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“संसाधन नहीं तो काम नहीं”: तहसीलदार-नायब तहसीलदारों का प्रदेशव्यापी आंदोलन तेज, 17 सूत्रीय मांगों पर अड़े अधिकारी

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में राजस्व व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार अब “संसाधन नहीं तो काम नहीं” के नारे के साथ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। छ.ग. कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के नेतृत्व में प्रदेशभर के अधिकारियों ने आज बिलासपुर में संभाग स्तरीय धरना देकर प्रशासनिक ढांचे की खामियों, संसाधनों की भारी कमी और पदोन्नति संबंधी वर्षों से लंबित मांगों को लेकर तीव्र विरोध दर्ज कराया। अगर मांगें नहीं मानी गईं तो संघ ने प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी है।



छत्तीसगढ़ के तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर आज बिलासपुर के प्रगति मैदान (मुंगेली नाका) में संभाग स्तरीय धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन छ.ग. कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के नेतृत्व में “संसाधन नहीं तो काम नहीं” के सिद्धांत पर किया गया। बिलासपुर संभाग के आठ जिलों से लगभग 160 अधिकारियों ने एकजुट होकर अपनी मांगों की अनदेखी के खिलाफ आवाज बुलंद की।

धरना स्थल पर संघ के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण कुमार लहरे ने साफ शब्दों में कहा –

“हम केवल अपने हित नहीं, पूरे प्रदेश की राजस्व व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक संसाधनों की मांग कर रहे हैं। अगर शासन सुनवाई नहीं करता तो हम 30 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे।”


📣 प्रमुख उपस्थिति:
धरना कार्यक्रम में प्रदेश के वरिष्ठ पदाधिकारी—प्रवक्ता शशिभूषण सोनी, मीडिया प्रभारी ओमप्रकाश चंद्रवंशी, सचिव प्रशांत पटेल, सहसचिव उज्ज्वल पाण्डेय, सह प्रवक्ता विभोर यादव, संभागीय उपाध्यक्ष अतुल वैष्णव एवं गरिमा ठाकुर सहित सभी 8 जिलों के पदाधिकारी शामिल हुए।

इसके साथ ही विभिन्न कर्मचारी संगठनों जैसे –

  • छत्तीसगढ़ लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ (अध्यक्ष: रोहित तिवारी)
  • छ.ग. प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ (अध्यक्ष: जी. आर. चन्द्रा)
  • छ.ग. कर्मचारी कांग्रेस (कार्यकारी अध्यक्ष: राजेंद्र दवे)
    ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए मंच से एकजुटता दिखाई।

📝 मुख्य 17 सूत्रीय मांगों में प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  1. डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नति अनुपात 50:50 (पूर्व की व्यवस्था अनुसार) बहाल करना।
  2. नायब तहसीलदार पद को राजपत्रित श्रेणी में शामिल करना – जैसा पूर्व में घोषित किया गया था।
  3. प्रत्येक तहसील कार्यालय में स्थायी स्टाफ, शासकीय वाहन, ड्राइवर एवं ईंधन की अनिवार्य उपलब्धता।
  4. न्यायिक कार्यों में न्यायिक संरक्षण अधिनियम का पूर्ण पालन और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम।
  5. लंबित वेतन विसंगतियों, संरचनात्मक सुधार, कार्यभार संतुलन सहित 17 बिंदुओं पर तत्काल निर्णय।

🗓️ आगे की रणनीति:
प्रदेश मीडिया प्रभारी ओमप्रकाश चंद्रवंशी ने बताया कि कल 30 जुलाई को रायपुर में प्रदेश स्तरीय धरना आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रदेशभर से 600 से अधिक तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार भाग लेंगे। यदि तब तक शासन ने ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदलने की घोषणा की जाएगी।


🎯 आंदोलन का उद्देश्य:
यह आंदोलन केवल व्यक्तिगत हितों तक सीमित नहीं, बल्कि राज्य की राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने और अधिकारियों को उनके कार्यों के अनुरूप संसाधन एवं सम्मान दिलाने का प्रयास है।



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