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आंगनबाड़ी में डीजे का पाइप गिरने से मासूम की मौत, हाई कोर्ट ने ढाई लाख रुपये मुआवजा देने का दिया आदेश

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil


हाईकोर्ट का सख्त रुख :  शासन से पूछा – क्या वहां नाच-गाना होता है?

बिलासपुर।
आंगनबाड़ी केंद्र में डीजे का सामान रखकर की गई लापरवाही से मासूम बच्ची की मौत पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने तीखे शब्दों में पूछा – “आखिर आंगनबाड़ी परिसर में डीजे का सामान क्यों रखा गया, क्या वहां नाच-गाना होता है?”

कोर्ट ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर घटना है, जिसे किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने बिलासपुर कलेक्टर से व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट तलब की और पीड़ित परिवार को दी गई आर्थिक मदद का ब्यौरा मांगा।


घटना और लापरवाही की पूरी कहानी

14 अगस्त को सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित आंगनबाड़ी में खेल रही 3 साल की मासूम मुस्कान महिलांग पर डीजे का लोहे का पाइप गिर गया था। बच्ची गंभीर रूप से घायल हुई और उसकी मौत हो गई। शुरू में मामले को दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह सिर में आई गंभीर चोट सामने आने के बाद सच्चाई उजागर हुई। इसके बाद डीजे संचालक पर एफआईआर दर्ज की गई।

दरअसल, आंगनबाड़ी में कर्मचारी का रिश्तेदार ही डीजे संचालक है, जिसने अपना सामान परिसर में रख दिया था। इसी लापरवाही ने मासूम की जिंदगी छीन ली।


मुआवजे पर कोर्ट की टिप्पणी

  • शासन की ओर से बताया गया कि 50 हजार रुपए की राशि रेड क्रास सोसायटी द्वारा पीड़ित परिवार को दी गई है।
  • हाईकोर्ट ने इसे अपर्याप्त मानते हुए ढाई लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया।
  • इसमें 2 लाख की अतिरिक्त राशि शासन को तुरंत देने कहा गया है।
  • मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।

डीजे संचालक और सहयोगियों पर केस दर्ज

आरोपी डीजे संचालक रोहित देवांगन और उसके सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज।

  • आंगनबाड़ी कर्मचारी के रिश्तेदार होने का खुलासा।
  • कोर्ट ने कहा – “इस लापरवाही में किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”

🔹 हाईकोर्ट की सख्ती

  • कलेक्टर बिलासपुर से शपथपत्र सहित विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
  • पूछा – जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय होगी?
  • भविष्य में आंगनबाड़ी केंद्रों में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश।

जनहित याचिका में तब्दील हुआ मामला

हाईकोर्ट ने इस दुखद घटना को स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका माना है। अदालत ने साफ किया है कि मासूम बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।


👉 इस घटना ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्थाओं की लापरवाही को बेनकाब किया है। सवाल यह है कि बच्चों के लिए बने आंगनबाड़ी में आखिर कैसे डीजे का सामान रखा जा सकता है और इतनी बड़ी चूक के लिए जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई कब होगी।

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