Mohammed israil
एसडीएम ने कलेक्टर को दी प्राथमिक जांच रिपोर्ट, हो सकती है कानूनी कार्रवाईबिलासपुर, 01 सितंबर।छत्तीसगढ़ में मेडिकल एडमिशन के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। बिलासपुर तहसील में ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाणपत्र घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। जांच में पाया गया कि जिन तीन प्रमाणपत्रों को फर्जी घोषित किया गया है, उनके मूल दस्तावेज तहसील से गायब हैं। संदेह की सुई उस बाबू तक पहुंच चुकी है, जिसकी आईडी से यह सर्टिफिकेट ऑनलाइन बने। उसे नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।🔎 जांच में बड़े खुलासे 1✒️ बयान और संदेह 2📚 ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र क्या है और क्यों ज़रूरी? 3⚠️ फर्जीवाड़ा कैसे हुआ? 4❓ बड़े सवालजिम्मेदार अफसर पर पर भी बड़ा सवाल
एसडीएम ने कलेक्टर को दी प्राथमिक जांच रिपोर्ट, हो सकती है कानूनी कार्रवाई


बिलासपुर, 01 सितंबर।छत्तीसगढ़ में मेडिकल एडमिशन के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। बिलासपुर तहसील में ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाणपत्र घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। जांच में पाया गया कि जिन तीन प्रमाणपत्रों को फर्जी घोषित किया गया है, उनके मूल दस्तावेज तहसील से गायब हैं। संदेह की सुई उस बाबू तक पहुंच चुकी है, जिसकी आईडी से यह सर्टिफिकेट ऑनलाइन बने। उसे नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

🔎 जांच में बड़े खुलासे
- अब तक 3 फर्जी प्रमाणपत्र की पुष्टि, 4 और संदिग्ध।
- गायब रिकॉर्ड – तहसील कार्यालय से कागज़ात हटा दिए गए।
- बाबू की लॉगिन आईडी से ऑनलाइन प्रमाणपत्र निर्माण।
- तहसीलदार गरिमा सिंह का बयान – “मेरे हस्ताक्षर नहीं हैं।”
- छात्रा ने अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में इसी फर्जी प्रमाणपत्र से एडमिशन लिया।
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✒️ बयान और संदेह
गरिमा ठाकुर, तहसीलदार बिलासपुर।

- तहसीलदार गरिमा ठाकुर ने छात्राओं और परिजनों के बयान दर्ज किए।
- अतिरिक्त तहसीलदार प्रकृति ध्रुव भी मौजूद रहीं।
- एक प्रमाणपत्र में वकील, दो में रीडर की संदिग्ध भूमिका।
- एसडीएम मनीष साहू ने रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी।
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📚 ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र क्या है और क्यों ज़रूरी?
- सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10% आरक्षण।
- फायदे: मेडिकल, इंजीनियरिंग, सरकारी नौकरी में आरक्षण।
- पात्रता: आय ₹8 लाख से कम, ज़मीन 5 एकड़ से कम, मकान 1000 वर्ग फीट से छोटा।
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⚠️ फर्जीवाड़ा कैसे हुआ?
- बाबू की आईडी से ऑनलाइन एंट्री।
- रिकॉर्ड गायब कर दिए गए।
- जाली हस्ताक्षर कर वैध दिखाया गया।
- छात्रों ने मेडिकल एडमिशन तक लिया।
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❓ बड़े सवाल
- तहसील से रिकॉर्ड कैसे गायब हुए?
- बाबू की आईडी का इस्तेमाल किसने किया?
- क्या इस पूरे खेल में बाहरी दलाल व कानूनी पेशेवर शामिल हैं?
- मेडिकल एडमिशन में योग्य छात्रों का हक़ किसने छीना?
जिम्मेदार अफसर पर पर भी बड़ा सवाल
यह मामला सिर्फ़ एक तहसील का घोटाला नहीं बल्कि पूरे राज्य की प्रवेश प्रणाली और प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल है। बिलासपुर से अंबिकापुर तक पहुंचा यह फर्जीवाड़ा अब सरकार के उच्च स्तर तक गूंज रहा है। कलेक्टर को रिपोर्ट सौंप दी गई है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इसमें शामिल चेहरों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।



