📝 मोहम्मद इसराइल
छत्तीसगढ़, बिलासपुर।बिलासपुर जिले की ग्राम पंचायत घूटकू में अवैध रेत उत्खनन ने अब विकराल रूप ले लिया है। उपजाऊ खेतों के बर्बाद होने से आक्रोशित ग्रामीणों के साथ अब महिला संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया है। सरपंच और प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से चल रहे इस गोरखधंधे के खिलाफ ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि सात दिन के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे मंगला भैंसा झार स्थान पर धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। इस जनआंदोलन की अगुवाई अब महिलाएं कर रही हैं, जिन्होंने स्पष्ट कहा है कि अब “चुप नहीं बैठेंगे।”
📌 ग्राम पंचायत घूटकू में रेत माफिया के हौंसले इस कदर बुलंद हैं कि खुलेआम रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, नदी क्षेत्र से रात-दिन रेत खनन कर ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर बाहर भेजा जा रहा है, जिससे कृषि भूमि का भारी जल कटाव हो रहा है और सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन बंजर होने की कगार पर है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने विरोध किया तो ग्राम सरपंच ने न केवल जान से मारने की धमकी दी बल्कि झूठे केस में फंसाने की भी चेतावनी दी। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि अवैध उत्खनन में पंचायत के ही कुछ प्रभावशाली पुरुष शामिल हैं जो नियम-कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
👩🦰 अब महिलाएं भी खुलकर मैदान में
गांव की महिलाएं अब इस मुद्दे को लेकर खुलकर सामने आ गई हैं। उन्होंने एकजुट होकर प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर रेत उत्खनन रोका नहीं गया, तो वे मंगला भैंसा झार में धरना और जन आंदोलन शुरू करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
ग्रामीण महिलाओं ने प्रशासन से आग्रह किया है कि यदि समय रहते यह कार्य बंद नहीं हुआ, तो यह केवल एक आंदोलन नहीं बल्कि एक जनविरोध में बदल जाएगा, जिसकी चिंगारी जिले भर में फैल सकती है।
⚖️ उच्च न्यायालय भी जता चुका है नाराजगी
उल्लेखनीय है कि जिले में अवैध रेत खनन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर पूर्व में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भी नाराजगी जताई थी। न्यायालय ने यह स्पष्ट कहा था कि यदि स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग ने नियंत्रण नहीं किया, तो कड़े आदेश जारी किए जाएंगे। इसके बावजूद वर्तमान परिस्थितियां दर्शाती हैं कि स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी गंभीर नहीं हैं।
📦 🔍 खनिज विभाग की लापरवाही पर सवाल
📌 न तो नियमित निरीक्षण,
📌 न ही घाटों की स्थिति की मॉनिटरिंग,
📌 रेत उत्खनन पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं,
📌 स्थानीय शिकायतों को नजरअंदाज करना,
📌 कागजों में सीमित कार्रवाई, धरातल पर सन्नाटा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि इसी तरह खनिज विभाग की उदासीनता बनी रही तो जिले की नदियों का प्राकृतिक स्वरूप और ग्रामीण कृषि जीवन पूरी तरह तबाह हो सकता है।
🗣️ ग्रामीणों की मांग:
- तत्काल रेत घाट को सील किया जाए
- सरपंच और दोषियों पर एफआईआर दर्ज हो
- खनिज विभाग के जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई हो
- मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की जाए
- ग्रामवासियों की उपस्थिति में हर सप्ताह निगरानी की जाए
📢 ग्रामीणों का आह्वान मीडिया से:
ग्रामीणों ने मीडिया से अपील की है कि इस गंभीर विषय को प्रमुखता से उठाया जाए, ताकि शासन-प्रशासन तक उनकी आवाज पहुंचे और आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन, जल और जंगल को बचाया जा सके।



