Mohammed israil
बिलासपुर।रेलवे व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले स्टेशन मास्टर्स ने एक बार फिर अपनी आवाज़ बुलंद कर दी है। रविवार को बिलासपुर के तारबहार स्थित एक निजी भवन में आयोजित ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर संगठन (AISMA) की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की बैठक में देशभर से आए सैकड़ों स्टेशन मास्टर्स ने शिरकत की।इस बैठक की सबसे खास तस्वीर रही—बड़ी संख्या में शामिल हुई महिला स्टेशन मास्टर्स की, जिन्होंने कार्यस्थल पर बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर सख्त नाराज़गी जताई।






महिला स्टेशन मास्टर्स की आपत्तियाँ
- अलग से टॉयलेट व चेंजिंग रूम की माँग
- सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण की जरूरत
- आरओ व स्वच्छ पेयजल की समस्या
- रात की ड्यूटी में सुरक्षा प्रबंधन दुरुस्त करने की अपील
प्रमुख माँगें
- ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली
- ग्रेड पे में 10% की वृद्धि
- स्टेशन मास्टर ऑफिस को AC रूम बनाना
- रात्रिकालीन ड्यूटी पर विशेष भत्ता
- अतिरिक्त स्टेशन मास्टर की नियुक्ति
संगठन का रुख
जोनल सचिव रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा –
“हमारी माँगें पूरी तरह से न्यायसंगत हैं। सोमवार को उच्च अधिकारियों को विस्तृत माँग पत्र सौंपा जाएगा। यदि माँगें अनसुनी रहीं, तो संगठन मजबूरन शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।”
महिला सशक्तिकरण पर नया अध्याय
- पहली बार इतनी बड़ी संख्या में महिला स्टेशन मास्टर्स की भागीदारी
- मंच से बेबाक आवाज़, रेलवे व्यवस्था पर गंभीर सवाल
- आने वाले दिनों में महिला मुद्दे संगठन की रणनीति के केंद्र में रहेंगे
बिलासपुर क्यों खास?
- ज़ोनल मुख्यालय और बड़े रेलवे मंडल का केंद्र
- संगठन की राष्ट्रीय रणनीति के लिए अहम स्थान
- यहाँ से उठी आवाज़ सीधे राष्ट्रीय स्तर पर गूँजती है
➡️ आगे क्या होगा?
- सोमवार को उच्च अधिकारियों को माँग पत्र सौंपा जाएगा
- यदि माँगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन की तैयारी
- आंदोलन से पूरे देश की रेलवे व्यवस्था प्रभावित हो सकती है
👉 यह रिपोर्ट साफ संदेश देती है कि स्टेशन मास्टर्स अब चुप नहीं बैठेंगे। उनकी आवाज़ राष्ट्रीय स्तर तक गूँज चुकी है और अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन की गूंज पूरे देश की रेलवे व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।



