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राजस्व व्यवस्था की रीढ़ मजबूत करने कनिष्ठ प्रशासनिक संघ मैदान में

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक संघ के पदाधिकारी एवं सदस्य।

17 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार से सशक्त पहल की मांग, पदस्थापना से लेकर सुरक्षा और न्यायिक अधिकारों तक उठाई आवाज

Bilaspur Chhattisgarh रायपुर | छत्तीसगढ़ की राजस्व व्यवस्था को जमीनी स्तर पर संभालने वाले तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने अब अपने अधिकारों और व्यवस्थागत सुधारों के लिए मोर्चा खोल दिया है। छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक संघ ने राज्य सरकार के समक्ष 17 सूत्रीय मांग-पत्र प्रस्तुत करते हुए व्यवस्था सुधार, प्रशासनिक सुविधा, न्यायिक संरक्षण और संगठनात्मक मान्यता की पुरजोर मांग की है। संघ का कहना है कि लगातार बढ़ते प्रशासनिक दबाव और संसाधनों की कमी के चलते न्यायिक और राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसे लेकर संघ के पदाधिकारी ने बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात की और समस्याओं से अवगत कराया। इस दौरान प्रमुख रूप से बिलासपुर तहसीलदार गरिमा ठाकुर , आकाश गुप्ता, विभोर यादव, ओमप्रकाश चंद्रवंशी, जयंती देवांगन,नेहा कौशिक समेत बिलासपुर जिले के समस्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार मौजूद थे।


🔍 संघ की प्रमुख मांगें क्या हैं?

छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक संघ ने जो 17 सूत्रीय मांगें रखी हैं, वे प्रशासनिक कार्यों को प्रभावशाली बनाने के साथ-साथ तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की सुरक्षा, सम्मान और कार्य सुविधा से जुड़ी हैं। निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं में ये मांगे सम्मिलित हैं:


✅ 1. पदस्थापना और संसाधन

सभी तहसीलों में अनुमोदित पदों पर कंप्यूटर ऑपरेटर, भृत्य, ड्राइवर, निरीक्षक और पटवारियों की तत्काल नियुक्ति की जाए। यदि पूर्ण व्यवस्था संभव न हो तो लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत निर्धारित समय-सीमा की बाध्यता से संबंधित तहसील को अस्थायी राहत दी जाए।


📈 2. पदोन्नति और ग्रेड पे में सुधार

  • तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नति में 50:50 अनुपात की नीति को फिर से लागू किया जाए।
  • नायब तहसीलदार पद को राजपत्रित पद घोषित करने की पूर्व घोषणा को अमल में लाया जाए।
  • तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार के लंबित ग्रेड पे सुधार को शीघ्र क्रियान्वित किया जाए।

🚗 3. वाहन और लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी

प्रत्येक तहसील में प्रोटोकॉल, न्यायालयीन एवं कानून-व्यवस्था संबंधी कार्यों के लिए वाहन और चालक की सुविधा दी जाए या फिर वाहन भत्ता दिया जाए।


🛡️ 4. न्यायिक स्वतंत्रता और सुरक्षा

  • न्यायालयीन कार्यों पर जनशिकायत की तरह एफआईआर दर्ज करना रोका जाए।
  • न्यायिक आदेशों पर मीडिया ट्रायल या प्रशासनिक दखल पर रोक लगाई जाए।
  • न्यायाधीश संरक्षण अधिनियम के तहत स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हों।

🧑‍💼 5. स्टाफिंग और तकनीकी सुविधा

  • Agristack, स्वामित्व योजना, ई-कोर्ट, भू-अभिलेख जैसे कार्यों के लिए प्रशिक्षित ऑपरेटरों की नियुक्ति की जाए।
  • आउटसोर्सिंग से नियुक्त स्टाफ के मानदेय भुगतान का अधिकार तहसीलदार को दिया जाए।

📞 6. मोबाइल गोपनीयता और सुरक्षा

TI की तरह तहसीलदारों को शासकीय मोबाइल डिवाइस और नंबर उपलब्ध कराए जाएं।
हर तहसील कार्यालय में सुरक्षाकर्मी और फील्ड भ्रमण हेतु वाहन की व्यवस्था अनिवार्य हो।


💵 7. आकस्मिक सहायता के लिए स्पष्ट गाइडलाइन

सड़क दुर्घटनाओं और आपदा घटनाओं में तत्काल राहत राशि ₹25,000 तहसीलदार द्वारा मौके पर देने के लिए स्पष्ट शासनादेश जारी किया जाए।


🧾 8. संगठन की मान्यता और विशेषज्ञ परिषद का गठन

संघ ने मांग की है कि तहसीलदार-नायब तहसीलदार संघ को आधिकारिक मान्यता मिले, ताकि शासन के साथ संवाद और पत्राचार की प्रक्रिया वैध और प्रभावी हो सके। साथ ही, राजस्व न्यायालयों के सुदृढ़ीकरण हेतु विशेषज्ञ परिषद का गठन भी किया जाए।


🗣️ संघ ने क्या कहा?

संघ पदाधिकारियों का कहना है कि ये मांगें केवल व्यक्तिगत सुविधाएं नहीं हैं, बल्कि राज्य की राजस्व और न्यायिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए आवश्यक कदम हैं। उन्होंने सरकार से शीघ्र वार्ता कर समस्याओं का हल निकालने की अपील की है।


चुनौतियों से जूझ रहे हैं

छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक संघ की यह 17 सूत्रीय मांगें स्पष्ट करती हैं कि प्रशासनिक कार्यों की जटिलता के बीच तहसील स्तर के अधिकारी अनेक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस मांग-पत्र को किस प्राथमिकता के साथ लेती है।


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