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17 सूत्रीय मांगों पर मिला ठोस आश्वासन, हड़ताल स्थगित — तहसीलदारों का संघर्ष रंग लाया

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मोहम्मद इसराइल

Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर। छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ (तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार) द्वारा विगत दिनों से चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल को शासन स्तर से मिले ठोस आश्वासन और मंत्री स्तर पर हुए सकारात्मक संवाद के बाद 06 अगस्त 2025 से स्थगित कर दिया गया है। 17 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुए इस ऐतिहासिक आंदोलन ने प्रशासन को गंभीरता से सोचने पर विवश किया। संघ ने इसे सिर्फ असंतोष नहीं बल्कि “राजस्व प्रशासन में न्याय, समन्वय और सुधार की आवाज़” बताया है।


छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ द्वारा राज्यभर में तहसीलदार एवं नायब तहसीलदारों की एकजुटता से शुरू की गई अनिश्चितकालीन हड़ताल अब थम गई है। शासन के उच्चाधिकारियों के साथ संघ प्रतिनिधियों की चर्चा के बाद 17 सूत्रीय मांगों पर गंभीर सहमति बनी, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया।

संघ ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल वेतन, पदोन्नति या संसाधनों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य राजस्व प्रशासन की गरिमा और कार्यदक्षता को स्थापित करना था। माननीय राजस्व मंत्री, सामान्य प्रशासन व राजस्व विभाग के सचिवों तथा भू-अभिलेख संचालक की उपस्थिति में हुई वार्ता में कई ठोस आश्वासन प्राप्त हुए, जिनमें प्रमुख हैं—

  • तहसीलों में मानव संसाधन, वाहन व अन्य संरचनाओं की पूर्ति तक कार्यों में शिथिलता को सहमति प्राप्त
  • सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अनावश्यक दंड से राहत
  • डिप्टी कलेक्टर पदोन्नति में 50:50 अनुपात की बहाली पर कार्रवाई
  • नायब तहसीलदार पद को राजपत्रित दर्जा देने की प्रक्रिया
  • शासकीय वाहन की स्थायी व्यवस्था हेतु नीति निर्माण
  • ग्रेड-पे संशोधन पर समिति गठन
  • निलंबन मामलों पर शीघ्र निर्णय
  • न्यायाधीश संरक्षण अधिनियम का पालन
  • सभी 17 सूत्रीय मांगों पर चरणबद्ध क्रियान्वयन की सहमति

संघ ने अपने सदस्यों से अपील की है कि इस हड़ताल स्थगन को कमजोरी न समझें, बल्कि इसे रणनीतिक जीत और संवाद आधारित संघर्ष का प्रतीक मानें। यह समय संगठन की एकता, नेतृत्व में विश्वास और शासन द्वारा तय समयसीमा का सम्मान करने का है।

यदि तय समयावधि में ठोस समाधान सामने नहीं आता है, तो संघ पुनः आंदोलनात्मक कदम उठाने को बाध्य होगा। फिलहाल यह संघर्ष थमा है, समाप्त नहीं हुआ — यह स्पष्ट संकेत है कि प्रशासनिक सुधारों की राह में यह एक निर्णायक पड़ाव है, विराम नहीं।

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