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सिम्स का ममता भरा दायित्व…मासूम को छोड़ गए माता-पिता, डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ  ने थामा नन्हीं जान का सहारा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil

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बिलासपुर, 13 सितम्बर 2025।छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर से एक संवेदनशील और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां जन्म के कुछ ही दिनों बाद माता-पिता ने अपने नवजात शिशु को अस्पताल में ही छोड़ दिया। परिजनों के त्याग दिए जाने के बाद अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों ने जिम्मेदारी निभाते हुए न सिर्फ उसकी जान बचाई, बल्कि उसकी संपूर्ण देखभाल सुनिश्चित की। अब यह मासूम चाइल्ड लाइन बिलासपुर को सौंप दिया गया है, ताकि उसका भविष्य सुरक्षित रह सके।कहानी की शुरुआत : अस्पताल में जन्म, फिर त्यागशिशु रोग विभाग ने दिया जीवन दानऔपचारिक पुनर्वास प्रक्रियासिम्स अधिष्ठाता की टिप्पणीत्याग की कहानीडॉक्टर और टीम जिन्होंने संभाली मासूम की जिंदगीपुनर्वास प्रक्रिया में रहे मौजूद

बिलासपुर, 13 सितम्बर 2025।छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर से एक संवेदनशील और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां जन्म के कुछ ही दिनों बाद माता-पिता ने अपने नवजात शिशु को अस्पताल में ही छोड़ दिया। परिजनों के त्याग दिए जाने के बाद अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों ने जिम्मेदारी निभाते हुए न सिर्फ उसकी जान बचाई, बल्कि उसकी संपूर्ण देखभाल सुनिश्चित की। अब यह मासूम चाइल्ड लाइन बिलासपुर को सौंप दिया गया है, ताकि उसका भविष्य सुरक्षित रह सके।


कहानी की शुरुआत : अस्पताल में जन्म, फिर त्याग

15 अगस्त 2025 को सिम्स के महिला एवं प्रसूति विभाग में कविता (20 वर्ष) पत्नी ओमप्रकाश, निवासी भरनीपरसदा सकरी को प्रसव हेतु भर्ती किया गया। उसी दिन उसने एक पुत्र को जन्म दिया। अगले ही दिन, 16 अगस्त को प्रसूता को छुट्टी दे दी गई।
परिजन 24 अगस्त तक शिशु को देखने आते रहे, लेकिन 25 अगस्त से अचानक अस्पताल आना बंद कर दिया। जब अस्पताल प्रबंधन ने संपर्क करने का प्रयास किया तो दिए गए मोबाइल नंबर भी गलत पाए गए।


शिशु रोग विभाग ने दिया जीवन दान

शिशु को उसके हाल पर छोड़ देने के बाद उसे सिम्स के शिशु रोग विभाग में भर्ती कराया गया। NICU वार्ड में विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश नाहरेल, डॉ. समीर कुमार जैन, डॉ. सलीम खलखो, डॉ. मीनाक्षी ठाकुर, डॉ. जायकिशोर तथा नर्सिंग स्टाफ विभा श्रीवास, सरोजिनी, कमलेश, मीरा देवांगन और आया भावना सिदार, पुष्पा ने मिलकर दिन-रात उसकी देखभाल की।


औपचारिक पुनर्वास प्रक्रिया

संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक डॉ. लखन सिंह के आदेश पर 11 सितम्बर 2025 से शिशु के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की गई। शनिवार को औपचारिक रूप से उसे चाइल्ड लाइन बिलासपुर को सौंप दिया गया। इस मौके पर चाइल्ड हेल्प लाइन प्रभारी चंद्रशेखर तिवारी, सुपरवाइजर आस्था सिंह और चंद्रप्रकाश श्रीवास, तथा समाजिक कार्यकर्ता विकास साहू (सेवा भारती मातृछाया, बिलासपुर) उपस्थित रहे।


सिम्स अधिष्ठाता की टिप्पणी

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा—
“नवजात को न सिर्फ सुरक्षित उपचार दिया गया, बल्कि संपूर्ण देखभाल भी सुनिश्चित की गई। अब उसके उज्ज्वल भविष्य और पुनर्वास की जिम्मेदारी चाइल्ड लाइन को सौंपी गई है, जहाँ उसका समुचित पालन-पोषण किया जाएगा।”


त्याग की कहानी

  • प्रसव : 15 अगस्त 2025, सिम्स महिला एवं प्रसूति विभाग
  • माता : कविता (20 वर्ष), पति ओमप्रकाश, निवासी भरनीपरसदा सकरी
  • छुट्टी : 16 अगस्त
  • परिजनों का आना बंद : 25 अगस्त से
  • दिए गए मोबाइल नंबर पाए गए गलत

डॉक्टर और टीम जिन्होंने संभाली मासूम की जिंदगी

  • डॉ. राकेश नाहरेल (विभागाध्यक्ष)
  • डॉ. समीर कुमार जैन
  • डॉ. सलीम खलखो
  • डॉ. मीनाक्षी ठाकुर
  • डॉ. जायकिशोर
  • नर्सिंग स्टाफ : विभा श्रीवास, सरोजिनी, कमलेश, मीरा देवांगन
  • आया : भावना सिदार, पुष्पा

पुनर्वास प्रक्रिया में रहे मौजूद

  • डॉ. लखन सिंह – संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक
  • चंद्रशेखर तिवारी – चाइल्ड हेल्प लाइन प्रभारी
  • आस्था सिंह व चंद्रप्रकाश श्रीवास – सुपरवाइजर
  • विकास साहू (सेवा भारती मातृछाया, बिलासपुर) – समाजिक कार्यकर्ता

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