Latest news

हाई कोर्ट की रजत जयंती में गूंजा संदेश न्याय जनता का सर्वोच्च अधिकार

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
4 Min Read

Mohammed israil


छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की रजत जयंती: संविधान का प्रहरी, न्याय का भरोसा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर लिए। रजत जयंती समारोह शुक्रवार को ऐतिहासिक अंदाज़ में मनाया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, सुप्रीम कोर्ट के जज जे.के. माहेश्वरी सहित देशभर की न्यायपालिका और राजनीति से जुड़े दिग्गज शामिल हुए। इस मौके पर नेताओं और जजों ने न सिर्फ हाईकोर्ट की गौरवशाली यात्रा को याद किया बल्कि न्यायपालिका की चुनौतियों और आगे की दिशा पर भी जोर दिया।

राज्यपाल रमेन डेका का संदेश

राज्यपाल ने हाईकोर्ट को “संविधान का व्याख्याकार, नागरिक अधिकारों का संरक्षक और न्याय का प्रहरी” बताते हुए कहा कि न्याय केवल ताकतवरों के लिए नहीं बल्कि गांव-गरीब और अंतिम पायदान के व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए।
उन्होंने लोक अदालतों के जरिए लंबित मामलों के त्वरित निपटारे की सराहना की और कहा कि यही असली न्यायपालिका की सफलता है।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बयान

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिलासपुर की पहचान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से जुड़ी हुई है। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि उनकी दूरदृष्टि से ही राज्य और हाईकोर्ट का जन्म संभव हुआ।
साय ने दावा किया कि राज्य सरकार “किसी भी हालत में समय पर न्याय उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध है”। इसके लिए विधि विभाग का बजट पिछले दो सालों में 54% बढ़ाया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने वर्चुअल कोर्ट, लाइव स्ट्रीमिंग और डिजिटल रिकॉर्ड रूम जैसी तकनीकी पहल कर न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाई है।


सुप्रीम कोर्ट जज जे.के. माहेश्वरी का विजन

जस्टिस माहेश्वरी ने कहा – “आम आदमी कोर्ट के दरवाजे पर विश्वास लेकर आता है। इस विश्वास को कायम रखना ही न्यायपालिका का सर्वोच्च उद्देश्य है।”
उन्होंने न्यायाधीशों, वकीलों और लॉ छात्रों से अगले 25 सालों के लिए विजन तैयार करने की अपील की।


केंद्रीय मंत्री तोखन साहू का संबोधन

साहू ने कहा कि हाईकोर्ट ने “पारदर्शिता और तकनीक को क्रांति की तरह अपनाया है” और 25 सालों में यह संस्था आम जनता तक न्याय की पहुंच आसान बनाने में सफल रही है।


मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा का स्वागत भाषण

उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में न्यायालय ने विधि शासन की स्थापना और समाज में न्याय का भरोसा मजबूत किया है।


कार्यक्रम की झलक

समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अतिथियों का स्मृति चिन्ह और पौधा भेंटकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर रजत जयंती स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
समारोह के अंत में जस्टिस संजय के अग्रवाल ने आभार व्यक्त किया।


1: गौरव के 25 साल

  • हाईकोर्ट की स्थापना: 1 नवम्बर 2000
  • पहले मुख्य न्यायाधीश: जस्टिस डब्ल्यू.ए. शिशक
  • सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे न्यायाधीश: ए.एम. खानविलकर, नवीन सिन्हा, अशोक भूषण, भूपेश गुप्ता, प्रशांत कुमार मिश्रा
  • अहम फैसले: आदिवासी अधिकार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय

2: तकनीकी नवाचार

  • वर्चुअल कोर्ट और लाइव स्ट्रीमिंग
  • डिजिटल रिकॉर्ड रूम
  • आधार आधारित सर्च सिस्टम
  • न्यायिक प्रशिक्षण के नए मॉड्यूल

3: समारोह में शामिल दिग्गज

  • राज्यपाल: रमेन डेका
  • मुख्यमंत्री: विष्णुदेव साय
  • केंद्रीय मंत्री: तोखन साहू
  • उपमुख्यमंत्री: अरुण साव, विजय शर्मा
  • वित्त मंत्री: ओपी चौधरी
  • विधि मंत्री: गजेन्द्र यादव
  • सुप्रीम कोर्ट जज: जे.के. माहेश्वरी, प्रशांत कुमार मिश्रा
  • अन्य अतिथि: रमेश बैस (पूर्व राज्यपाल), अमिताभ जैन (मुख्य सचिव), अरूणदेव गौतम (डीजीपी), चंदेल (बार एसोसिएशन अध्यक्ष)

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।