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सीपत-मस्तूरी: राखड़ डैम से तबाह गांवों पर एक और कोलवाशरी का बोझ!, जानिए क्या है पूरा मामला…

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil


ग्रामीणों का उग्र विरोध, जनसुनवाई का बहिष्कार – फिर भी प्रशासन ने पूरी की औपचारिकता

बिलासपुर। एनटीपीसी के राखड़ डैम और प्रदूषण की मार झेल रहे सीपत-मस्तूरी क्षेत्र के ग्रामीणों ने एक और कोलवाशरी खोले जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को रलिया-भिलाई गांव में आयोजित जनसुनवाई का ग्रामीणों ने खुला बहिष्कार किया। नाराज लोगों ने साफ कहा कि पहले से ही राखड़, डस्ट और गंदे पानी से उनकी जिंदगी दूभर हो चुकी है, अब एक और वाशरी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं होगी।

ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए कि उनकी आपत्तियों को लगातार दरकिनार कर औपचारिकता निभाई जा रही है। जनसुनवाई के दौरान मंच के सामने ज्यादातर कुर्सियां खाली रहीं, केवल कुछ लोगों ने लिखित और मौखिक आपत्ति दर्ज कराई।


ग्रामीणों का दर्द –

“पानी दूषित, खेत बंजर… अब जीने की गुंजाइश भी छिन जाएगी”
ग्रामीणों ने कहा कि राखड़ डैम का गंदा पानी अब किचन तक पहुंच रहा है। पानी का लेवल नीचे जा रहा है, खेतों की मिट्टी बर्बाद हो चुकी है। कोलवाशरी और क्रशर प्लांट से उठने वाली धूल से फसलें खराब हो रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कृषि क्षेत्र को धीरे-धीरे इंडस्ट्रियल एरिया में बदला जा रहा है।


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जनसुनवाई के हालात

  • स्थान – जयरामनगर (खैरा), ग्राम रलिया-भिलाई
  • आयोजन – पर्यावरण प्रदूषण मंडल
  • तारीख – सोमवार
  • जनसुनवाई में ग्रामीणों की खाली रहीं कुर्सियां
  • ग्रामीणों ने विरोध कर किया बहिष्कार
  • कुल 182 आवेदन पहुंचे – पक्ष और विपक्ष दोनों में
  • जिला प्रशासन ने कहा – “प्रक्रिया पूरी करना ही हमारा काम था”

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ग्रामीणों की मुख्य आपत्तियाँ

  • राखड़ डैम से जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है
  • गंदा पानी गांवों और किचन तक पहुंच रहा है
  • खेत बंजर हो रहे हैं, फसलें बर्बाद
  • डस्ट प्रदूषण से सांस व स्वास्थ्य संबंधी खतरे
  • पहले से कोलवाशरी और क्रशर प्लांट से संकट बढ़ा
  • नया कोलवाशरी खोलना लोगों के साथ खिलवाड़

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प्रशासन पर सवाल

  • ग्रामीणों का कहना – “आपत्तियों को लगातार दरकिनार किया जा रहा है”
  • जनसुनवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई
  • कृषि क्षेत्र को धीरे-धीरे इंडस्ट्रियल जोन में बदला जा रहा है
  • जनता की समस्याओं के समाधान पर चुप्पी, सिर्फ परियोजनाओं पर जोर

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