Mohammed israil
बिलासपुर, 14 सितंबर 2025**: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में मानव तस्करी का एक काला कारनामा उजागर हुआ है, जहां नाबालिग बालिकाओं को बहला-फुसलाकर वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेलने वाला गिरोह सरकंडा पुलिस के हत्थे चढ़ गया। एक मां की गुहार पर शुरू हुई जांच ने न केवल एक मासूम लड़की को बचा लिया, बल्कि पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। आरोपी महिला कालिका तिवारी, उसके साथी विकास उर्फ विक्की भोजवानी और दो अन्य नाबालिग लड़कियां गिरफ्त में हैं।


घटना का पूरा विवरण: घरेलू झगड़े से शुरू हुई दर्दनाक साजिश यह मामला 8 अगस्त 2025 को तब शुरू हुआ जब बिलासपुर की एक महिला ने सरकंडा थाने में अपनी नाबालिग बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। पीड़िता, जो कक्षा 9वीं तक पढ़ाई कर चुकी थी और घर पर ही रहती थी, घरेलू विवाद के कारण नाराज होकर बिना बताए चली गई। आसपास की तलाशी लेने के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिला, जिस पर अपहरण का संदेह जताते हुए अपराध क्रमांक 1072/2025 दर्ज किया गया। धारा 137(2) (व्यभिचार), 98 (अवैध संबंध), 64(m) (बलात्कार), और 3(5) BNS (मानव तस्करी) के तहत केस पंजीकृत हुआ। पुलिस की गहन विवेचना के दौरान नाबालिग पीड़िता को दबोच लिया गया। पूछताछ में उसने दिल दहला देने वाली कहानी बयां की। घर से निकलने के बाद वह अपनी नाबालिग सहेली के घर पहुंची। वहां सहेली और उसके परिजनों ने उसे बहलाया-फुसलाया और अपने पास रख लिया। फिर, उसे रायगढ़ ले जाकर एक कमरे में कैद कर दिया गया। वहां जबरन शराब पिलाई जाती थी और अलग-अलग पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था। विरोध पर धमकियां दी जातीं, मारपीट होती और यातनाएं सहनी पड़तीं। पीड़िता ने खुलासा किया कि इस सारे धंधे में उसकी सहेली, सहेली की मां कालिका तिवारी और मुख्य आरोपी विकास उर्फ विक्की भोजवानी शामिल थे। पूछताछ में सभी आरोपियों ने अपना अपराध कबूल कर लिया। विक्की भोजवानी के खिलाफ पहले भी पिटा एक्ट (नागरिक सुरक्षा अधिनियम) के तहत कार्रवाई हो चुकी है, जो उसके आपराधिक इतिहास को उजागर करता है। पुलिस ने फौरन एक्शन लेते हुए कालिका तिवारी (32 वर्ष, निवासी श्यामनगर लिंगियाडीह, सरकंडा), विकास उर्फ विक्की भोजवानी (40 वर्ष, निवासी मसानगंज, सिविल लाइन), और दो विधि से संघर्षरत नाबालिग बालिकाओं को गिरफ्तार कर लिया। सभी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से रिमांड मिलने की संभावना है। पीड़िता को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और उसके परिवार को सहायता प्रदान की जा रही है। यह गिरोह नाबालिगों को निशाना बनाकर न केवल उनकी मासूमियत का शोषण कर रहा था, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग को बर्बाद करने की साजिश रच रहा था। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
#### आरोपी प्रोफाइल | आरोपी का नाम | उम्र | पता | विशेष जानकारी | |————–|——|——|—————| |
कालिका तिवारी | 32 वर्ष | श्यामनगर लिंगियाडीह, थाना सरकंडा, बिलासपुर | पीड़िता की सहेली की मां; गिरोह की मुख्य सूत्रधार, बहलाने-फुसलाने में माहिर। | | विकास उर्फ विक्की भोजवानी | 40 वर्ष | मसानगंज, थाना सिविल लाइन, बिलासपुर | मुख्य आरोपी; पूर्व में पिटा एक्ट के तहत कार्रवाई, पुरुष ग्राहकों का संपर्क व्यक्ति। | | दो नाबालिग बालिकाएं | – | – | विधि से संघर्षरत; गिरोह में जबरन शामिल, अब सुधार गृह भेजी गईं। |
#### कानूनी पहलू: नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर सख्ती – भारत के प्रमुख कानून इस मामले में दर्ज धाराओं के अलावा, भारत में नाबालिगों की तस्करी और वेश्यावृत्ति से जुड़े अपराधों पर सख्त कानून हैं, जो बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। मुख्य कानून निम्नलिखित हैं: – **भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023**: यह IPC की जगह ले चुका है। – धारा 137(2): व्यभिचार (adultery) से जुड़ी, अवैध संबंधों पर सजा। – धारा 98: अवैध यौन संबंध (illicit intercourse) को परिभाषित करता है, जो व्यभिचार या जबरन संबंधों को कवर करता है। सजा: 5 वर्ष तक कैद और जुर्माना। – धारा 64(m): बलात्कार (rape) के विभिन्न रूपों में से एक, विशेष रूप से नाबालिगों पर। सजा: न्यूनतम 10 वर्ष कैद, आजीवन कारावास तक। – धारा 3(5): मानव तस्करी (human trafficking), जिसमें जबरन वेश्यावृत्ति या शोषण शामिल। सजा: 10 वर्ष से आजीवन कारावास। – **POCSO एक्ट, 2012 (बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम)**: 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर यौन शोषण के खिलाफ विशेष कानून। इसमें penetrative sexual assault (धारा 3-4) पर 10-20 वर्ष कैद, aggravated assault (धारा 5-6) पर आजीवन कारावास या मृत्युदंड। वेश्यावृत्ति या trafficking को commercial sexual exploitation माना जाता है। 2019 संशोधन में सजाएं और सख्त की गईं। – **इमोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट, 1956 (ITPA)**: वेश्यावृत्ति और trafficking पर केंद्रित। धारा 5-7: ब्रोthel चलाना या नाबालिग को prostitution में धकेलना। सजा: 7 वर्ष तक कैद। नाबालिगों के लिए POCSO के साथ जोड़ा जाता है। – **जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015**: तस्करी रोकने और बच्चों के पुनर्वास के लिए। धारा 83: बच्चों की भर्ती पर रोक। ये कानून मिलकर न केवल अपराधी को सजा देते हैं, बल्कि पीड़ितों को मुआवजा, चिकित्सा और पुनर्वास प्रदान करते हैं। हालांकि, NCRB डेटा के अनुसार, 2023 में POCSO केसों में 20% वृद्धि हुई, जो कार्यान्वयन की चुनौतियों को दर्शाता है। #### छत्तीसगढ़ पुलिस की सतर्कता: आज तक के प्रमुख मामले – तस्करी के खिलाफ जंग छत्तीसगढ़, खासकर बिलासपुर, भिलाई और रायपुर जैसे जिलों में नाबालिग लड़कियों की तस्करी एक गंभीर समस्या है। राज्य पुलिस ने 2020 से 2025 तक कई बड़े रैकेट्स का भंडाफोड़ किया है। यहां प्रमुख मामले: – **2025: बिहार से 47 नाबालिग छत्तीसगढ़ के बच्चे मुक्त (मार्च)**: रोहतास (बिहार) में ऑपरेशन नटराज के तहत 44 लड़कियां और 3 लड़के (रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर आदि से) एक ऑर्केस्ट्रा ग्रुप से बचाए गए। संदेह: वेश्यावृत्ति में धकेलना। 5 आरोपी गिरफ्तार, जिसमें 3 छत्तीसगढ़ के। पुलिस ने बताया कि ट्राइबल इलाकों से बहलाकर लाए गए थे। – **2025: भिलाई स्पा सेंटर रैकेट (सितंबर)**: सुपेला के गदा चौक होटल ईशा में रात के धाड़ मारकर सेक्स रैकेट पकड़ा। मालिक, मैनेजर और ग्राहक गिरफ्तार। नाबालिगों का शोषण संदिग्ध। बिलासपुर के क्लाउड स्पा में भी 6 युवतियां और मैनेजर पकड़े गए। – **2023-2024: मुंगेली मामला**: एक 17 वर्षीय लड़की को उसके प्रेमी ने वेश्यावृत्ति में धकेला, 10 आरोपी IPC 373, 376 और POCSO के तहत नामजद। एक आरोपी ने आत्महत्या की। बिलासपुर रेंज IG की हस्तक्षेप से FIR दर्ज। – **2022: जशपुर ट्राइबल लड़की का मामला**: एक महिला चंपा बाई ने 17 वर्षीय आदिवासी लड़की को कैद कर वेश्यावृत्ति कराई। IPC 363, 372, 373, 376 के तहत गिरफ्तारी। दो अन्य लड़कियां भी शामिल। – **2020-2021: राजनांदगांव और कोरबा से तस्करी**: ट्राइबल लड़कियों को इलाहाबाद (यूपी) ले जाकर सेक्स स्लेवरी में बेचा। छत्तीसगढ़ पुलिस ने दिल्ली में भी रिंग्स तोड़े, 20 बच्चे बचाए। AHTU (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट) सक्रिय। US स्टेट डिपार्टमेंट की 2024 रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ से नाबालिग लड़कियां (खासकर SC/ST समुदाय से) अन्य राज्यों में तस्करी का शिकार होती हैं। राज्य में AHTU को मजबूत किया गया है, लेकिन bonded labor और trafficking केसों में कमी आई है। NCRB के मुताबिक, 2023 में छत्तीसगढ़ में POCSO केस 15% बढ़े। पुलिस ने 24 वाहन AHTU को दिए, लेकिन चुनौतियां बरकरार हैं। #### विशेष बॉक्स: पीड़ितों के पुनर्वास पर फोकस **पुलिस और NGO की भूमिका**: बचाई गई नाबालिगों को POCSO एक्ट के तहत विशेष कोर्ट में ट्रायल होगा। राज्य महिला आयोग और NCPCR पोर्टल से मुआवजा (₹1-5 लाख) और काउंसलिंग सुनिश्चित। बच्चा बचाओ आंदोलन जैसे NGO रिहैबिलिटेशन में मदद करेंगे। सलाह: माता-पिता सतर्क रहें, संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत रिपोर्ट करें। #### विशेष बॉक्स: राज्य स्तर पर सिफारिशें **क्या करें पुलिस और सरकार?** – AHTU को और मजबूत करें: ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी से ट्रैकिंग। – जागरूकता अभियान: ट्राइबल इलाकों में स्कूलों में वर्कशॉप। – अंतरराज्यीय सहयोग: बिहार, यूपी के साथ MoU बढ़ाएं। – फास्ट-ट्रैक कोर्ट: POCSO केसों का जल्द निपटारा (वर्तमान में 28 केस/वर्ष औसत)। यह घटना समाज को झकझोरती है। छत्तीसगढ़ पुलिस की सतर्कता सराहनीय है, लेकिन तस्करी की जड़ें गहरी हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।



