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“जहां कानून साधन है, वहीं न्याय हमारा उद्देश्य” – छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने न्यायिक कार्य में मानवीय संवेदना के समावेश पर दिया जोर

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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रायपुर।”न्यायिक कार्य केवल कानून के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें मानवीय संवेदना का समावेश भी आवश्यक है।” — छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय श्री रमेश सिन्हा ने यह बात रायपुर में आयोजित संभागीय न्यायिक कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही। छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा आयोजित इस एक दिवसीय सेमिनार में रायपुर संभाग के चार जिलों से आए कुल 126 न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया।


सिविल लाइन स्थित न्यू सर्किट हाउस में 27 जुलाई 2025 को आयोजित इस संभागीय न्यायिक कार्यशाला का शुभारंभ  मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा ने किया। इस गरिमामयी आयोजन में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी, दीपक कुमार तिवारी, और राकेश मोहन पांडेय भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यशाला का उद्देश्य न्यायिक दक्षता, संवेदनशीलता और विधिक ज्ञान को सशक्त बनाना था। इसमें निम्नलिखित विषयों पर गहन चर्चा हुई:

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रायपुर।”न्यायिक कार्य केवल कानून के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें मानवीय संवेदना का समावेश भी आवश्यक है।” — छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय श्री रमेश सिन्हा ने यह बात रायपुर में आयोजित संभागीय न्यायिक कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही। छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा आयोजित इस एक दिवसीय सेमिनार में रायपुर संभाग के चार जिलों से आए कुल 126 न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया।सिविल लाइन स्थित न्यू सर्किट हाउस में 27 जुलाई 2025 को आयोजित इस संभागीय न्यायिक कार्यशाला का शुभारंभ  मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा ने किया। इस गरिमामयी आयोजन में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी, दीपक कुमार तिवारी, और राकेश मोहन पांडेय भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।अन्य वक्ताओं का योगदान:कार्यशाला का उद्देश्य:
  • प्रकरणों के शीघ्र निष्पादन की प्रक्रिया
  • गिरफ्तारी, रिमांड और जमानत से जुड़े प्रावधान
  • अभियुक्त की परीक्षा की प्रक्रिया और उद्देश्य
  • हिंदू उत्तराधिकार और विरासत कानून का विश्लेषण

मुख्य न्यायाधीश श्री सिन्हा ने अपने संबोधन में न्यायिक अधिकारियों को याद दिलाया कि जनता अब न्यायपालिका से केवल निर्णय नहीं, बल्कि न्याय की उम्मीद करती है — वह भी गति, निष्पक्षता और संवेदना के साथ। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया महज कानून की धाराओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसमें मानवीय पक्ष का संतुलन अनिवार्य है।


“हर फाइल के पीछे एक इंसानी कहानी होती है — दर्द, संघर्ष और उम्मीद से भरी हुई। हमारा कर्तव्य केवल कानून का पालन करना नहीं, बल्कि उस पीड़ा को समझते हुए न्याय देना है।”
श्री रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय


  • BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) और हालिया कानूनों की जानकारी पर विशेष बल
  • न्यायिक निर्णयों में एकरूपता, विधिक शुद्धता और पारदर्शिता पर ज़ोर
  • मजिस्ट्रेट स्तर पर जमानत आदेशों में लापरवाही न बरतने की सख्त सलाह
  • न्यायिक निर्णयों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

अन्य वक्ताओं का योगदान:

  • रजिस्ट्रार जनरल, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय
  • निदेशक, राज्य न्यायिक अकादमी
  • प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, रायपुर — स्वागत भाषण
  • मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रायपुर — धन्यवाद ज्ञापन

कार्यशाला का उद्देश्य:

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह कार्यशाला केवल विधिक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण, सहयोग और न्यायिक प्रणाली में सुधार का अवसर है। उन्होंने सभी अधिकारियों से आग्रह किया कि वे यहां अर्जित ज्ञान को अपने-अपने न्यायालयों में व्यवहारिक रूप से लागू करें और संवेदनशील, सजग और सामाजिक रूप से जागरूक न्यायिक प्रणाली का निर्माण करें।


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