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आंगनबाड़ी केंद्र में मौत का टीका… चार टीका लगा और 24 घंटे में नवजात की जान गई, शव लेकर कलेक्टोरेट का घेराव,  मुआवजे की मांग पर भड़के अफसर

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मोहम्मद इसराइल| बिलासपुर

मंगला के धुरीपारा आंगनबाड़ी केंद्र में टीकाकरण के दौरान हुई गंभीर लापरवाही ने पूरे इलाके में आक्रोश भड़का दिया है। दो माह की मासूम को एक साथ चार टीके लगाए गए और 24 घंटे के भीतर उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजन और ग्रामीण शव लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे, जहां जमकर हंगामा और नारेबाजी हुई। गुस्साए लोगों  ने दोषियों पर कार्रवाई और 6 लाख रुपए मुआवजे की मांग रखी।


टीका लगने के बाद बिगड़ी तबीयत, 24 घंटे में मौत

धुरीपारा निवासी रामेश्वर मरावी की पत्नी ईश्वरी मरावी मंगलवार दोपहर 12 बजे अपनी नवजात को टीकाकरण के लिए आंगनबाड़ी केंद्र लाई थीं। ईश्वरी का आरोप है कि एएनएम विभा बंजारे ने एक साथ चार टीके लगाए। इसके बाद रात में बच्ची की तबीयत बिगड़ गई। पूरी रात वह दर्द से तड़पती रही और बुधवार दोपहर घर में उसकी मौत हो गई।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कन्या पटेल ने बताया कि उस दिन कुल 32 बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण हुआ था। सभी को वही एएनएम टीके लगा रही थी।


शव लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे परिजन, पुलिस से भिड़ंत

नवजात की मौत की खबर फैलते ही दर्जनों ग्रामीण आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे और लापरवाही पर विरोध जताया। इसके बाद परिजन और ग्रामीण शव लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे। आक्रोशित भीड़ ने जमकर नारेबाजी की। महिलाएं ट्रैक्टर भरकर कलेक्टर कार्यालय जाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन पुलिस ने गेट पर ही रोक दिया और चालक को फटकार लगाई।

पूर्व पार्षद श्याम पटेल और बबली खान ने भीड़ का नेतृत्व किया और पीड़ित परिजनों को 6 लाख रुपए मुआवजा दिलाने की मांग की।


स्वास्थ्य विभाग बचाव में

स्वास्थ्य विभाग ने मौत को वैक्सीन से जोड़ने से इंकार किया है।
डॉ. शुभा गरेवाल, सीएमएबओ ने कहा
“धुरीपारा आंगनबाड़ी में 32 बच्चों को टीका लगा था। बाकी बच्चे बिल्कुल ठीक हैं। वैक्सीन मौत की वजह नहीं हो सकती। अगर रिएक्शन होता तो 4-6 घंटे में पता चल जाता। असली वजह पीएम रिपोर्ट से सामने आएगी।”


बच्चों को लगने वाले प्रमुख टीके (भारत सरकार द्वारा)

  • बीसीजी (BCG): जन्म के तुरंत बाद
  • ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV): जन्म से 5 वर्ष तक कई बार
  • हेपेटाइटिस-बी: जन्म के समय और बाद में
  • डीपीटी (DPT): 6, 10, 14 सप्ताह और बूस्टर
  • हिब वैक्सीन: 6, 10, 14 सप्ताह
  • खसरा-रूबेला (MR): 9 माह और 16-24 माह
  • रोटावायरस: 6, 10, 14 सप्ताह
  • पेंटावैलेंट वैक्सीन: (DPT + हिब + हेपेटाइटिस-बी)

राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (भारत) – शेड्यूल

  1. जन्म पर: BCG, OPV, Hepatitis-B
  2. 6, 10, 14 सप्ताह: OPV, DPT, Hib, Hepatitis-B, Rotavirus, Pneumococcal
  3. 9 माह: खसरा-रूबेला (MR), JE (कुछ राज्यों में)
  4. 16-24 माह: MR-2, DPT बूस्टर, OPV बूस्टर, JE
  5. 5-6 वर्ष: DPT बूस्टर-2
  6. 10 व 16 वर्ष: टिटेनस-डिफ्थीरिया

छत्तीसगढ़ में व्यवस्था

  • राज्य में 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए मुफ्त टीकाकरण की सुविधा।
  • शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्र और स्वास्थ्य उपकेंद्र पर टीकाकरण।
  • हर मंगलवार और शनिवार को नियमित टीकाकरण दिवस
  • स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त जिम्मेदारी।

लगातार हो रही लापरवाहियां

  • हाल के महीनों में टीकाकरण को लेकर कई जिलों से लापरवाही की खबरें सामने आईं।
  • कहीं टीकाकरण के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने की शिकायतें, तो कहीं कोल्ड चेन सिस्टम (वैक्सीन को सुरक्षित रखने की व्यवस्था) पर सवाल।
  • ग्रामीण इलाकों में टीकाकरण के बाद निगरानी नहीं होने से स्थिति और खतरनाक बन रही है।
  • स्वास्थ्य विभाग हर बार मौत या बीमारियों को “सिर्फ संयोग” बताकर पल्ला झाड़ लेता है।

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