Bilaspur Chhattisgarh korba। कोरबा जिले की जिला जेल से दिनदहाड़े चार विचाराधीन बंदियों के फरार हो जाने की घटना ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सभी आरोपी पॉक्सो और दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों में जेल में बंद थे। घटना के बाद पुलिस महकमे से लेकर जिला प्रशासन तक हड़कंप मचा हुआ है। फरार बंदियों की तलाश में पुलिस टीमों को रवाना कर दिया गया है।

पूरा मामला: दीवार फांदकर निकले बंदी, दोपहर की चौंकाने वाली वारदात
यह सनसनीखेज घटना शनिवार दोपहर करीब 3 बजे की बताई जा रही है, जब कोरबा जिला जेल में बंद चार विचाराधीन कैदी लोहे की रॉड के सहारे जेल की चारदीवारी फांदकर फरार हो गए।
सूत्रों के मुताबिक, जेल प्रबंधन को तब जानकारी हुई जब गिनती के दौरान चार बंदी कम पाए गए। इस बीच जेल परिसर में हड़कंप मच गया और घटना की सूचना तुरंत सिविल लाइन थाना को दी गई। पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
फरार बंदियों के नाम और विवरण
बंदी का नाम निवास आरोप चंद्रशेखर राठिया रायगढ़ पॉक्सो और दुष्कर्म दशरथ सिदार पोड़ी बहार दुष्कर्म राज कंवर भुलसीडीह पॉक्सो सरना भीकू बालको दुष्कर्म
चारों बंदी युवक हैं और अलग-अलग थाना क्षेत्रों से लाकर जिला जेल में रखा गया था। इनमें तीन आरोपी कोरबा जिले से जबकि एक रायगढ़ से है।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
- कैसे दिनदहाड़े रॉड के सहारे चारदीवारी फांदना संभव हुआ?
- क्या वॉच टावर और सीसीटीवी मॉनिटरिंग सक्रिय नहीं थी?
- बंदियों की गतिविधियों पर नजर क्यों नहीं रखी गई?
👉 इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए पुलिस और प्रशासन की संयुक्त जांच टीम गठित की गई है।
जिला प्रशासन और पुलिस अलर्ट
जेल ब्रेक की घटना की जानकारी फैलते ही जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जेल प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसियों में हलचल मच गई है। प्रशासन ने तत्काल जांच के आदेश देते हुए जेल के आसपास के क्षेत्रों में नाकाबंदी शुरू कर दी है। साथ ही रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और हाईवे चेकपोस्ट पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
जेल से भागना – अपराध या प्रशासन की चूक?
जेल से विचाराधीन कैदियों का इस तरह भाग जाना सिर्फ सुरक्षा में सेंध नहीं, बल्कि प्रक्रियात्मक फेल्योर को भी दर्शाता है। पिछले कुछ महीनों में यह दूसरी बार है जब कोरबा जिला जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
कानूनी स्थिति:
चारों आरोपी अभी विचाराधीन (अंडर ट्रायल) थे और न्यायालय में मामले लंबित हैं। यदि इनकी गिरफ्तारी शीघ्र नहीं होती है, तो जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर भी प्रभाव पड़ सकता है।



