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सिम्स में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जागरूकता का संकल्प

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil


विद्यार्थियों ने ली शपथ, विशेषज्ञों ने बताया – मानसिक मजबूती ही है आत्महत्या से बचाव का उपाय

बिलासपुर, 10 सितंबर।
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में मंगलवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। सभागार में हुए इस आयोजन में चिकित्सा विशेषज्ञों ने आत्महत्या की प्रवृत्ति को समाज और परिवार के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसके कारणों और बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों को आत्महत्या न करने एवं रोकथाम के लिए सक्रिय प्रयास करने की शपथ भी दिलाई गई।


कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति मौजूद थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. लखन सिंह (चिकित्सा अधीक्षक), डॉ. मधुमित्ता मूर्ति (विभागाध्यक्ष, निश्चेतना), डॉ. राकेश नाहरल (विभागाध्यक्ष, शिशु रोग), डॉ. चन्द्रहास ध्रुव (अधीक्षक, बालक छात्रावास) एवं डॉ. ज्योति पोर्ते (अधीक्षक, बालिका छात्रावास) शामिल हुए।


थीम पर हुआ विचार-विमर्श

इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आत्महत्या रोकथाम दिवस की थीम “आत्महत्या पर वर्णन को बदलना है” निर्धारित की है।
प्रस्तावना उद्बोधन मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुजीत नायक ने दिया। इसके बाद डॉ. गौरीशंकर सिंह और डॉ. राकेश जांगड़े ने Suicide Prevention and Management विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।


अधिष्ठाता का संदेश : अंक नहीं, ज्ञान है असली सफलता

अपने संबोधन में अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि आत्महत्या समाज के लिए अभिशाप है और इसे रोकने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा – “सफलता का आकलन केवल अंकों से नहीं होना चाहिए। असली सफलता अर्जित ज्ञान और आत्मविश्वास में छिपी होती है।” इस दौरान उन्होंने उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों को आत्महत्या रोकथाम की शपथ भी दिलाई।


चिकित्सा अधीक्षक का संबोधन

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने हर परिस्थिति में धैर्य और संयम बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी आत्महत्या की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है। इसलिए सभी को मानसिक मजबूती के साथ आगे बढ़ना चाहिए।


नाटक और प्रस्तुति से दिया संदेश

कार्यक्रम के दौरान मनोरोग विभाग के स्नातकोत्तर चिकित्सकों ने आत्महत्या रोकथाम पर आधारित लघु नाट्य का मंचन किया। वहीं बिलासा नर्सिंग महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने नाट्य प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।


कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुधांशु भट्ट ने किया और अंत में डॉ. सुजीत नायक ने आभार व्यक्त किया। आयोजन को सफल बनाने में मनोरोग विभाग के डॉ. अंकित गुप्ता, डॉ. अंशुल गुप्ता, डॉ. प्रियांश, डॉ. अंकिता, डॉ. सत्यस्मिता, डॉ. तुलेश्वर, डॉ. आयुष, डॉ. अलीश, डॉ. किशन सहित सभी इंटर्न विद्यार्थियों का योगदान रहा।


विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस

  • हर साल 10 सितंबर को मनाया जाता है।
  • उद्देश्य: आत्महत्या के कारणों, बचाव और मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता बढ़ाना।
  • थीम 2025: “आत्महत्या पर वर्णन को बदलना है।”

भारत में स्थिति

  • NCRB रिपोर्ट के अनुसार, हर वर्ष 1.5 लाख से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं।
  • युवाओं और विद्यार्थियों में सबसे अधिक मामले दर्ज।

विशेषज्ञों की सलाह

  • तनाव की स्थिति में परिजन व मित्रों से साझा करें।
  • अकेलेपन से बचें, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
  • बच्चों पर अंक व करियर को लेकर अनावश्यक दबाव न डालें।

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