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सिम्स में पहली बार हुआ हिंज़ नी टोटल रिप्लेसमेंट,महिला को मिली नई जिंदगी

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर।सिम्स अस्पताल के अस्थि रोग विभाग में निरंतर घुटना और कूल्हे के जोड़ों का प्रत्यारोपण हो रहा है, जोकि गरीब मरीर्जा के लिए वरदान साबित हो रहा है। इसी तरह 20 दिन पहले 70 वर्षीय महिला निवासी देवरीखुर्द। अस्थि रोग विभाग के ओपीडी में घुटर्जा की दर्द और चलने में परेशानी होने के कारण परामर्श मेने पहुंची थी।

डॉ संजय कुमार घिल्ले द्वारा मरीज की जांच की गई और एक्स रे कराई गई। एक्स रे में पाया गया कि मरीज की दोनों घुटना खराब हो चुकी है और घुटने की लिगामेंट टूट चुकी है, जिसके लिए डॉ संजय गिले द्वारा घुटना प्रत्यारोपण की सलाह दी गई। प्रत्यारोपण के लिए डॉ ए आर बेन से सलाह ली गई।

मरीज के फिटनेस के बाद मरीज के दोनों घुटों का जून में 15 दिन के अंतराल में ऑपरेशन की गई (9 जून और 27 जून) ऑपरेशन के पश्चात मरीज पूरी तरह से स्वास्थ है, दर्द मुक्त है और चलने फिरने में सक्षम है। ऑपरेशन टीम में डॉ ए आर बेन ( विभागाध्यक्ष), डॉ संजय कुमार चिल्ले (सहायक प्राध्यापक), डॉ अविनाश अग्रवाल, डॉ प्रवीन दुवेदी, डॉ शुभम पांडे और पी जी रेजिडेंट शामिल है। एनेस्थीसिया टीम में डॉ मधुमिता मूर्ति ( विभागाध्यक्ष), डॉ मिल्टन, डॉ श्वेता कुजूर, डॉ भावना और टीम शामिल थे। नर्सिंग में योगेश्वरी और टीम शामिल थे। एनेस्थीसिया डॉक्टरों का ऑपरेशन के पश्चात दर्द के निवारण में विशेष योगदान रहा है। यह ऑपरेशन सामान्य घुटना प्रत्यारोपण से बिल्कुल अलग है जिसके एक घुटने के इंप्लॉट का कीमत 1.5 लाख है। यह ऑपरेशन आयुष्मान कार्ड के द्वारा निःशुल्क किया गया। इंप्लांट उपलब्ध करने में डॉ आर मूर्ति ( अधिष्ठाता) और डॉ लखन सिंह (चिकित्सा अधीक्षक) का विशेष योगदान रहा। यह ऑपरेशन अधिष्ठाता डॉ आर मूर्ति और चिकित्सा अधीक्षक डॉ लखन सिंह और अस्थि रोग विभाग के मार्गदर्शन में सफल हुआ है।

विगत दो वर्षों से अब तक 25 कूल्हा रोज प्रत्यारोपण और 18. घुटना रोज प्रत्यारोपण आयुष्मान द्वारा निःशुल्क किया जा चुका है।

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