

बिलासपुर। सिम्स में मरीजों की जीवनरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बुधवार को “मैकेनिकल वेंटिलेटर” विषय पर एक दिवसीय कौशल प्रशिक्षण आयोजित किया गया। मेजर ऑपरेशन थिएटर के पोस्टर ऑफ सेमिनार हॉल में हुए इस कार्यक्रम का शुभारंभ अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक लखन सिंह और डॉ. आशुतोष कोरी ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
मुख्य वक्ता डॉ. मधुमिता मूर्ति (विभागाध्यक्ष, एनेस्थीसिया) ने वेंटिलेटर की कार्यप्रणाली, गंभीर रोगियों में इसके उपयोग, मरीज को वेंटिलेटर से धीरे-धीरे बाहर निकालने की प्रक्रिया एवं सावधानियों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने वेंटिलेटर के लाभ और संभावित जटिलताओं को भी स्पष्ट किया।
अधिष्ठाता डॉ. मूर्ति ने समय-समय पर कौशल विकास प्रशिक्षणों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ मरीजों की बेहतर देखभाल कर सकते हैं। चिकित्सा अधीक्षक लखन सिंह ने मेडिसिन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
इस अवसर पर डॉ. मिल्टन देवबर्मन, डॉ. सुरभि बंजारे, डॉ. श्वेता कुजूर, डॉ. भावना रायज्यादा सहित बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम का संचालन नर्सिंग सिस्टर श्रीमती पुष्प लता शर्मा ने किया।
मैकेनिकल वेंटिलेटर से जुड़ी प्रमुख बातें
- वेंटिलेटर का उपयोग तब किया जाता है जब मरीज स्वयं सांस लेने में असमर्थ हो जाता है।
- यह ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति कर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को सुरक्षित रखता है।
- मरीज की स्थिति सुधरने पर धीरे-धीरे वेंटिलेटर से बाहर निकाला जाता है, जिसे वीनिंग प्रोसेस कहते हैं।
- लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहने से संक्रमण या अन्य जटिलताएं हो सकती हैं।
- प्रशिक्षित चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ ही इसके संचालन और देखभाल के लिए जिम्मेदार होते हैं।



