Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर। जिला मंगेली प्रशासन ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्रों के सहारे शासकीय सेवा कर रहे अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर कार्यालय से जारी आदेश में संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे सभी मामलों की तत्काल जांच कर प्रमाणित जानकारी प्रस्तुत की जाए।

कलेक्टर कार्यालय, जिला मंगेली (छत्तीसगढ़) द्वारा 8 जुलाई 2025 को जारी पत्र क्रमांक 4438/शिकायत/लोकसेवा 23182 के माध्यम से जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, जिला शिक्षा अधिकारी, उप संचालक कृषि, सहायक संचालक उद्यान, अपारंपरिक ऊर्जा अधिकारी एवं जिला योजना व सांख्यिकी अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्रों के आधार पर शासकीय सेवा कर रहे कर्मचारियों की सूची तैयार कर तत्काल सत्यापन किया जाए।
दरअसल, कलेक्टर कार्यालय को कुछ विभागों से यह सूचना प्राप्त हुई थी कि कुछ अधिकारी एवं कर्मचारी दिव्यांग प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसके आधार पर वे शासकीय सेवा में विभिन्न लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इन प्रमाण पत्रों की सत्यता की जांच हेतु संबंधित अधिकारियों को संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, जिला चिकित्सालय बिलासपुर एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर भेजा गया था।
लेकिन हाल ही में यह बात सामने आई है कि कुछ कर्मचारियों ने न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर कर दी, जिसमें उन्होंने मेडिकल जांच को ही चुनौती दे दी है। वहीं कुछ कर्मचारी जांच के लिए उपस्थित भी नहीं हुए। इसे लेकर प्रशासन ने नाराजगी जाहिर करते हुए आदेश जारी किया है कि संबंधित विभागों को तत्काल निर्देशित किया जाए कि वे सभी संदिग्ध कर्मचारियों की जांच रिपोर्ट और उपस्थिति की जानकारी शीघ्र प्रस्तुत करें।
साथ ही, एक अन्य पत्र क्रमांक 4439 के माध्यम से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, मंगेली और तहसील पंडरिया को भी मामले से अवगत कराते हुए उचित कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
इस आदेश के बाद जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ केवल पात्र व्यक्तियों तक ही सीमित रहे।



