एजेंडा पारित करने की बैठक नहीं, बल्कि शहर की दुर्दशा का आईना बनने वाली है।
जनता की उम्मीदें हैं कि इस बार नेता भाषणों के बजाय धरातल पर जवाब देंगे — क्योंकि बिलासपुर की सड़कें, नालियां और बिजली व्यवस्था अब सिर्फ सवाल नहीं, शर्म का विषय बन चुकी हैं।



