
Mohammed israil
Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली करंट से हुई कई दर्दनाक घटनाओं ने हाल‑ही में प्रशासन और जनता दोनों की नींद उड़ा दी है। जशपुर जिले के थाना प्रभारी रामसाय पैंकरा, बिलासपुर, कोरबा और कोरबा क्षेत्र में डॉक्टर समेत अन्य लोग करंट की चपेट में आकर जान गंवा बैठे। ये घटनाएं न सिर्फ वर्तमान मानसून और बिजली अव्यवस्था का सबूत हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि सुरक्षा उपायों की नाकाफी और तकनीकी अनदेखी कितनी जानलेवा हो सकती है।
📰 जशपुर जिला, टीआई की करंट से मौत

- रामसाय पैंकरा (54), वर्तमान में जशपुर जिले के नारायणपुर थाना प्रभारी, सरगुजा जिले के सीतापुर स्थित सरकारी आवास में एक पुराने घर में जरूरी सामान लेने गए थे।
- बरसाती अंधेरे तथा खराब तारों से लैस इस पड़े‑पुराने मकान में दीवार से लटकी खुली बिजली की तार से उनका हाथ छू जाने के कारण करंट लग गया। बेसुध अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
🧾 अन्य दुखद घटनाएं — बिजली करंट से हुई मौतें
• कोरबा जिला:
डॉक्टर कलीम रिजवी (45) और पत्नी फरदोस रिजवी (39) अपने घर की छत पर सफाई कर रहे थे।
एक लोहे के पाइप के जरिए अचानक 11,000 केवी लाइनों से संपर्क में आने पर दोनों करंट की चपेट में आ गए। कलीम की मौत हो गई, जबकि फरदोस की हालत गंभीर बनी हुई है।
• बिलासपुर जिला, तिफरा क्षेत्र:
एक इलेक्ट्रिशियन के कर्मचारी श्यामू डाहिरे (30) लोहे की सीढ़ी पकड़े हुए थे, जब सीढ़ी अचानक बिजली का प्रवाह लेने लगी और वे करंट की चपेट में आ गए। अस्पताल ले जाने पर वे मृत पाए गए।
• बिलासपुर सिविल लाइन:
- सीएसईबी का ठेका कर्मचारी ईश्वर पटेल (43) बिजली खंभे पर काम करते समय करंट की चपेट में आए और नीचे गिर गए, उनकी मृत्यु वहीं हो गई।
- वहीं, प्रोफेसर आलोक कुमार दीक्षित (64) अपने घर पर इनवर्टर ठीक करते समय बिजली लगने से मौके पर ही मृत हो गए।
🔍 मुख्य कारण बरसात से क्षतिग्रस्त बिजली तार, अव्यवस्थित निजी भवनों में सुरक्षा का अभाव विशेष समूह सरकारी कर्मचारी, चिकित्सा कर्मी, सामान्य नागरिक — सभी जोखिम में प्रमुख लापरवाहियां छतों व मकानों में उचित इंसुलेशन न होना, तारों की ठीक से जांच का अभाव जरूरी समाधान नियमित निरीक्षण, संदिग्ध तारों की मरम्मत, जन‑जागरूकता अभियान, ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय करना प्रशासनिक कदम मर्ग दर्ज कर जांच, मृतकों के परिवार को सहायता, बिजली विभाग को रिपोर्ट, जागरूकता व सुरक्षा निर्देश जारी
सामाजिक जिम्मेदारी
इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि तकनीकी त्रुटियों व लापरवाही के चलते जीवन कितना आसानी से कट सकता है। चाहे सरकारी आवास हो, निजी घर या क्लीनिक—बिजली सुरक्षा न होने पर किसी की जान को खतरा बन सकती है। यह सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर व्यक्ति और ठेकेदार की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे जगहों की बिजली व्यवस्था की सुरक्षा का ध्यान रखें।
✅ सतर्क रहें, सुरक्षित रहें
मानसून के मौसम में बिजली से जुड़ी दुर्घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। अतः जरूरी है कि—
- पुरानी व टूटती बिजली तारों की समय-समय पर जांच हो
- अनधिकृत या असुरक्षित इलाकों को तुरंत एक्सेस से बाहर रखा जाए
- ठेकेदार और बिजली कंपनियों को कड़ी निगरानी के दायरे में लाया जाए
- जनता में जागरूकता बढ़ाकर स्वयं सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए



