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“वोट चोर–गद्दी छोड़” सभा से बिलासपुर में गरजेगा विपक्ष

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil

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बिलासपुर, 06 सितम्बर।छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा मुद्दा “वोट चोरी” और “लोकतंत्र बचाओ” बन चुका है। इसी कड़ी में 09 सितम्बर को बिलासपुर में आयोजित होने वाली विशाल सभा “वोट चोर – गद्दी छोड़” की तैयारियों को लेकर आज कांग्रेस भवन में अहम बैठक हुई। बैठक में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, सहप्रभारी विजय जांगिड़, राष्ट्रीय सचिव देवेंद्र यादव, प्रशासनिक महामंत्री मलकीत सिंह गेन्दू और जिला प्रभारी सुबोध हरितवाल सहित सैकड़ों नेता–कार्यकर्ता मौजूद रहे।🔹 “बिलासपुर का चयन पायलट  का फैसला”🔹 “400 पार का मतलब था संविधान पर हमला”🔹 विजय जांगिड़ बोले – “किसान का समय, लेकिन आंदोलन भी ज़रूरी”🔹 देवेंद्र यादव का हमला – “भाजपा ने लोकतंत्र की शुचिता खत्म की”🔹 “निर्वाचन आयोग सत्ता का मोहरा बना”🔹 विपक्षी एकजुटता का मंच बनेगा बिलासपुरराजनीतिक महत्वकार्यकर्ताओं को रिचार्ज करना बनी बड़ी चुनौती

बिलासपुर, 06 सितम्बर।छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा मुद्दा “वोट चोरी” और “लोकतंत्र बचाओ” बन चुका है। इसी कड़ी में 09 सितम्बर को बिलासपुर में आयोजित होने वाली विशाल सभा “वोट चोर – गद्दी छोड़” की तैयारियों को लेकर आज कांग्रेस भवन में अहम बैठक हुई। बैठक में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, सहप्रभारी विजय जांगिड़, राष्ट्रीय सचिव देवेंद्र यादव, प्रशासनिक महामंत्री मलकीत सिंह गेन्दू और जिला प्रभारी सुबोध हरितवाल सहित सैकड़ों नेता–कार्यकर्ता मौजूद रहे।

🔹 “बिलासपुर का चयन पायलट  का फैसला”

बैठक को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि बिलासपुर को इस ऐतिहासिक सभा के लिए चुनने का निर्णय कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट ने किया है। “हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाएं। राहुल गांधी जी का दिया नारा ‘वोट चोर–गद्दी छोड़’ हर गली–मोहल्ले तक पहुँचना चाहिए।”

महंत ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों में कांग्रेस 44 सीटों पर बढ़त बनाए हुए थी लेकिन अचानक भाजपा के वोट बढ़ गए। “यह केवल भाजपा का खेल नहीं था, बल्कि निर्वाचन आयोग की भूमिका भी संदिग्ध रही। यह लोकतंत्र पर डाका है,” महंत ने कहा।

🔹 “400 पार का मतलब था संविधान पर हमला”

महंत ने कहा कि राहुल गांधी पहले ही भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा को समझ चुके थे। “400 पार का नारा संविधान बदलने और केंद्रीय एजेंसियों पर एकाधिकार जमाने की साजिश थी। लेकिन राहुल गांधी जी के शब्द ‘डरो मत–मुकाबला करो’ ने पूरे देश की राजनीति की फिज़ा बदल दी है।”

🔹 विजय जांगिड़ बोले – “किसान का समय, लेकिन आंदोलन भी ज़रूरी”

सहप्रभारी विजय जांगिड़ ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “अभी कृषि कार्य का समय है, परंतु आंदोलन भी उतना ही आवश्यक है। बूथ से लेकर ब्लॉक तक की कमेटियां बनी हैं, हर स्तर पर जिम्मेदारी दी जाएगी। जितना भव्य कार्यक्रम होगा, उतना ही संदेश दिल्ली तक जाएगा।”

🔹 देवेंद्र यादव का हमला – “भाजपा ने लोकतंत्र की शुचिता खत्म की”

राष्ट्रीय सचिव एवं विधायक देवेंद्र यादव ने भाजपा पर करारा वार करते हुए कहा, “आज चुनाव परिणामों पर आम जनता का भरोसा ही टूट चुका है। हरियाणा से लेकर पंचायत चुनाव तक में ईवीएम और मतगणना पर गंभीर सवाल उठे हैं। भाजपा ने लोकतंत्र की शुचिता को खत्म कर दिया है, लेकिन राहुल गांधी सड़कों से लेकर संसद तक इस लड़ाई को लड़ रहे हैं।”

🔹 “निर्वाचन आयोग सत्ता का मोहरा बना”

ग्रामीण अध्यक्ष विजय केशरवानी और शहर अध्यक्ष विजय पांडेय ने कहा कि बिहार में 65 लाख मतदाताओं के नाम काट दिए गए, लेकिन एक भी ‘घुसपैठिया’ चिन्हांकित नहीं हुआ। पांडेय ने तंज कसते हुए कहा, “अगर निर्वाचन आयोग पाक-साफ है, तो फार्म 17C को वेबसाइट पर सार्वजनिक क्यों नहीं करता?” उन्होंने चेतावनी दी कि अब समय आ गया है देशव्यापी आंदोलन का, और इसका नेतृत्व राहुल गांधी कर रहे हैं।

🔹 विपक्षी एकजुटता का मंच बनेगा बिलासपुर

बैठक में अटल श्रीवास्तव, दिलीप लहरिया, सियाराम कौशिक, शैलेश पांडेय, रश्मि आशीष सिंह, इंग्रिड मैकलाउड सहित सैकड़ों वरिष्ठ नेता–कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह सभा भाजपा के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की शुरुआत होगी।


राजनीतिक महत्व

👉 यह सभा कांग्रेस के लिए सिर्फ़ छत्तीसगढ़ नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी संदेशवाहक साबित होने वाली है।
👉 “वोट चोर – गद्दी छोड़” का नारा अब धीरे-धीरे विपक्षी एकजुटता का आधार बन रहा है।
👉 बिलासपुर इस आंदोलन का पहला पड़ाव होगा, जहां से कांग्रेस केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर बड़ा प्रहार करेगी।


कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करना बनी बड़ी चुनौती

कांग्रेस की “वोट चोर – गद्दी छोड़” सभा से पहले जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

  • लगातार चुनावी झटकों और संगठनात्मक खींचतान ने कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराया है।
  • अब इस सभा को लेकर कांग्रेस नेतृत्व का फोकस है कि जमीनी स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर मैदान में उतारा जाए।
  • जानकार मानते हैं कि सभा की सफलता का सीधा संबंध कार्यकर्ताओं की भागीदारी और जोश से है।

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