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सीएम साहब…स्मार्ट सिटी की यह तस्वीर बदलनी चाहिए, जानिए क्या है पूरा मामला…

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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00  बिलासपुर के देवकीनंदन चौक पर जाम नाली की सफाई के लिए निगम प्रशासन गड्ढा कर भूल गया, बाहर निकले बड़े-बड़े छड़ दुर्घटना को दे रहे थे आमंत्रण
00 मौके पर अंधेरा होने के कारण देर शाम तक कई लोग हादसे से बाल बाल बचे
00 शहर के भीतर अंडरग्राउंड सीवरेज और अमृत मिशन के काम में बरती गई लापरवाही के कारण इस तरह के दृश्य कई जगह देखे जा सकते हैं

बिलासपुर, बिलासपुर शहर,जिसे स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है,  विकास के नाम पर लापरवाही और हादसों का पर्याय बनता जा रहा है। देवकीनंदन चौक की तस्वीर इस दावे को सच साबित करती है, जहां नाली की सफाई के लिए नगर निगम ने गड्ढा खोद दिया, लेकिन उसे भरना भूल गया। इस गड्ढे से बाहर निकले बड़े-बड़े रॉड दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। अंधेरा होने की वजह से वहां देर शाम कई लोग हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गए।


शहर में अंडरग्राउंड सीवरेज और अमृत मिशन के तहत कामों में बरती गई लापरवाही चिंता का विषय बन चुकी है। ऐसे दृश्य केवल देवकीनंदन चौक तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि शहर के विभिन्न हिस्सों में इन गड्ढों और अधूरे कार्यों के चलते दुर्घटनाओं की आशंका हर समय बनी रहती है। यह स्थिति स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत किए जा रहे कार्यों पर सवाल खड़े करती है।
27फरवरी को नगर निगम के अधिकारी पूरे दिन मुंगेली नाका स्थित मैदान में महापौर और नवनिर्वाचित पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों में व्यस्त रहे। इस दौरान शहर में फैली अव्यवस्थाओं और खतरनाक हालातों पर किसी का ध्यान नहीं गया। देवकीनंदन चौक जैसे स्थानों पर प्रशासन की यह अनदेखी स्मार्ट सिटी परियोजना की विफलता को उजागर करती है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रस्तावित आगमन के मद्देनजर भी शहर की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्मार्ट सिटी की परियोजनाओं के बावजूद शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की दुर्दशा, प्रशासनिक लापरवाही का जीवंत उदाहरण है। ऐसे में सवाल उठता है कि स्मार्ट सिटी का दर्जा आखिर किस आधार पर दिया गया?


शहरवासियों का कहना है कि स्मार्ट सिटी की योजनाओं का लाभ अब तक धरातल पर नजर नहीं आता। न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि अधूरी परियोजनाएं और लापरवाह कार्यशैली से लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। मुख्यमंत्री के आगमन से पहले प्रशासन को इन मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और शहर को वास्तव में स्मार्ट बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
बिलासपुर के नागरिकों की उम्मीदें अब भी इस बात पर टिकी हैं कि स्मार्ट सिटी का सपना केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे वास्तविकता में तब्दील किया जाए।

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