Mohammed israil
बिलासपुर।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के शिक्षा विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पिछले 12 वर्षों से नर्सरी स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं और अब राज्य सरकार उन्हें बचाने के लिए नियमों में मनमर्जी से संशोधन कर रही है। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा — “आपने नियम इसलिए बदले क्योंकि स्कूल मालिक मर्सिडीज़ चलाते हैं? बच्चों और अभिभावकों के साथ ये अपराध है!” अदालत ने सभी ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई कर पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा देने और बच्चों को अन्य स्कूलों में शिफ्ट करने का निर्देश भी दिया।
क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस नेता विकास तिवारी ने एडवोकेट संदीप दुबे के माध्यम से जनहित याचिका दायर की। आरोप नर्सरी के नाम पर फर्जी स्कूल संचालन, CBSE की आड़ में पालकों से ठगी, गलत मान्यता व नाम पर कई ब्रांच चलाना। सुनवाई की तारीख 5 अगस्त 2025 न्यायमूर्ति चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल शासन का जवाब कहा गया — “नर्सरी के लिए मान्यता आवश्यक नहीं” याचिकाकर्ता का तर्क वर्ष 2013 से ही नर्सरी के लिए मान्यता लेना अनिवार्य है, शासन ने झूठा शपथ पत्र दिया। कोर्ट की टिप्पणी “ये सीधा फ्रॉड है, बच्चों के साथ अपराध हुआ है। स्कूल मालिक मर्सिडीज़ में घूम रहे हैं और बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं।”
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सख्त टिप्पणियाँ:
- “पान दुकान वाला भी अब स्कूल खोल सकता है? आप मर्सिडीज़ वालों को बचाने नियम बदल देते हैं!”
- “आपने खुद नियम बनाए फिर 12 साल बाद कहते हैं मान्यता की जरूरत नहीं!”
- “आप लोग कमेटी भी खुद बनाते हैं, रिपोर्ट भी दो दिन में बनवा लेते हैं और नियम बदल देते हैं।”
- “हर रोज नया स्कैम, अगर यही चलता रहा तो राज्य का क्या होगा?”
- “शिक्षा सचिव को डर है, इसलिए लंबी छुट्टी में चले गए?”
- “जो स्कूल 12 साल तक बिना मान्यता चलाए गए, वो क्रिमिनल केस के दायरे में आते हैं।”
शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल
मुद्दा विवरण शपथ पत्र में भ्रम शिक्षा सचिव ने कोर्ट को बताया कि नर्सरी स्कूलों के लिए मान्यता जरूरी नहीं, जबकि 2013 से अधिनियम लागू है। कोर्ट की फटकार “2013 से कानून है, आपने दो दिन पहले कमेटी बनाई और उसी आधार पर शपथ पत्र दे दिया।” शिक्षा सचिव की गैरहाजिरी अवकाश पर होने के चलते संयुक्त सचिव ने शपथ पत्र प्रस्तुत किया, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया। भविष्य का निर्देश कोर्ट ने कहा — 13 अगस्त को शिक्षा सचिव उपस्थित हो या उनकी जगह संयुक्त सचिव नया शपथ पत्र पेश करें।
कोर्ट के आदेश — अब क्या करना होगा सरकार को?
- ✅ बिना मान्यता के स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई हो।
- ✅ बच्चों को अन्य मान्यता प्राप्त स्कूलों में स्थानांतरित किया जाए।
- ✅ प्रत्येक प्रभावित छात्र को 5 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।
- ✅ स्कूलों द्वारा वसूली गई अवैध राशि वापस ली जाए।
- ✅ शिक्षा विभाग स्पष्ट नीति लाए और पुरानी गड़बड़ियों की रिपोर्ट 13 अगस्त तक कोर्ट में पेश करे।
विवाद की जड़ क्या?
- 🔸 रायपुर समेत प्रदेशभर में लगभग 330 स्कूल ऐसे हैं जो खुद को CBSE कहकर संचालित कर रहे हैं लेकिन उनके पास कोई वैध मान्यता नहीं।
- 🔸 एक ही नाम से कई ब्रांच, पालकों को भ्रमित कर लाखों की फीस वसूली गई।
- 🔸 शिकायत करने वाले याचिकाकर्ता के खिलाफ उल्टा फर्जी FIR दर्ज करवाई गई, जिससे मामला और गंभीर बन गया।
न्यायपालिका की कड़ी चेतावनी
छत्तीसगढ़ में शिक्षा के नाम पर 12 सालों से चले आ रहे इस फ्रॉड पर अब हाईकोर्ट का शिकंजा कस चुका है। अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि न तो सत्ता की ताकत, और न ही संपन्नता बच्चों के अधिकारों से ऊपर है। “बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले स्कूल और अधिकारियों को अब जवाब देना ही होगा।”
✅ आगामी सुनवाई:
📅 13 अगस्त 2025
🧾 शिक्षा सचिव से नया शपथ पत्र मांगा गया है।



