


बिलासपुर bilaspur छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ की स्मार्ट सिटी बिलासपुर में गुरुवार को हुई झमाझम बारिश ने एक बार फिर नगर निगम की तैयारियों की पोल खोल दी। शहर के निचले इलाकों में तो पानी भरना आम हो गया है, लेकिन इस बार बारिश ने सरकारी अफसरों के कार्यालयों और आवासों को भी नहीं बख्शा।
गुरुवार को हुई तेज बारिश ने बिलासपुर शहर की व्यवस्थाओं को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। इस बार पानी सिर्फ सड़कों और कॉलोनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासन के अहम कार्यालय तक इसकी चपेट में आ गए। सबसे चौंकाने वाली तस्वीर शहर के हृदय स्थल नेहरू चौक स्थित एसडीएम कार्यालय की रही, जहां भारी जलभराव हो गया। पानी की स्थिति इतनी भयावह रही कि वह कोर्ट रूम तक पहुंच गया। कर्मचारियों को जरूरी फाइलों और दस्तावेजों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा।
स्थिति यहीं नहीं रुकी। जिला दंडाधिकारी एवं कलेक्टर संजय अग्रवाल के सरकारी निवास के बाहर भी भारी जलजमाव की स्थिति निर्मित हो गई। आवास के आसपास का क्षेत्र पानी से लबालब हो गया, जिससे आवागमन में भी परेशानी हुई। निगम के कर्मचारी देर शाम तक मोटर पंप की सहायता से पानी निकालने में जुटे रहे, लेकिन हालात सामान्य नहीं हो सके।
शहर के राजेन्द्र नगर, सिरगिट्टी, विवेकानंद गार्डन, तारबाहर, अग्रसेन चौक, शनिचरी बाजार और मंगला , विद्यानगर विनोबा नगर सरकंडा क्षेत्रजैसे निचले इलाकों में भी जलभराव ने लोगों की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित किया। कई घरों और दुकानों में पानी घुस गया, जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट तो शुरू किए गए हैं, लेकिन नाली और ड्रेनेज सिस्टम की दशा आज भी जर्जर बनी हुई है। हर साल की तरह इस बार भी नगर निगम की तैयारियां सिर्फ कागजों तक सीमित रहीं। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने नाराजगी जाहिर करते हुए तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जिसमें स्मार्ट सिटी की असलियत उजागर होती नजर आई।
खबर में अपडेट जारी…..
श्रीकांत वर्मा मार्ग, पुराना बस स्टैंड चौक समेत कई मोहल्ले सालों से झेल रहे जलभराव का दंश
स्वर्णिम एरा व गीतांजलि सिटी फेस दो का हालत खराव
नएक बार फिर नगर निगम को जलभराव से निपटने के दावे की पेल खोल कर रख दी है। शहर के दो दर्जन से ज्जादा मोलले व कालवेनी ऐसे हैं, जो सालों से तेज वर्षा के बाद जलभराव की समस्या का सामना कर रहे हैं। जलभराव से निपटने के लिए हर साल निगम के इंजीनियर नए नए प्रयोग कर रहे हैं। लखें खर्च कर नाले, नालियों जलभराव को समता को दूर करने में सफल नहीं हो रहे। साक है कि शहरी क्षेत्र से जलभराव की समस्त ट्रा करना निगम और उसके इंजीनियर के बस की बात नहीं है। ऐसे में वर्षा ऋतु में गहरवासियों को परेशान होना पड़
इससे निपटने में एक बार फिर नगर निगम नाकाम हो गया है। जगह-जगह से गों जलभराव ने शहरवासियों की समस्या कर रख दी है। संमवार को हुई वर्षा से कई मोहलते व कालोनियों के दावासियों को जलभराव की वजह से घर में ही बैद रहना पड़ा, जो लोग बहर निकाल रहे हैं, वे जलभराव का सामना कर रहे है। शहर की कई सड़के जलमान हो गई, तो मोहल्लों में आधे से डेर फीट तक पानी भर गया। सोमवार को थी सुमहा से हो रही वर्षा दोपहर बाद तेज हो गई और देखते ही देखते। बार फिर शाम होते तक शहर में जब-जगत जलभराव ही गया और इसके बाद समस्यक शुरू हुई। रहर के कई प्रमुख संरक्षकों में पानी भर गया, जिससे वाहन चालक परेशान हुए। साफ है कि नगर निगम प्रबंधन कर साल के दावे कि इस साल से वर्षा ऋतु में जलभराव की समस्ता नहीं होगी, लेकिन हर बार जैसे ही चां होती है, सय व्यवस्था चरी की घरी ता जाती है। इस नार भी ऐसा ही हो रहा है और नगर निगम की बदइंतजामी का खामियाजा शहरवास्मिनों को भुगतव पड़ रहा है।
आने वाले दिनों में बढ़ेगी समस्या
आने वाले दिनों में स्थिति और भी खराय हो जाएगी। जैसे जैसे तेज वर्षा होगी दिसेही हालत और भी बिगड़ते जागी। शहर के हर मोहल्ले से नगर निगम को जलभराव से निष्टने व पानी निकासी कराने की बात रखी जा रही है, लेकिन इंजीनियर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
श्रीकांत वर्मा मार्ग और हंसा विहार में बढ़ गई समस्या
बोळात वर्ग मार्ग और इसी मार्ग में स्थित हस्सा विहार की समस्या छिले कुछ साले की अपेक्षा और भी बढ़ गई है। पहले हसा विहार में आधे से एक फीट तक फनी भरता था। वहीं इस साल अब एक से डेढ़ फीट तक पानी भरने लगा है। वहीं श्रीकांत वमा मार्ग के जलभराव में
बढ़ गया है। पहले सड़क के ज़्या और पानी भरा रहता था, लेकिन इस बार दोनों और पानी भरने लगा है। नगर निगम के इंजीनियरों ने श्रीकांत वर्मा वर्ग मोड़ के पास नाले में जरूरी बदलाव किया था और बताया था कि अब पानी नहीं भरेगा लेकिन इसका उल्टा असर हुआ है।
इस वजह से है
जलभराव की समस्या
नाले-तलियों की सफाई कार्य अधूरा होना
डेनेज सिस्टम सही नहीं होना। नालों के ओवरफ्लो होने से स्हकों में पानी आना।
इन क्षेत्रों में हुई समस्या
हमा विहार, श्रीकांत वमी मार्ग, भारतीय नगर, जरहापाठा के अंदरुनी क्षेत्र, तालापारा, कुम्हारकरा, अज्ञेय नगर, विनोबा नगर, करबाहर क्षेत्र कुदुदंड नदी किनारे क्षेत्र शांति नगर, सरकंडा पुराना बल स्टेज चीक प्रमुख है।
रायपुर : प्रदेश में अब तक 349.9 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज
रायपुर, 10 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 349.9 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक रायगढ़ जिले में सर्वाधिक 501.9 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 167.3 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है।
राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार सरगुजा में 264.6 मि.मी., सूरजपुर में 405.0 मि.मी., बलरामपुर में 465.8 मि.मी., जशपुर में 448.2 मि.मी., कोरिया में 383.3 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 297.3 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। रायपुर जिले में 308.4 मि.मी., बलौदाबाजार में 305.9 मि.मी., गरियाबंद में 300.8 मि.मी., महासमुंद में 316.2 मि.मी. और धमतरी में 313.4 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर में 350.5 मि.मी., मुंगेली में 373.1 मि.मी., सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 353.5 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 460.0 मि.मी., सक्ती में 401.9 मि.मी., कोरबा में 448.0 मि.मी. और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 333.1 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड हुई है। दुर्ग जिले में 301.3 मि.मी., कबीरधाम में 247.8 मि.मी., राजनांदगांव में 289.7 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 480.9 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 245.7 मि.मी., बालोद में 371.6 मि.मी. और बस्तर जिले में 436.6 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड हुई है। कोंडागांव में 263.0 मि.मी., कांकेर में 365.5 मि.मी., नारायणपुर में 314.1 मि.मी., दंतेवाड़ा में 395.7 मि.मी., सुकमा में 205.5 मि.मी. और बीजापुर में 432.9 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।



